केंद्रीय विद्यालय का छात्र लापता

Lucknow Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। केंद्रीय विद्यालय की आरडीएसओ शाखा में कक्षा छह का एक छात्र शुक्रवार दोपहर रहस्यमय हालात में लापता हो गया। घर से पैसे लाकर दोस्तों पर खर्च करने को लेकर टीचर ने उसे डांटा था। तालकटोरा पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज करके छात्र की तलाश शुरू कर दी है। एसओ तालकटोरा विनोद यादव ने बताया कि चौक के मोहल्ला चौपटिया की सिरके वाली गली निवासी संतोष कुमार स्वर्णकार का बेटा वशिष्ठ स्वर्णकार (11) केंद्रीय विद्यालय की आरडीएसओ शाखा में कक्षा छह का छात्र है। शुक्रवार सुबह परिजन ने उसे तालकटोरा क्षेत्र में बालाजी मंदिर के पास स्कूल के टैम्पो में बैठाया। वशिष्ठ को दोपहर 1:40 बजे स्कूल में छुट्टी के बाद बालाजी मंदिर के पास स्कूल के टैम्पो से उतर कर नक्खास जाने वाले टैम्पो से घर पहुंचना था। काफी देर तक उसके घर न पहुंचने पर संतोष, उनके पिता शिवदयाल वर्मा व परिवार के अन्य लोगों ने तलाश शुरू की। कुछ पता न चलने पर वे स्कूल पहुंचे। प्रिंसिपल रवि चंद्रा व टीचर धर्मवीर दीक्षित ने बताया कि वशिष्ठ घर से काफी पैसे लेकर आया था और उसने दोस्तों को खिलाने में जमकर खर्च किया। इसकी जानकारी पर टीचर ने उसे डांटा था और परिवार वालों से शिकायत की चेतावनी दी थी। वहीं स्कूल के टैम्पो चालक इंद्रपाल ने जानकारी दी कि अन्य बच्चों के साथ वशिष्ठ को भी बालाजी मंदिर तक ले गया था। इसके बाद वह टैम्पो से उतर कर चला गया। इस पर संतोष ने तालकटोरा थाने में सूचना दी। पुलिस ने गुमशुदगी/अपहरण का मामला दर्ज करके तफ्तीश एसआई बालकृष्ण मिश्र को सौंपी।
पुलिस ने प्रिंसिपल, टीचर व दोस्तों के लिए बयान ः विवेचना अधिकारी ने शनिवार को स्कूल जाकर प्रिंसिपल, टीचर व वशिष्ठ के दोस्तों के बयान दर्ज किए। पता लगाने की कोशिश की कि वशिष्ठ शुक्रवार को कितने रुपये लेकर स्कूल गया था और खर्च करने के बाद उसके पास कितने रुपये बचे होंगे। संतोष व उनकी पत्नी ममता ने पुलिस को बताया कि वह वशिष्ठ को रोजाना दस रुपये जेब खर्च देते हैं। इससे वह बालाजी मंदिर से नक्खास तक टैम्पो का भाड़ा देता है। पुलिस को शक है कि वशिष्ठ घर से रुपये चुराकर ले गया था। दोस्तों पर खर्च करने को लेकर डांट पड़ने से उसे लगा कि चोरी का भांडा फूट जाएगा। इस कारण वह कहीं चला गया।
गलत हाथों में न पड़ गया हो ः संतोष कुमार व उनकी पत्नी ममता को डर है कि उनका बेटा कहीं गलत हाथों में तो नहीं पड़ गया। संतोष ने बताया कि वह जयपुर में नगों का काम करते थे। वहां केंद्रीय विद्यालय में वशिष्ठ का दाखिला न हो पाने पर चौपटिया स्थित पैतृक आवास आ गए। एक साल की पढ़ाई पूरी होने पर वशिष्ठ का जयपुर के केंद्रीय विद्यालय में स्थानांतरण कराने का इरादा था। संतोष ने किसी रंजिश से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने आशंका जताई कि वशिष्ठ को रुपये खर्च करते देख किसी अपराधी ने अगवा न कर लिया हो। फिलहाल फिरौती या धमकी संबंधी कोई फोन नहीं आया है।

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