विश्वविद्यालय के विकास में शासन देगा 80 फीसदी धन

Lucknow Updated Sat, 10 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। सुविधाओं के विकास के लिए धन की कमी का रोना रोने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय की आर्थिक तंगी दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। शासन लविवि के विकास में लगने वाले धन में अस्सी फीसदी निवेश करेगा। विवि के प्रस्ताव पर शुक्रवार को हुई बैठक में शासन ने सहमति जता दी है। साथ ही भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी और प्रस्ताव भी शासन ने मंगाए हैं। लविवि को शासन की ओर से 40 करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है। अनुदान के बाद भी विवि प्रशासन को मूलभूत सुविधाओं के लिए करीब 90 करोड़ रुपये और जुटाने पड़ते हैं। इसमें सर्वाधिक राशि वेतन के भुगतान में खर्च हो जाती है। इसका भार छात्रों पर ही पड़ता है। बीते कई वर्षों से विवि घाटे में ही चल रहा था, जिसे कम करने के लिए विवि को तीन गुना तक फीस बढ़ानी पड़ी थी। घाटा तो कम हो गया, लेकिन महंगी फीस देने वाले छात्रों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विवि के छात्रावास बदतर स्थिति में हैं, वहीं बहुत सी पुरानी इमारतें भी जर्जर अवस्था में हैं। इतना ही छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं। कर्मचारी और शिक्षक आवास भी बुरी स्थिति में हैं। कुलपति ने स्वयं ही यह बात स्वीकार की है। वहीं, कई भवन धन की कमी के कारण अधूरे पडे़ हुए हैं। विवि में ब्यूरोक्रेट कुलपति ने नियुक्ति के बाद से ही आर्थिक तंगी दूर करने की कवायद शुरू कर दी थी। दो दिन पहले उच्च शिक्षा सचिव टी वेंकटेश खुद ही लविवि आए थे। कुलपति जी पटनायक से हुई बातचीत में इस संबंध में चर्चा भी हुई। शुक्रवार को इस संबंध में बैठक बुलाई गई थी, जिसमें उच्च शिक्षा सचिव के साथ अन्य अधिकारी मौजूद रहे। लविवि रजिस्ट्रार जेबी सिंह ने विवि में विकास योजनाओं में धन का निवेश करने संबंधी प्रस्ताव रखा। इसे शासन ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत विकास योजनाओं में 20 फीसदी हिस्सा लविवि और 80 फीसदी हिस्सा शासन वहन करेगा। प्रस्ताव के मंजूर होने के बाद विवि में विकास की गाड़ी पटरी पर आ सकती है।

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