कुलपति ने मांगा विभागाध्यक्षों से कामकाज का हिसाब

Lucknow Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के ब्यूरोक्रेट कुलपति जी. पटनायक ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली परखनी शुरू कर दी है। उन्होंने प्रशासनिक दायित्व संभाल रहे शिक्षकों से उनके कार्य क्षेत्र एवं सभी विभागाध्यक्षों से कामकाज का ब्योरा तलब किया है। माना जा रहा है कि उपलब्ध विवरण के आधार पर जहां विश्वविद्यालय के नीति निर्धारण की प्रक्रिया तय होगी, वहीं आगामी प्रशासनिक परिवर्तनों का भी आधार बन सकते हैं। कुलपति ने शनिवार को विभागाध्यक्षों को भेजे पत्र में कहा है कि विभाग के वरिष्ठ अध्यापकों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को यह बताना चाहूंगा कि विश्वविद्यालय की प्रगति का उत्तरदायित्व हम सब पर है। मेरा विश्वास है कि इस उत्तरदायित्व को निभाने में हम सब समर्पित भाव से काम करेंगे। कुलपति ने इसी कड़ी में विभागाध्यक्षों से यह भी कहा है कि विभाग की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध संसाधन, समस्याएं एवं भविष्य के कार्यक्रमों के बारे में संक्षिप्त विवरण मंगलवार तक उन्हें उपलब्ध करा दें। इसके उपरांत वह विभागाध्यक्षों से उन मुद्दों पर व्यक्तिगत रूप से विचार-विमर्श करेंगे। माना जा रहा है कि कुलपति की यह कवायद विश्वविद्यालय की वर्तमान प्रगति एवं समस्याओं को समझने के लिए है। कई विभागों से पिछले दिनों स्टाफ से लेकर फंड तक कई स्तरों पर समस्याएं गिनाई जाती रही हैं। इसलिए कुलपति ने कार्यकाल की शुरुआत में ही इनका सबका विवरण विभागों से मंगाना शुरू कर दिया है, जिससे आगे की प्राथमिकता तय करने में आसानी हो। लविवि में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे शिक्षकों से भी उनसे जुड़े कार्यालयों के बारे में जानकारी मांगी गई है। इसमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण, चीफ प्रोवोस्ट, निर्माण कार्य अधीक्षक, प्रॉक्टर, प्लानिंग एवं डवलपमेंट सेल, एकेडमिक स्टाफ कॉलेज, एथलेटिक एसोसिएशन, आईपीपीआर आदि शामिल हैं।
दो शिक्षकों ने छोड़े प्रशासनिक दायित्व ः नए कुलपति के आगमन के साथ ही दो शिक्षकों ने परंपरा का निर्वहन करते हुए पूर्व कुलपति द्वारा दिए गए प्रशासनिक पद से इस्तीफा दे दिया है। समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्र ने जहां आईपीआर के निदेशक के पद से इस्तीफा दिया है, वहीं प्रो. मनोज दीक्षित ने गेस्ट हाउस प्रभारी की जिम्मेदारी छोड़ दी है। प्रो. राजेश मिश्र का कहना है कि कुलपति के कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह सामान्य परंपरा है कि उनके द्वारा मिले प्रशासनिक पद छोड़ दिए जाते हैं, जिससे नए कुलपति अपनी इच्छानुसार नई टीम गठित कर सकें।

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