एल्डिको ग्रीन के 31 प्लॉटों की लीज होगी निरस्त

Lucknow Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। नगर निगम गोमतीनगर स्थित पॉश एल्डिको ग्रीन कॉलोनी के 31 आवंटियों की लीज निरस्त करने जा रहा है। करार के तहत पांच साल का एक्सटेंशन मिलने के बाद भी जिन आवंटियों ने एल्डिको ग्रीन में भूखंड पर निर्माण नहीं कराया है। उन भूखंड आवंटियों की लीज निरस्त की जाएगी। ऐसे सभी आवंटियों की सूची तैयार हो गई है जिन्होंने लीज होने के दस साल बाद भी भूखंड पर निर्माण नहीं कराया है। अब इनका अनुबंध समाप्त कर नगर निगम इन भूखंडों को नीलाम करेगा। इससे नगर निगम को पचास करोड़ रुपये से अधिक की आय होने का अनुमान है।
गोमती नगर में नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला से लगी हुई नगर निगम की एल्डिको ग्रीन कॉलोनी हैं। करीब 35 एकड़ के दायरे में फैली इस कॉलोनी में नगर निगम ने 351 भूखंड 99 साल की लीज पर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 1998 से 2003 के बीच किया गया है। लीज डीड की शर्तों के तहत रजिस्टर्ड लीज होने के बाद पांच साल के अंदर भूखंड पर निर्माण कराना अनिवार्य है। यदि पांच साल में निर्माण नहीं कराया गया तो उसके लिए पांच साल का और अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया पर आवेदन करना होगा। जिसके बाद नगर निगम भूखंड की कीमत पर दो प्रतिशत सरचार्ज वसूल कर पांच साल का अतिरिक्त समय निर्माण के लिए और देगा। उसके बाद भी यदि कोई निर्माण नहीं करेगा तो लीज निरस्त कर दी जाएगी। इसी के आधार पर नगर निगम ने एल्डिको ग्रीन ने 31 ऐसे आवंटी चिह्नित किए हैं जिन्होंने दस साल में भी निर्माण नहीं कराया। लीज की शर्तों का उल्लंघन के चलते अब इनकी लीज निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नगर निगम का संपत्ति विभाग सभी आवंटियों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है।

कई गुना बढ़ गई जमीन की कीमत
एल्डिको ग्रीन की कॉलोनी में इस समय जमीन की कीमत 5000 रुपये वर्ग फिट से अधिक है। करीब 10-12 साल पहले जब नगर निगम ने इनका आवंटन लीज पर किया था तब जमीन की कीमत महज 125 रुपये वर्ग फिट के लगभग थी। ऐसे में जो भूखंड नगर निगम ने उस समय पांच से दस लाख रुपये में आवंटित की किए थे उनकी कीमत इस समय एक से दो करोड़ रुपये पहुंच गई है।

करोड़ों के भूखंड से नाम मात्र का लीज रेंट
लीज की शर्तों के तहत अब करोड़ों की कीमत वाले भूखंड से नगर निगम को महज हर साल नाम मात्र का ही लीज रेंट मिलता है। शर्तों के तहत लीज के समय जितनी कीमत भूखंड थी। उसी पर एक प्रतिशत सालाना लीज रेंट नगर निगम को मिलता है।

भूखंड बेचा तो देना होता है 40 प्रतिशत लाभांश
लीज की शर्तो के तहत आवंटी भूखंड को बेच सकता है लेकिन उसको लाभांश (लीज के समय की कीमत से अतिरिक्त कीमत) का चालीस प्रतिशत नगर निगम में जमा करना होगा। जिसके बाद ही नगर निगम उस व्यक्ति के नाम लीज का नामांतरण करेगा जिसको मूल आवंटी ने भूखंड बेचा है।

भूखंड बेचकर तो नहीं चले गए!
सूत्रों के मुताबिक यह आशंका जताई जा रही है कि जिन लोगों ने अब तक भूखंड पर निर्माण नहीं कराया उनमें ज्यादातर ने भूखंड बेच दिए हैं। लाभांश न जमा करना पड़े, इसके चलते ही नगर निगम को कोई जानकारी नहीं दी गई है। यदि ऐसा हुआ तो लाभांश के रूप में नगर निगम को मिलने वाले करोड़ों का नुकसान हो सकता है।

ग्रीन में 31 आवंटी चिह्नित किए हैं जिन्होेंने लीज की शर्तों का पालन नही किया है। इनकी लीज निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए आवंटियों को नोटिस जारी की जा रही है। - राकेश कुमार सिंह, नगर आयुक्त

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