तो बंद हो जाएगा तीसरा जल कल!

Lucknow Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। जल निगम की कंगाली के चलते कठौता में तीसरे जलकल के संचालन पर खतरा मंडराने लगा है। जल निगम ने स्पष्ट कहा है कि या तो जल संस्थान कच्चे पानी का मूल्य दे या संचालन की जिम्मेदारी संभाले। निगम का कहना है कि इस वाटर वर्क्स से सप्लाई होने वाले पानी का कर जल संस्थान वसूल रहा है। जबकि जल निगम को कुछ नहीं मिल रहा है। ऐसे में धन की कमी के चलते निगम बहुत जल्द ही कठौता वाटर वर्क्स का संचालन बंद कर सकता है। इस आशय की चिट्ठी जल निगम के एमडी की ओर से शासन को लिखी गई है। ऐसा होने पर इंदिरा नगर और गोमती नगर में रहने वालों को पानी संकट से जूझना होगा। सेंटेज का करीब 600 करोड़ रुपये न मिलने से जल निगम की माली हालत खस्ता है। कर्मचारियों के वेतन को लाले पड़ रहे हैं। उस पर तीसरे जलकल का संचालन निगम के लिए महंगाई में आटा गीला करने वाला हो गया है।
नाकाफी साबित हुआ तीसरा जलकल ः इंदिरा नगर और गोमती नगर क्षेत्र की करीब पांच लाख लोगों की आबादी को पानी के संकट से निजात दिलाने के लिए बनाए गए कठौता वाटर वर्क्स की सच्चाई सामने आ गई है। इस वाटर वर्क्स के क्षमता से काम करने के लिए जरूरी है कि जल निगम को सिंचाई विभाग का सहयोग मिले। जबकि दोनों महकमों के बीच कोई सामंजस्य नहीं है। यही वजह है कि समय-समय पर शारदा नहर से कठौता झील को मिलने वाला पानी रोक दिया जाता है। ऐसे में जलकल काम करना बंद कर देता है और इंदिरा नगर और गोमती नगर में पानी का संकट शुरू हो जाता है। जल निगम का दावा था कि इस वाटर वर्क्स के बनने के बाद जुड़े इलाके के लोगों को तीसरी मंजिल तक बिना मोटर पानी मिलेगा। लेकिन दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। जेएनएनयूआरएम के तहत वर्ष 2008 में चिनहट में कठौता वाटर वर्क्स का निर्माण शुरू करवाया गया था। इस वाटर वर्क्स में एक छोटा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया गया है। पूरा सिस्टम तैयार करने के लिए कुल एस्टीमेट 173 करोड़ रुपये का था। अकेले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 23 करोड़ रुपये का बजट था। 80 एकड़ जमीन पर जलाशय का निर्माण करवाया गया था।
यह थी योजना ः गोमती नगर के विकल्प खंड, विराट खंड, विभव खंड, विरामखंड, विपुल खंड और विभूति खंड में छोटे जलाशय बना कर पानी की सप्लाई की जा रही है। इस संयंत्र शुरू होने के बाद गोमती नगर और इंदिरा नगर में 105 नलकूप बनाने थे। जिनका काम जारी है। कुल 80 एमएलडी (8 करोड़ लीटर प्रति दिन) क्षमता वाले इस जलकल ने पूरी क्षमता के साथ 13 मई काम करना शुरू कर दिया था। शारदा नहर का पानी कठौता झील को मिलना था।
जो दिक्कतें आईं ः सिंचाई का समय शुरू होते ही सिंचाई विभाग ने शारदा नहर से पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इस वजह से दिक्कत होती है। ऐसे में यहां से जुड़े क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति गड़बड़ा जाती है। बारिश के समय कठौता झील लबालब होने पर ही स्थिति सामान्य रहती है, जबकि बाकी समय शारदा नहर के पानी पर निर्भरता होती है। इसमें सिंचाई विभाग की मर्जी चलती है।
हैंडओवर की उम्मीद नहीं ः कठौता वाटर वर्क्स का नगर निगम/जल संस्थान को हैंडओवर फिलहाल नहीं होगा। इसको लेने से पूर्व नगर आयुक्त एनपी सिंह इनकार कर चुके हैं और वर्तमान आयुक्त ने भी इनकार कर दिया है। शारदा नगर से पानी की सप्लाई में होने वाली दिक्कतों और तकनीकी गड़बड़ियों को देखते हुए नगर निगम ने फिलहाल इस जलकल का हैंडओवर लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं।

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