राज्य सरकार संग स्कूल खोलेगी सेना

Lucknow Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं को सैन्य अफसर बनने के लिए प्रेरित करने की नीति के तहत सेंट्रल कमांड राजधानी में ‘फिनिशिंग स्कूल’ खोलने की तैयारी में है। ये स्कूल राज्य सरकार के साथ मिलकर खोले जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार और सेना में बातचीत शुरू हो गई है। ये जानकारी शनिवार को सेंट्रल कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत ने दी। इस मौके पर उन्होंने सेंट्रल कमांड की स्वर्ण जयंती की याद में एक लोगो का अनावरण भी किया। लेफ्टिनेंट जनरल चैत ने बताया कि युवाओं को लगातार सेना में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल में यहां सैनिकों की ट्रेनिंग के दौरान वहां मौजूद रहीं करीब 200 छात्राओं ने सेना में कॅरिअर बनाने की इच्छा जताई है। ले. ज. अनिल चैत ने बताया कि ‘फिनिशिंग स्कूलों’ का उद्देश्य युवाओं को सैन्य अफसर बनाने के लिए प्रेरित करना है। सेना अपनी ओर से सारे संसाधन उपलब्ध कराने का तैयार है बाकी के बारे में राज्य सरकार से बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि फिनिशिंग स्कूल 12वीं तक होंगे जहां सेना के चुने हुए अधिकारी सेना के लिए अफसर तैयार करेंगे। देश में यह शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी। चैत ने बताया कि इस समय सेना में करीब 10 हजार सैन्य अधिकारियों की कमी है। उत्तर प्रदेश से सेना में आनुपातिक भागीदारी तो और भी कम है। उन्हाेंने बताया कि आज युवा अधिक पैसा कमाने के चक्कर में दूसरे क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन सेना में कॅरियर बनाने का मतलब यह है कि अगले 40 साल तक यहां व्यक्ति को ऐसी जीवनशैली मिलेगी जो कोई और नहीं दे सकता। इसी रवैये में बदलाव लाकर सेना की ओर युवाओं को मोड़ा जा सकता है।
ग्रामीण खेल प्रतिभाओं पर सेना की नजर ः सेंट्रल कमांड अपने स्वर्ण जयंती आयोजनों के बहाने प्रदेश की ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को तराशेगी। ले. जनरल चैत ने बताया कि सेना की ‘ब्वायज स्पोर्ट्स कंपनी’ में हर साल करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती हैं। इन्हें भरना सेंट्रल कमांड की प्राथमिकताओं में है। इसके तहत क्लास 6 में आए विद्यार्थियों में से प्रतिभावान छात्र को चुनकर कंपनी में प्रवेश दिया जाएगा। इनकी पढ़ाई और इस दौरान जीवन यापन तक की व्यवस्था सेना करेगी। इसके साथ ही इन्हें खेलों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सेना ग्रामीण खिलाड़ियों को महत्व देगी। उन्होंने बताया कि सेना का लक्ष्य विजय कुमार जैसे कई ओलंपियन तैयार करना है। उप्र ओलंपिक एसोसिएशन के जरिए भी विभिन्न खेल संगठनों को जोड़ा जा रहा है ताकि प्रदेश की टीमों और खिलाड़ियों को सेना के साथ तैयारी करने का मौका मिल सके। वहीं फुटबॉल, एयर राइफल शूटिंग, घुड़सवारी, वॉलीबॉल आदि की टीमों को भी सेना की टीमों के साथ ट्रेनिंग का मौका दिया जा रहा है ताकि उनका स्तर बेहतर हो सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश की साइकिल पोलो व सेना की टीम के बीच टूर्नामेंट कराने की तैयारी है।
लखनऊ में 100 साल बाद पोलो ः स्वर्ण जयंती आयोजनों के तहत सेंट्रल कमांड और लखनऊ रेस कोर्स क्लब मिलकर 11 से 16 दिसंबर तक पोलो प्रतियोगिता करवाने जा रहे हैं। यह विशेष आयोजन है क्योंकि इससे पहले लखनऊ में पोलो टूर्नामेंट का आयोजन 1912 में हुआ था। ठीक सौ वर्ष बाद हो रहे इस आयोजन में बंगलुरु, मेरठ, कैवलरी, आईएमए देहरादून और नासिक की टीमें हिस्सा लेंगी।
विजय दिवस पर एयर शो ः पोलो का फाइनल 16 दिसंबर को होगा। इसी दिन को 1971 की पाकिस्तान पर जीत की याद में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सेना डॉग शो, मोटर साइकिल शो, हॉर्स डिस्प्ले, मिलिट्री बैंड और स्काई डाइविंग जैसी रोमांचक और आकर्षक गतिविधियां होंगी। ले. जनरल चैत ने बताया कि सेंट्रल कमांड इस मौके पर लखनऊ में एयर शो कराने की भी कोशिश कर रहा है, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।
एयरो एडवेंचर स्पोर्ट्स सेंटर गठन की भी तैयारी ः युवाओं को आकर्षित करने के लिए सेना एडवेंचर स्पोर्ट्स को जरिया बनाने की योजना बना रही है। ले. जनरल चैत के अनुसार सेंट्रल कमांड के विभिन्न केंद्रों पर एयरो एडवेंचर स्पोर्ट्स सेंटर शुरू होंगे। इनका लक्ष्य स्कूली विद्यार्थियों को सदस्य बनाकर उन्हें एडवेंचर स्पोर्ट्स का रोमांच दिलाना है। इससे युवाओं को सेना के रोमांच भरे कॅरियर की ओर मोड़ने में सहूलियत होगी।
राजधानी में 23 दिसंबर को हाफ मैराथन ः सेना 23 दिसंबर को एएमसी सेंटर स्टेडियम से हाफ मैराथन आयोजित करेगी, जो करीब 21 किमी की होगी। इसमें सभी वर्गों के नागरिक शामिल हो सकेंगे। इसके लिए 9 दिसंबर से रजिस्ट्रेशन शुरू किए जाएंगे।
एनसीसी के जरिए भी युवाओं पर टारगेट ः ले. जनरल चैत ने बताया कि जैसे-जैसे प्रदेश में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, शिक्षित लड़कियों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश के 1200 संस्थानों में करीब 20 हजार एनसीसी कैडेट्स हैं। सेंट्रल कमांड का लक्ष्य अब एनसीसी में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना है। एनसीसी के जरिए युवाओं को सशक्त करना आसान है। सी सर्टिफिकेट प्राप्त कैडेट्स को एसएसबी के जरिए सेना में कॅरियर बनाने में आसानी होती है, इसलिए अब उन्हें एनसीसी के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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