बलरामपुर में डॉक्टर व दलाल गठजोड़ की खुली पोल

Lucknow Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग के मंत्री और महानिदेशक की फटकार के बाद भी बलरामपुर अस्पताल में बाहर से जांच कराने व दवाएं लिखने का खेल बदस्तूर जारी है। दलालों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे अस्पताल में भर्ती मरीजों को निजी पैथोलॉजी की गाड़ी से बाहर जांच कराने ले जा रहे हैं। गुरुवार को भी निजी पैथोलॉजी की गाड़ी अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीज को अपने यहां जांच कराने के लिए ले जा रही थी। गार्डों ने ड्राइवर को गाड़ी समेत पकड़कर सीएमएस को सुपुर्द कर दिया, लेकिन सीएमएस ने बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने मरीज, निजी पैथोलॉजी और उसकी गाड़ी के ड्राइवर के बारे में कुछ बताने से मना कर दिया। बलरामपुर अस्पताल के वार्ड नंबर 5 में भर्ती मरीज का सीटी स्कैन कराने के लिए गुरुवार को बाहर की एक निजी पैथोलॉजी की गाड़ी आई। मरीज को गाड़ी में लिटा कर जांच के लिए ले जाया जा रहा था। पैथोलॉजी गेट के पास अस्पताल के गार्डों ने गाड़ी रोकने को कहा तो ड्राइवर उनसे बहस करने लगा। मामला बढ़ता देख ड्राइवर ने गाड़ी भगाकर ले जानी चाही। गार्डों ने शोर मचाते हुए पीछा किया और मेन गेट को बंद करवा दिया। इस पर ड्राइवर अस्पतालपरिसर में गाड़ी दौड़ाने लगा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग जमा हो गए। खुद को चारों ओर से घिरा देख ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी। गार्डों ने गाड़ी अस्पताल परिसर में खड़ी करवा कर चाभी कब्जे में ले ली और ड्राइवर को पकड़कर सीएमएस के पास ले गए तथा गाड़ी की चाभी उन्हें सौंप दी। इस दौरान जानकारी मिलने पर पैथोलॉजी के लोग अस्पताल पहुंचे और बंद कमरे में वार्ता के बाद ड्राइवर समेत गाड़ी लेकर चले गए।
कार्रवाई की बजाय मामला दबाने में लगे रहे अधिकारी ः निजी पैथोलॉजी की गाड़ी अस्पताल परिसर में पकड़े जाने का खुलासा होने के बाद अस्पताल के अधिकारी मामले को दबाने में लग गए। वार्डों में मरीज कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थे। इस घटना से यह बात साफ हो गई कि बाहर से जांच कराने व दवा दिलाने वाले रैकेट से अस्पताल के अधिकारी भी मिले हुए हैं।
टूटेगा कर्मचारियों का मनोबल ः जिला चिकित्सालय में निजी पैथोलॉजी की गाड़ी पकड़े जाने के बाद सीएमएस ने बिना किसी कार्रवाई के मामला रफा-दफा क्यों किया, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। अस्पताल के अधिकारी के ऐसे रुख से कर्मचारियों का मनोबल टूटता है।
मंत्री ने निदेशक को लगाई थी फटकार ः इस अस्पताल में पिछले माह राउंड पर डॉक्टरों के साथ निजी पैथोलॉजी का दलाल होने का पर्दाफाश हुआ था। इसे गंभीरता से लेते हुए महकमे ने अस्पताल के अधिकारियों को तलब किया। डॉक्टरों की इस लापरवाही का खामियाजा निदेशक डॉ. टीपी सिंह को भुगतना पड़ा, जब वे मंत्री के सामने पेश हुए। मंत्री की फटकार के बाद डॉ. सिंह ने इस पर लगाम लगाने के प्रयास भी शुरू किए, लेकिन दलालों की अस्पताल में पैठ कम नहीं हुई।
दलालों को संरक्षण देने वालों के हौसले बुलंद ः पिछले दिनों अस्पताल में निजी पैथोलॉजी के दलालों के रैकेट का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने हिदायत देने के साथ डीजी व निदेशक प्रशासन को दौरे पर भेजा। निदेशक प्रशासन को बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायतें मिलीं, लेकिन उन्होंने कार्रवाई के बजाय हिदायत देकर छोड़ दिया। इससे अस्पताल में दलालों को संरक्षण देने वालों के हौसले बुलंद हैं।

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