पैदा होने के बाद बच्चा सांस न ले तो पहला एक मिनट महत्वपूर्ण

Lucknow Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। शिशु जन्म लेने के तुरंत बाद सांस नहीं ले तो, उसके बाद का एक मिनट उसके जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस एक मिनट के पहले 30 सेकेंड के अंदर शिशु को साफ कर तुरंत मां की छाती से लगाकर गर्म (कंगारू केयर) के जरिए उसकी सांस लौटाई जा सकती है। एसजीपीजीआई के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में ट्रेंड नर्सेज एसोसिएशन और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के संयुक्त तत्वावधान में ये जानकारी निओनेटल रिसेसिटेशन प्रशिक्षण के दौरान बाल रोग विशेषज्ञों ने दी। कानपुर मेडिकल कॉलेज के डॉ.यशवंत राव और आईएपी लखनऊ के डॉ.संजय निरंजन ने बताया कि प्रदेश में भी शिशु मृत्यु दर की स्थिति बेहद खराब है। प्रदेश में ये आंकड़े 61 प्रति हजार हैं। उन्होंने बताया कि देश में 10 लाख से अधिक बच्चों की जन्म के पहले महीने में मौत हो जाती है। जबकि बाकी पांच साल की उम्र तक किसी न किसी अन्य कारण से शिशुओं की मौत हो जाती है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए भारत सरकार को एक योजना बनाकर दी थी। जिसमें नवजात शिशुओं को जन्म के एक मिनट के अंदर बचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया था। परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे नवजात सुरक्षा कार्यक्रम के नाम से स्वीकृत कर लिया और आईएपी को ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने की अनुमति दी है। डॉ. पियाली भट्टाचार्या ने बताया कि देश भर में दो लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिन्हें ट्रेंड बर्थ अटेंडेंट कहा जाता है। इसी के तहत पीजीआई में ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम के तहत नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया। ये नर्सें अन्य नर्सेज को प्रशिक्षण देंगी।

गोल्डन मिनट में ऐसे करें बचाव ः डॉ.यशवंत राव ने बताया कि 90 फीसदी शिशुओं को जन्म सामान्य होता है। उन्हें किसी की जरूरत नहीं पड़ती। महज 10 फीसदी को चिकित्सा की जरूरत पड़ती है जिसमें नौ फीसदी को एक मिनट के सुरक्षा कार्यक्रम को अपनाकर बचाया जा सकता है। जबकि मात्र 1 फीसदी को ही वेंटीलेटर या एनआईसीयू की जरूरत पड़ती है। यदि बच्चा सांस नहीं ले रहा है तो उसे मां से अलगकर सीधा लिटाया जाता है। उसकी गर्दन सीधी की जाती है। इसके बाद उसके मुंह में पाइप डालकर सांस नली को साफ (सक्शन) किया जाता है। फिर पैर के पैर के तलवे में चोट पहुंचाई जाती है। जिससे वो रोने लगे। इस प्रक्रिया में 30 सेकेंड लगते हैं। यदि इस दौरान बच्चा न सांस ले तो अगले 30 सेकेंड की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसमें बच्चे को तुरंत एम्बु बैग से कृत्रिम सांस देने की प्रक्रिया की जाती है। इसमें 40 सांस प्रति मिनट दी जाती है। इस 30 सेकेंड की प्रक्रिया के बावजूद सांस न चले तो उसे तुरंत ऑक्सीजन लगाकर एनआईसीयू में रिफर कर देना चाहिए।
गोवा में सबसे कम शिशु मृत्यु दर ः डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने बताया कि देश में हर 15 सेकेंड में एक शिशु की मौत हो रही है। 4 लाख शिशुओं की जन्म के 24 घंटे के अंदर मौत हो जाती है। यही कारण है कि विश्व में शिशु मृत्यु दर के मामले में भारत सबसे आगे है। कुछ साल पहले तक भारत का शिशु मृत्यु दर के मामले में 128वां नंबर था। अब ये नंबर 150वां हो गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में गोवा में सबसे कम शिशु मृत्यु दर 10 प्रति हजार है। केरल में ये 13 प्रति हजार है। जबकि मध्य प्रदेश में ये 62 प्रति हजार है। उत्तर प्रदेश और ओडीशा में शिशु मृत्यु दर 61 प्रति हजार है। शिशुओं की मौत का सबसे सामान्य कारण सांस न लेना, संक्रमण, समय से पहले जन्म और कुपोषण है।

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