लविवि के हाथ से फिसले 12 करोड़ रुपये!

Lucknow Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। सुविधाओं को बढ़ाए जाने की बात पर लखनऊ विश्वविद्यालय अक्सर धन की कमी का रोना रोता है। वहीं, दूसरी ओर उसी की लापरवाही से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 11वीं योजना में स्वीकृत 18 करोड़ रुपये में से लगभग 12 करोड़ रुपये डूबने की कगार पर हैं। विवि ने पहली किस्त के रूप में मिले करीब आठ करोड़ का यूटिलाइजेशन नहीं भेजा है। विवि ने धन का हिसाब देने व बची हुई रकम को खर्च करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे यूजीसी ने खारिज कर दिया है। अब इसका असर 12वीं योजना में मिलने वाले अनुदान पर भी पड़ने की आशंका है। यूजीसी ने ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय को 18 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया था, जिसके तहत विवि को पहली किस्त के रूप में लगभग 8 करोड़ रुपये मिले थे। इस राशि में से करीब 3 करोड़ रुपये निर्माण परियोजनाओं पर खर्च करने थे। शर्तों के मुताबिक विवि के निर्माण विभाग को कार्य कराने थे, लेकिन विवि ने कार्यदायी संस्थाओं को काम सौंप दिए। इसके बाद से ही परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का घुन लग गया। कार्यदायी संस्थाओं की कार्यशैली से जहां कॉमर्स विभाग में बने ऑडिटोरियम को गिराया गया। वहीं, अन्य निर्माण कार्यों में भी जमकर लीपापोती की गई। मामला बढ़ा तो शासन ने सभी कार्यों की टीएसी जांच के आदेश दे दिए गए। जांच के चलते तय समय 31 मार्च तक यूजीसी को हिसाब नहीं भेजा जा सका। यूटिलाइजेशन के लिए आयोग ने फिर तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी। इसके बाद भी जिम्मेदार हिसाब तैयार नहीं कर पाए। साथ ही 8 करोड़ में से 1 करोड़ 99 लाख रुपये योजना की समाप्ति तक खर्च ही नहीं हो पाए। ऐसे में बचा हुआ धन भी जाने लगा तो विवि प्रशासन ने रकम खर्च करने और हिसाब भेजने के लिए और समय की मांग की। दूसरे विश्वविद्यालयों ने भी आयोग के समक्ष यह तिथि 31 दिसंबर तक बढ़ाने की मांग की थी। इस पर आयोग की 489 बैठक में प्रस्ताव रखा गया, जिसे खारिज कर दिया गया। आयोग के तिथि बढ़ाने से इनकार करने से अब विवि को दूसरी किस्त के रूप में मिलने वाले 10 करोड़ रुपये के साथ ही पहली किस्त की शेष रकम भी लैप्स होने की कगार पर पहुंच गई है। साथ ही आयोग विश्वविद्यालयों को उनके प्रदर्शन के आधार पर ही अनुदान देता है, जिससे विवि को 12वीं योजना में मिलने वाले अनुदान में कटौती की पूरी संभावना है।
दसवीं योजना का भी हिसाब सही नहीं ः दसवीं पंचवर्षीय योजना में वूमेन्स हॉस्टल बनाने के लिए यूजीसी ने लविवि को 25 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया था। इसके तहत विवि को 12.5 लाख रुपये प्राप्त भी हुए थे। तय समय पर काम पूरा नहीं हुआ और योजना के समाप्त होने पर हिसाब भी नहीं भेजा जा सका। इस कारण बाकी बचा धन फंस ही गया। वहीं, टैगोर लाइब्रेरी और जियोलॉजी विभाग को मिले करीब साढे़ 8 लाख रुपये का सही हिसाब भी नहीं भेजा गया। आयोग के बार-बार पत्र व्यवहार के बाद भी योजना के खत्म होने के 5 साल बाद भी विवि ने हिसाब नहीं भेजा। यूजीसी ने लविवि को एक बार फिर सही प्रारूप में खर्च का हिसाब भेजने को कहा है।

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