लखनऊ की यंग जनरेशन ने जानी भारत की विविधता

Lucknow Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। विश्व की सिर्फ 2 प्रतिशत धरती हमारे पास है, लेकिन 8 प्रतिशत जैव विविधता के साथ हमारे पास दुनिया के सबसे ज्यादा तरह के पशु-पक्षी और पेड़-पौधे और अन्य जीव हैं। हर तरह की विविधता से भरे देश के खजाने को देखने का मौका शहरवासियों को देने साइंस एक्सप्रेस बायो-डायवर्सिटी स्पेशल ट्रेन बुधवार को लखनऊ पहुंची। पहले दिन लखनऊ के सैकड़ों बच्चों ने ट्रेन में दी गई जानकारियों को पढ़ा और देखा।
भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार की गई इस रेल का पहले ही दिन कई विद्यालयों के बच्चों ने अवलोकन किया। रेल के आठ डिब्बों में पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा बनाए गए मॉडल और चार्ट लगाए गए हैं। देश में पर्यावरण के हाल, इसे हो रहे नुकसान और बचाव के उपायों के बारे में बताया गया। एक्सप्रेस टीम के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा, राघव पांड्या, नितिन तिवाने और युवा वॉलेंटियर्स ने बच्चों और अन्य विजिटर्स को ट्रेन के विभिन्न हिस्सों के बारे में विस्तार से समझाया। इससे पहले प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण वीएन गर्ग ने फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस मौके पर वन सचिव पवन कुमार, प्रमुख वन संरक्षक जेएस अस्थाना, प्रमुख वन संरक्षक (अनुसंधान व प्रशिक्षण) डॉ. अश्विनी कुमार, प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) रूपक डे, वन निगम प्रबंध निदेशक उमेंद्र शर्मा, मुख्य परियोजना निदेशक जायका वीके ठाकुर, सीईई उत्तर जोन प्रीति कन्नौजिया, पर्यावरण निदेशक ओपी वर्मा आदि मौजूद थे।

प्रमुख आकर्षण : देखिए, सुनिए, हर कोच जो कहता है
कोच 1 - भारत की जैव विविधता
ट्रेन का पहला कोच भारत की समृद्ध जैव विविधता की कहानी कहता है। इसके अनुसार यहां 16 किस्म की विविधता वाले जंगल हैं, जिससे समझा जा सकता है कि हर जंगल विविधता लिए हुए हैं, लेकिन संरक्षण की कमी की वजह से यह खत्म हो रहे हैं। एशियाटिक चीता, पिंक हैड डक, हिमालयन क्वेल से लेकर देसी गेहूं, पशु-पक्षी और पौधे हमारे देश से खत्म हो चुके हैं। प्रमुख वजहें हैं जंगलों का कटना, पर्यावरण असंतुलन और शिकार।

कोच 2 - ट्रांस हिमालय और हिमालय
अपने देश का ट्रांस हिमालयी क्षेत्र सबसे उत्तरी हिस्सा है, जहां ठंडे रेगिस्तान हैं और हिमालय जिसकी वजह से देश के बाकी हिस्सों में वर्षा होती है, ट्रांस हिमालयी क्षेत्र में नाममात्र की वर्षा की वजह बनता है। यहां स्नो लैपर्ड है तो डबल कूबड़ वाले ऊंट भी। वहीं हिमालय के प्रसार में पाई जाने वाली जड़ी बूटियों और पक्षियों तक की जानकारी यहां से ली जा सकती है।

कोच 3 - अपना गंगा का मैदान
इस कोच में आकर आप न केवल यह जान सकते हैं कि गंगा का मैदान विश्व का सबसे अधिक घनत्व वाला क्षेत्र है बल्कि उत्पादन भी यहां भरपूर है। देश की सबसे ज्यादा सब्जियां यहीं उगाई जाती हैं। यानी दांत दिए तो रोटी का इंतजाम भी पूरा है। दूसरी ओर वन्य जीवन भी भरपूर पनपा है और यहां के 52 संरक्षित क्षेत्रों व जंगलात में 15 प्रजातियों के कछुए, 5 प्रजातियों के हिरनों से लेकर गैंडे तक पनाह पाते हैं। हाल के वर्षों में कृषि में कीटनाशकों के बढ़े उपयोग ने गंगा के मैदानों को नुकसान पहुंचाया है।

कोच 4 - जहां उत्तर पूर्व की संस्कृति है
कम ही लोग जानते हैं कि कुछ सौ लाख की आबादी वाले भारत के उत्तर पूर्वी 7 राज्यों की जनजातियां सांस्कृतिक रूप से कितनी रईस हैं। यहां 220 जनजातियां पाई जाती हैं जो 1 हजार से ज्यादा भाषाओं और बोलियों की मालिक हैं। साइंस एक्सप्रेस के इस कोच में आकर जाना जा सकता है कि यहां चावल की छह तरह फसलें ली जाती हैं जिन्हें इन्हें तैयार करने वाले मौसम और माहौल के अनुकूल नाम दिए गए हैं। अहू (पतझड़ में ), साह (सर्दियों में), जोरो (वसंत में), असरा (उथले पानी में), बाओ (गहरे पानी में), पहाड़ी (पहाड़ पर) ये चावल उगाए जाते हैं।

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