टक्सिडो पर भारी शेरवानी

Lucknow Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। फेस्टिव सीजन के बहाने लखनऊ में एक बार फिर पारंपरिक परिधानों का चलन लौट आया है। ब्रांडेड गारमेंट कंपनियों ने भी ग्राहकों के रुझान को देखते हुए अपने कलेक्शंस में पारंपरिक परिधानों को अपने ब्रांड नेम के साथ उतारा है। हालांकि सालों से पारंपरिक परिधान तैयार करने से जुड़े लोगों के यहां तैयार हो रहे जरकन, चिकन और खादी के परिधानों की मांग सबसे ज्यादा है।
गारमेंट कारोबारियों को दीपावली पर 190 करोड़ रुपये तक का कारोबार होने की उम्मीद है। इसमें 20 से 22 प्रतिशत ब्रांडेड परिधानों की हिस्सेदारी का वे अनुमान लगा रहे हैं। बाकी बाजार क्षेत्रीय उत्पादकों के हिस्से रहेगा। हालांकि कुछ पारंपरिक परिधानों के कारोबारियों के अनुसार ब्रांडेड की हिस्सेदारी अनुमानित से भी कम रह सकती है। लखनऊ के हुसैनाबाद में पारंपरिक परिधानों के कारोबारी इकबाल हुसैन की कई पीढ़ियां जरकन-जरदोजी, चिकन और अन्य शैली का नग-कुंदन का काम करती रही हैं। बाबा जानी के नाम से मशहूर हुसैन ने बताया कि लखनऊ में तैयार होने वाले पारंपरिक परिधान पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश तक के बाजार में पहुंचते हैं और पंजाबी शैली के परिधानों के नाम से बेचे जाते हैं। इस दीपावली पर इन परिधानों की मांग में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसे पूरा करने में चौक के परिधान कारोबारी जुटे हुए हैं।

चमक-दमक का लौटा दौर: हुसैनाबाद, अमीनाबाद, नक्खास, नजीराबाद, चौक आदि क्षेत्रों की दुकानों में 50 हजार से 1 लाख रुपये तक के लहंगे उपलब्ध हैं तो 2 से 3 हजार के सूट और साड़ियां भी हैं। चिकन कारोबारी गिरीश अग्रवाल बताते हैं कि बनारसी साड़ियां जितने की होती हैं, उसका दोगुना-तिगुना लोग चिकन वर्क पर खर्च कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक बार फिर चमक-दमक लिए वस्त्रों का दौर लौट आया है। जरकन में लगने वाले नग ही प्रति पीस 55 से 77 रुपये तक पड़ते हैं, ऐसे में इनकी कीमत बढ़ जाती है। वहीं लड़कियों में कम रेंज के सूट बतौर कैजुअल्स पसंद किए जा रहे हैं।

ब्रांडेड में ट्रेंड और ऑफर्स: ब्रांडेड परिधानों की कंपनियों ने वेस्टर्न आउटफिट्स पर इस दीपावली गिने-चुने ऑफर्स रखे हैं। उनकी रणनीति नए कलेक्शन से उपभोक्ताओं को लुभाने की है। विंटर-ऑटम कलेक्शन-2012 के नाम से अधिकतर बड़े ब्रांड नई रेंज लेकर आए हैं। वहीं अब तक वेस्टर्न सूट्स के लिए लोकप्रिय रहे ब्रांड वेस्टर्न-एथनिक, इंडो-वेस्टर्न, मैरिज कलेक्शन आदि के नाम से शेरवानियां और भारतीय शैली के सूट से उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में जुट गए हैं। बंद गला-शेरवानी और टक्सिडो के बीच यह मुकाबला इस बार रोचक बन पड़ा है। हालांकि लखनवी शैली ही ज्यादा पसंद की जा रही है।

रणनीति ने किया काम: पारंपरिक कारोबारियों और सरकारी स्तर से हो रहे प्रयासों ने लखनऊ की विरासती शैली के परिधानों को लोकप्रियता दिलाने में मदद की है। यूपी हैंडलूम द्वारा खादी के साथ पारंपरिक वस्त्रों की सेल और प्रदर्शनियों का सिलसिला का जारी है। मिनिस्ट्री ऑफ टेक्स्टाइल द्वारा लखनऊ में आयोजित सिल्क हैंडलूम प्रदर्शनी ने भी लोगों को भारतीय परिधानों को बतौर फैशन स्टेटमेंट अपनाने के लिए प्रेरित किया। आयोजनों के दौरान 25 से 50 प्रतिशत तक छूट के साथ वस्त्रों को बेचा गया। इनमें डिजाइनर खादी साड़ियां, सिल्क साड़ियां, धोती-शेरवानी, खादी जर्सी से लेकर स्कार्फ-स्टॉल तक शामिल रहे।

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