क्लस्टर कंप्यूटिंग से जुड़ेंगे लविवि के चार विभाग

Lucknow Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध कार्यों को और प्रमाणिक तथा बेहतर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत विवि के चार विभागों को क्लस्टर कंप्यूटिंग से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने लखनऊ विवि को 11वीं योजना में 40 लाख रुपये आवंटित किए हैं।
लविवि में शोध कार्यों के लिए आज भी सालों पुराने सॉफ्टवेयर्स का उपयोग किया जाता है। इससे न केवल शोध की गुणवत्ता बल्कि मानकों पर भी कई बार सवाल उठाए जाते रहे हैं। खासकर विज्ञान संकाय के शोध कार्यों में इस तरह की दिक्कतें आम हैं। इसे देखते हुए विवि प्रशासन ने यूजीसी से चार विभागों को क्लस्टर कंप्यूटिंग से जोड़ने का प्रस्ताव भेजा जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया। आयोग ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विवि प्रशासन के पास बचे लगभग दो करोड़ रुपये में से 40 लाख रुपये इसके लिए आवंटित कर दिए हैं। विवि प्रशासन को आयोग ने अनुदान का उपयोग करने के लिए 31 मार्च 2013 तक का समय भी दिया है। योजना के तहत फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स और स्टेटिक्स को जोड़ा जाएगा। जानकारों के मुताबिक क्लस्टर कंप्यूटिंग से चारों विभागों के शिक्षकों और शोधार्थियों को लाभ मिलेगा। सभी एक दूसरे से आसानी से डेटा शेयर कर सकेंगे। इसके साथ ही कंप्यूटर पर ही बड़ी गुत्थियों को सुलझाने में एक दूसरे की मदद भी कर सकेंगे। इतना ही नहीं एक ही सॉफ्टवेयर पर एक समय में बहुतेरे शोधार्थी काम भी कर सकेंगे। यही नहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग से विभागों के शोधार्थी व शिक्षक एक दूसरे से संपर्क भी कर सकेंगे। इससे न केवल शोध कार्यों में तेजी आएगी बल्कि नए सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल कर शोध की गुणवत्ता बेहतर भी की जा सकेगी।

क्या है क्लस्टर कंप्यूटिंग
क्लस्टर कंप्यूटिंग के तहत कई कंप्यूटर्स को एक मास्टर कंप्यूटर से जोड़ दिया जाता है। मास्टर कंप्यूटर सभी यूजर्स की जरूरतों के अनुसार उन्हें सुविधाएं प्रदान करता है। इसे एक तरीके से सभी का सम्मिलित डेटाबेस भी कहा जा सकता है। इससे एक साथ और एक ही समय में कई यूजर्स को एक ही सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
मितव्ययी है व्यवस्था
क्लस्टर कंप्यूटिंग से चारों विभागों के जुड़ जाने से शोध कार्यों के लिए सामान रूप से उपयोग में आने वाले बहुत महंगे सॉफ्टवेयर्स के उपयोग पर खर्च कम लगेगा। क्योंकि एक सॉफ्टवेयर से ही चारो विभागों के शोधार्थी अपने शोध कार्यों को पूरा कर सकेंगे। इससे विवि को चार सॉफ्टवेयर्स खरीदने के लिए मोटी रकम नहीं खर्च करनी होगी।
5 दिसंबर को इसके लिए एक बैठक बुलाई गई है। जिसमें सर्वर लगाने के स्थान के चयन पर चर्चा होगी। इसके साथ ही नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर से कंफीगरेशन सॉफ्टवेयर्स की भी मांग के लिए बात की गई है। योजना का क्रियान्वयन मार्च 2013 तक करना है। हम जल्द ही इसे पूरा कर लेंगे। यह शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। - जेबी सिंह, रजिस्ट्रार, लखनऊ विश्वविद्यालय

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