तेजिन्दर को मिला कथाक्रम सम्मान

Lucknow Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। हाशिए के लोगों को अपनी रचनाओं का विषय बनाने वाले रायपुर के वरिष्ठ कथाकार तेजिन्दर को राजधानी में शनिवार को हुए समारोह में कथाक्रम सम्मान से सम्मानित किया गया। बली प्रेक्षागृह में हुए इस आयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार मुद्राराक्षस, गोविन्द मिश्र और संयोजक शैलेन्द्र सागर ने तेजिन्दर को स्मृति चिह्न, शाल और 15 हजार रुपये की राशि देकर सम्मानित किया। इसी के साथ दो दिवसीय कथाक्रम समारोह का भी शुभारंभ हुआ। हिन्दी कथा साहित्य पर होने वाले इस आयोजन का यह 20 वां वर्ष है जबकि तेजिन्दर को 16 वें कथाक्रम सम्मान से सम्मानित किया गया है। गोविन्द मिश्र ने इस मौके पर तेजिन्दर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे बहुत आक्रामक होकर नहीं लिखते बल्कि स्थितियों को अपनी बात कहने देते हैं। तेजिन्दर की रचनाओं में खुलापन है। जो भी उनके अनुभव में आता है, वे उसके आरपार देखते हैं। मुद्राराक्षस ने कहा कि तेजिन्दर की रचनाओं को पढ़ते हुए मैलकम एक्स की याद आती है जिन्होंने अमेरिका में अश्वेतों के बारे में लिखा था। आलोचक वीरेन्द्र यादव ने कहा कि तेजिन्दर केन्द्रीय सेवा में थे। वे उड़ीसा, तमिलनाडु सहित जहां कहीं भी गए वहां के हाशिए के लोगों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। इसी प्रकार उन्होंने पंजाब का भी हाल लिखा है। वास्तव में कथा साहित्य में बहुत सारे लोग और दृश्य तेजिन्दर की रचनाओं के पहले अनुपस्थित थे। सम्मान के प्रति आभार जताते हुए तेजिन्दर ने कहा कि मैं कथाक्रम पा चुके साहित्यकारों की सूची में शामिल होकर खुशी और संतोष अनुभव कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि यह साहित्य के रीतिकाल का समय नहीं है। यह नर्म, उदास, कलावादी, रूपवादी साहित्य का समय नहीं है बल्कि इनके विरुद्ध लामबंद होने का समय है। शुरुआत में शैलेन्द्र सागर ने कथाक्रम के बारे में बताया। सम्मान समारोह का संचालन रजनी गुप्त ने किया।
खुश हूं, लखनऊ के साहित्यकारों को पसंद आया ः कथाक्रम से सम्मानित रचनाकार तेजिन्दर ने सम्मान ग्रहण करने के बाद पत्र-प्रतिनिधियों से बातचीत में कहा कि मैं देश में जगह-जगह घूम-घूमकर लिखता रहा हूं। मुझे खुशी है कि लखनऊ के साहित्यकारों को मेरा लेखन पसंद आया है। यह पूछे जाने पर कि क्या आज पुरस्कारों में राजनीति घुस गई है, तेजिन्दर ने कहा कि मुझे कारपोरेट या सरकारी पुरस्कारों के बारे में बहुत जानकारी नहीं है। तेजिन्दर इन दिनों नक्सलवाद पर आधारित उपन्यास लिख रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि नक्सलवाद के प्रति उनका क्या नजरिया है उन्होंने कहाकि साहित्यकार के रूप में मेरा काम सिर्फ स्थितियों को सामने रखना है।

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