जिंदगी से हताश इंजीनियर ने लगाई फांसी

Lucknow Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। इंदिरानगर बी-ब्लाक में शुक्रवार सुबह जिंदगी से हताश एक इंजीनियर ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सूचना पर पुलिस ने दरवाजा खोलकर शव को नीचे उतारा और छानबीन शुरू की। पुलिस को कमरे से एक कंप्यूटर, स्पाई पेन कैमरा व सेलफोन मिला है। पुलिस ने सारे सामान को कब्जे में ले लिया है। खुदकुशी करने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। पुलिस इसे प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रही है। पुलिस सेलफोन की कॉल डिटेल व मैसेज, कंप्यूटर व स्पाई पेन से डीटेल खंगाल रही है। पुलिस की मानें तो खुदकुशी से पूर्व रात 1.33 बजे तक इंजीनियर एक युवती से चैटिंग कर रहा था। गाजीपुर के इंदिरानगर सेक्टर-बी निवासी व इलाहाबाद बैंक में कैशियर अशोक कुमार गुर्जर का बेटा सुचितवन उर्फ गुंजन (26) झांसी विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई कर कंप्टीशन की तैयारी कर रहा था। दो वर्ष पूर्व पढ़ाई कर सुचितवन अपने इंदिरानगर घर पर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, बीटेक की पढ़ाई करने के बाद नौकरी न मिलने पर सुचितवन अवसाद ग्रस्त था। बृहस्पतिवार रात खाना खाने के बाद वह तीसरे तल पर अपने कमरे में सोने चला गया। शुक्रवार सुबह देर तक कमरे से बाहर न आने पर मां अंजू ने आवाज लगाई। मगर, कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने दरवाजा खटखटाया, फिर भी कोई आहट नहीं हुई। मां ने खिड़की से झांककर देखा तो उसके होश उड़ गए। सुचितवन फंदे से लटक रहा था। मां के चिल्लाने की आवाज सुनकर घर के लोग और मोहल्ले वाले भी एकत्र हो गए। सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर सुचितवन का शव नीचे उतारा और शव को कब्जे में लेेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ गाजीपुर के मुताबिक, मृतक के पिता अशोक गुर्जर बीते 28 नवंबर रात को अपने दफ्तर के काम के सिलसिले में नैनीताल गए हैं। बहन आकांक्षा आईआईटी खड़गपुर से एमटेक की पढ़ाई कर रही है। घटना के वक्त मृतक की दादी विमला देवी व उसकी मां अंजू घर पर थी। वह दोनों सुचितवन के सुसाइड का कारण बता नहीं पा रही हैं। कमरे से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला। सुचितवन के कंप्यूटर, स्पाईपेन कैमरा और सेलफोन खंगाला जा रहा है।
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बुझ गया घर का इकलौता चिराग ः सुचितवन अपने माता-पिता का इकलौता चिराग था। माता-पिता ने बेटे के सपने पूरे करने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। एक रिश्तेदार की मानें तो सुचितवन ने भी मां-बाप का मान बढ़ाया। लगन और मेहनत से बीटेक की पढ़ाई की और अच्छे नंबरों से पास किया। कंप्टीशन की भी तैयारी कर रहा था। मगर, ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। सुचितवन की छोटी बहन आकांक्षा आईआईटी खड़गपुर से एमटेक की पढ़ाई कर रही है।
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मां के नहीं थम रहे थे आंसू ...ः सुचितवन के इस कदम से हर शख्स हैरान और आश्चर्यचकित है। मां अंजू का रो-रोकर बुरा हाल था। उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सुचित के मौत की खबर सुनकर उसके दोस्त, रिश्तेदार व परिचितों का तांता लग गया। लोगों ने रोती बिलखती अंजू व उसकी दादी को ढांढस बंधाया। सभी एक ही बात दोहरा रहे थ्रे कि आखिरी सुचितवन को किस बात का गम था जिस पर उसने यह कदम उठाया। वह एक बार गम बांटता तो शायद हम लोग कोई मदद कर पाते। मौसा बीएस रावत का कहना था कि सुचित पढ़ने में अव्वल होने के साथ सांस्कारिक भी था।

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