कम मरीज, गायब डॉक्टर-बाबू और लापरवाह एम्बुलेंस चालक

Lucknow Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। अस्पतालों में जहां बेड फुल चल रहे हैं। मरीजों के साथ चिकित्सकों पर भी दबाव है। नाजुक हालत में मरीजों को लौटाया जा रहा है। वहीं शहर के एक प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल में आधे से ज्यादा बेड खाली पड़े हैं। इतना ही नहीं यहां तैनात कई डॉक्टर छुट्टी पर हैं, जबकि जिनकी ड्यूटी है वे भी नहीं आ रहे। शनिवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. अहमद हसन के औचक निरीक्षण में महानगर स्थित भाऊराव देवरस अस्पताल का कुछ ऐसा ही हाल दिखा। इसके बाद नाराज मंत्री ने न सिर्फ अस्पताल के सीएमएस को जमकर फटकार लगाई बल्कि बिना बताये ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टर, दो बाबुओं को निलंबित भी कर दिया। इसके अलावा लापरवाही बरतने वाले एम्बुलेंस चालक को हटाने का निर्देश दिया गया है। मंत्री की इस कार्रवाई के बाद देर शाम तक हड़कंप मचा रहा।
भाऊराव देवरस अस्पताल में शनिवार सुबह 11 बजे अचानक स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन पहुंच गए। बताया जा रहा है कि एक मरीज की शिकायत के बाद उन्होंने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। मंत्री के अस्पताल पहुंचते ही अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल के सीएमएस व डॉक्टर तुरंत उनके पास पहुंच गए। डॉ. अहमद हसन सबसे पहले पर्चा काउंटर से होते हुए वार्डों में पहुंचे। यहां बेड व बिस्तर पर धूल जमी थी। वार्डों में भी गंदगी मिली। 34 बेड के अस्पताल में सिर्फ 12 मरीज भर्ती मिले। ये सब देखकर उन्होंने सीएमएस डॉ. वेदप्रकाश को जमकर फटकार लगाई और वहां तैनात स्टाफ के बारे में जानकारी मांगी। उचित जवाब नहीं मिलने पर उपस्थिति रजिस्टर मंगाकर देखा तो पांच डॉक्टर अवकाश पर मिले, जबकि एक चिकित्सक डॉ. राकेश सिंह बिना सूचना के गायब थे। इसके अलावा अस्पताल के दो बाबू प्रदीप कुमार और वीपी सिंह भी मौजूद नहीं मिले। इसके बाद वे अस्पताल परिसर में खड़ी एम्बुलेंस देखने पहुंचे। धूल से ढंकी एम्बुलेंस देखकर उन्होंने ड्राइवर कमलकांत को डांट लगाई। जांच करने पर उसकी लॉगबुक भी अधूरी मिली। मंत्री का पारा चढ़ गया उन्होंने बिना सूचना गायब रहने वाले डॉ. राकेश सिंह, बाबू प्रदीप व वीपी सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए, जबकि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले चालक कमलकांत को हटाने के लिए कहा है। डॉ. अहमद हसन ने अस्पताल से जाते-जाते सभी को सुधरने की हिदायत दी है। इस मौके पर निदेशक चिकित्सा उपचार डॉ. बलजीत अरोड़ा और निदेशक प्रशासन ए.रिजवी भी उनके साथ थे।
चार माह से नहीं हुआ एक भी ऑपरेशन ः निरीक्षण के दौरान मंत्री ओटी में पहुंचे। यहां धूल जमी हुई थी। ऑपरेशन थियेटर में भी गंदगी थी। यह देख उन्होंने ऑपरेशन का रिकार्ड मांगा तो पोल खुल गई। इस अस्पताल में चार महीने से एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ था। इसका स्पष्टीकरण भी सीएमएस से मांगा गया है। निरीक्षण के दौरान मंत्री अस्पताल के निर्माण कार्यों को देखने पहुंचे तो वहां भी मानकों के अनुसार काम नहीं हो रहा था।
अस्पताल संभाल नहीं पा रहे जिला कैसे संभालेंगे ः भाऊरावदेवरस अस्पताल के सीएमएस डॉ. वेद प्रकाश को प्रदेश के एक जिले का सीएमओ बनाया गया है। लेटर नहीं मिलने की वजह से अभी वह अस्पताल में ही तैनात हैं। खास बात ये है कि डॉ. वेद प्रकाश 34 बेड के इस अस्पताल में पिछले काफी समय से हैं और इसकी बदहाल हालत के लिए काफी हद तक जिम्मेदार भी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब वह 34 बेड के अस्पताल को नहीं संभाल पा रहे हैं तो पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को कैसे दुरुस्त रख सकेंगे।

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