बताया स्टेम सेल क्या है, गॉड पार्टिकल भी समझाया

Lucknow Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। स्टेम सेल कोशिकाएं हर शरीर और हर अंग में पाई जाती हैं। वैज्ञानिकों को आज गंभीर बीमारियों को मिटाने में इनका महत्व समझ आ रहा है। बायो मेडिसिन फील्ड में इनके जरिए इलाज करने की नई-नई तकनीकें हर रोज विकसित की जा रही हैं। साइंस डे के मौके पर भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एबी पंत ने शनिवार को रीजनल साइंस सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में स्टेम सेल के विषय में यह व्याख्यान दिया। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. एमएम वर्मा ने भी गॉड पार्टिकल पर व्याख्यान दिया। इन दोनों ही विषयों पर साल 2012 के नोबेल पुरस्कार दिए गए हैं। इस मौके पर संस्थान में कई अन्य गतिविधियां भी आयोजित की गई और साइंस डे आयोजनों के दो दिनों में हुई गतिविधियों के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आए विभिन्न स्कूलों के बच्चोें को संबोधित अपने व्याख्यान में डॉ. पंत ने स्टेम सेल के महत्व को बेहद आसान भाषा में समझाया। डॉ. पंत के अनुसार स्टेम सेल्स में अनंत बार विच्छेदन की क्षमता होती है। इस क्षमता का उपयोग करते हुए चिकित्सक और वैज्ञानिक जरूरत के अनुसार विशेष सेल्स का उत्पादन कर सकते हैं। ये सेल्स जानलेवा बीमारियों को खत्म करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। स्टेम सेल इसलिए भी प्रभावी हैं क्योंकि जिस व्यक्ति पर इनका उपयोग होता है उसी के शरीर से ये निकाली जाती हैं। इस तरह यह शरीर अपने ही द्वारा उत्पन्न कोशिकाओं को पाता है और उन्हें आसानी से स्वीकार कर लेता है। अंग प्रत्यारोपण तकनीक विकसित करने में स्टेम सेल्स भविष्य की सबसे बड़ी आशा हैं।

सिर्फ 4 प्रतिशत ब्रह्मांडीय तत्वों को जानते हैं हम ः भौतिक के प्रो. एमएम वर्मा भी बतौर अतिथि आयोजन का हिस्स बनें। उन्हाेंने गॉड पार्टिकल्स पर अपना व्याख्यान दिया। प्रो. एमएम वर्मा ने बताया कि ब्रह्मांड में फैले ऐसे पदार्थ जो क्वार्क और लेप्टॉन से बने हैं, उन्हीं की पहचान मनुष्य कर सका है। ये सारे पदार्थों का 4 प्रतिशत माना जाता है। उन्हाेंने इसी के जरिए हिग्स बोसोन पदार्थ की जटिल जानकारी को श्रोताओं के समक्ष रखा। प्रो. वर्मा ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए।

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