मॉड्यूलर ओटी में सात दिन नहीं होंगे ऑपरेशन

Lucknow Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। केजीएमयू के सीवीटीएस विभाग में संक्रमण फैलने की मुख्य वजह ओटी निर्माण में की गई घोर लापरवाही है। निर्माण एजेंसी ने मॉड्यूलर ओटी में संक्रमण रोकने के लिए मानकों के अनुरूप फिल्टर नहीं लगाए। चिविवि प्रशासन की ओर से दोबारा कराई गई जांच में यह खुलासा हुआ है। कुलपति ने निर्माण एजेंसी के साथ बैठक कर जल्द फिल्टर लगाने को कहा है। ये फिल्टर बंगलूरू से आने के बाद लगाए जाने हैं। इसके चलते ओटी में सात दिन तक ऑपरेशन बंद रहेंगे।
कुलपति का कहना है कि कई चरणों में जांच कराई गई है। हर बार संक्रमण सामने आया। ऐसे में फिल्टर लगने तक कोई सर्जरी नहीं की जाएगी। हालांकि इस लापरवाही का जिम्मेदार चिविवि प्रशासन भी है। बिना मानकों का निरीक्षण कर ओटी में सर्जरी करना शुरू कर दिया। पिछले दस दिनों से संक्रमण की वजह से चर्चा में रहे सीवीटीएस विभाग की मॉड्यूलर ओटी की साफ-सफाई के बाद दोबारा कल्चर जांच कराई गई। इसमें संक्रमण पाया गया, उसके बाद इस संक्रमण की वजह तलाशने पर मंथन शुरू हुआ। ओटी से कोई सुराग नहीं लगा तो चिकित्सकों ने ओटी के मानकों के बारे में जानकारी ली। इसमें सामने आया कि मॉड्यूलर ओटी में कंप्रेस्ड एयर मशीन नहीं है। इस वजह से हवा बिना छने ओटी में पहुंच रही है। इसको फिल्टर के बिना रोका नहीं जा सकता। एक ओटी में 24 फिल्टर लगते हैं। एक मशीन में चार फिल्टर होते हैं लेकिन यहां सिर्फ दो ही लगे हैं। इसपर कुलपति ने ओटी का निर्माण कराने वाली संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की। यूपी आरएनएन ने इस काम को दिल्ली की कंपनी पीईएस को दिया था। पीईएस के अधिकारियों ने ओटी का निरीक्षण किया तो अनियमितता सामने आई। उसके बाद कंपनी ने बंगलूरू से फिल्टर मंगाए हैं। इन फिल्टरों के आने में सात दिनों का समय लग सकता है। उसके बाद से ही ओटी में सर्जरी हो सकेंगी।
चिविवि कम दोषी नहीं
निर्माण एजेंसी ने निर्माण कार्यों में लाखों रुपये बचाने के लिये ओटी में फिल्टर नहीं लगाए। लेकिन केजीएमयू प्रशासन यदि ओटी में सर्जरी शुरू करने से पहले मानकों का निरीक्षण कर लेता तो यह नौबत नहीं आती। हालांकि केजीएमयू प्रशासन अपनी गलती से पल्ला झाड़ रहा है। कुलपति कहते हैं कि हमें लगा कि ओटी मानकों के हिसाब से सही होगी। इस वजह से नहीं देखा गया। वैसे भी हर चीज की जांच नहीं की सकती है। कंपनी पर भरोसा करके ही काम सौंपा जाता है।
संक्रमण जांच को 11 सदस्यीय टीम
सीवीटीएस विभाग में संक्रमण से घबराए चिविवि प्रशासन ने सभी विभागों की ओटी में संक्रमण जांच को 11 सदस्यीय टीम गठित कर दी है। इसमें दो चिकित्सक पीजीआई के और नौ केजीएमयू के हैं। यह टीम ओटी के मानकों की जांच कर लगातार निरीक्षण करती रहेगी जिससे आगे संक्रमण को रोका जा सकेगा।

वर्जन
हमने कई चरणों में सीवीटीएस विभाग में संक्रमण की जांच कराई। इसमें निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आई है। संस्था ने ओटी में कंप्रेस्ड एयर सिस्टम नहीं लगाया और चार की जगह महज दो ही फिल्टर लगाए गए। इस एजेंसी के खिलाफ शासन व राज्यपाल को लिखा जाएगा। ओटी में सर्जरी तभी शुरू की जाएंगी, जब फिल्टर लग जाएंगे।
डॉ. डी के गुप्ता, कुलपति केजीएमयू

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