स्वतंत्र गर्ल्स कॉलेज को फिर मान्यता की तैयारी!

Lucknow Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। राजधानी में फर्जीवाड़े के नित नए कारनामे गढ़ने के लिए चर्चा में रहे स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज को फिर मान्यता दिए जाने की तैयारी है। शासन एवं कार्यपरिषद ने सत्र 2011-12 से इस कॉलेज एवं इसी से जुड़ी दूसरी संस्था एसजी डिग्री कॉलेज की मान्यता समाप्त कर दी थी। स्वतंत्र ने फिर से मान्यता के लिए आवेदन किया था और उसकी मुराद पूरी होते दिख रही है।
लखनऊ विवि से संबद्ध स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज एवं एसजी कॉलेज को मानकों के विपरीत संबद्धता दी गई थी। स्वतंत्र गर्ल्स कॉलेज का प्रबंधतंत्र जहां अनुमोदित नहीं था वहीं पिछले सत्र में उसने बिना मान्यता ही बीकॉम की 126 छात्राओं का प्रवेश कर लिया था। दूसरी ओर एसजी कॉलेज की जमीन से लेकर भवन, शिक्षक एवं संसाधन के सारे दस्तावेज ही फर्जी थे। कॉलेज का भौतिक अस्तित्व ही नहीं था। जांच के बाद लविवि ने कार्रवाई की गेंद शासन के पाले में डाल दी थी। इसके बाद शासन ने दोनों कॉलेजों की मान्यता एवं संबद्धता समाप्त करने के लिए लविवि प्रशासन को निर्देश दिया था। आदेश के बाद लविवि प्रशासन ने इन कॉलेजों की संबद्धता समाप्त कर दी थी। विश्वविद्यालय के आदेश के बाद कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट का रुख कर लिया था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद स्वतंत्र की लविवि प्रशासन ने दोबारा सुनवाई की थी। इसके बाद बीए, बीएससी एवं बीएड पाठ्यक्रमों के लिए लविवि ने दोबारा कॉलेज का पैनल निरीक्षण कराया था। इसकी रिपोर्ट आ गई है। 28 दिसंबर को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में यह रिपोर्ट विचार के लिए रखी जाएगी।

आज तक तय नहीं हुए फर्जीवाड़े के दोषी
शासन ने लखनऊ विवि से इन कॉलेजों की मान्यता तो समाप्त करने को तो कहा ही था, साथ ही इस मामले के दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा था। लविवि ने कॉलेज की संबद्धता तो समाप्त कर दी लेकिन फर्जीवाड़े के दोषियों पर कार्रवाई करने के मसले पर चुप्पी साध ली। कार्यपरिषद द्वारा प्रकरण से जुड़े लोगों को नोटिस देने की चर्चा भी उठी लेकिन शिक्षकों के दबाव और अधिकारियों के लगाव में यह दम तोड़ गई। 31 मार्च 2011 को कुलपति ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। जिसके चेयरमैन केजीएमयू के प्रो. सूर्यकांत थे जबकि लखनऊ विवि के केमेस्ट्री विभाग के प्रो. पीसी श्रीवास्तव एवं हिंदी विभाग की डॉ. रीता को कमेटी में बतौर सदस्य रखा गया था। तत्कालीन कुलपति प्रो. मनोज मिश्र ने कमेटी को एक माह में रिपोर्ट देने को कहा था। स्वतंत्र कॉलेज प्रकरण में जांच के लिए बनी यह चौथी कमेटी थी। इससे पूर्व एक कमेटी बीकॉम में फर्जी एडमिशन के मामले के बाद बनाई गई थी, दूसरी ओर एसजी मामले के खुलासे के बाद लविवि ने एक कमेटी बनाई जबकि उच्च शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में शासन ने भी जांच कराई थी। इसके बाद अस्तित्व में आई चौथी कमेटी ने भी जांच करके अपनी रिपोर्ट लखनऊ विवि प्रशासन के समक्ष रख दी। लेकिन आज तक न रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और नहीं दोषी। फर्जीवाड़े के दोषी अभी तक तय नहीं हो सके।

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