विद्यार्थियों के लिए आदर्श हैं राजेंद्र बाबू

Lucknow Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। भारत रत्न डा. राजेंद्र प्रसाद विलक्षण प्रतिभा के साथ ही अत्यंत सरल और मृदुभाषी स्वभाव के धनी थे। वास्तव में वह देश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत और आदर्श हैं। विद्यालय में गणित की परीक्षा के दौरान दस में से पांच सवालों को हल करने के नियम के बावजूद उन्होंने दसों सवाल हल किए। उत्तर पुस्तिका में किन्हीं पांच सवालों को जांचने का जवाब ही उनकी प्रतिभा का परिचायक है। यह बात प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने कही। वह सोमवार को लविवि के मालवीय सभागार में डा. राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल सोसाइटी की ओर से आयोजित डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 128वीं जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोगों को प्रतिज्ञा दिलाई कि ‘देश को बढ़ाने में हम वैसा ही योगदान देंगे जैसा कि डा. प्रसाद ने दिया था’। पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव ने भी राजेंद्र बाबू से जुडे़ संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि देश का संविधान बनने के समय जब भी कोई अड़चन आई राजेंद्र बाबू ने सभी का मार्ग दर्शन किया। सुदृढ़ पंचायती राज व्यवस्था के लिए वह गांधी जी से सहमत थे। पूरे देश में आज यह व्यवस्था काफी बेहतर तरीके से काम कर रही है, यह डा. राजेंद्र प्रसाद के ही प्रयासों की देन है। उप्र और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल एनडी तिवारी ने गीता के श्लोक कर्मण्ये वाधिकारस्ते ... सुनाते हुए डॉ. प्रसाद को कर्मयोगी की संज्ञा दी। महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि वह हिंदी को महत्व दिए जाने की हमेशा वकालत करते थे। संविधान सभा के अंग्रेजी में बन रहे ड्राफ्ट को सदस्यों के अनुरोध पर हिंदी में भी बनवाया। चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीके गुप्ता ने उन्हें व्यक्ति के रूप में विचार की संज्ञा देते हुए उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। कार्यक्रम के संयोजक पूर्व मंत्री नरेश चंद्रा ने सभी का स्वागत किया और डॉ. सुभाष चंद्रा ने आभार प्रकट किया। इस अवसर पर लविवि कुलपति जी. पटनायक सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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