मीटर से देना होगा पानी का बिल

Lucknow Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। अगले महीने से शहरवासियों को पानी सोच-समझ कर खर्च करना होगा। राजधानी में दिसंबर से वाटर मीटर लगने लगेंगे। इसके साथ ही नगर निगम पानी का रेट निर्धारित कर देगा और लोगों को मीटर के आधार पर प्रति माह बिल का भुगतान करना पड़ेगा। पूरी योजना को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत लागू किया जाएगा। तकनीकी परीक्षण के बाद दो कंपनियों को इस काम के लिए उपयुक्त मानते हुए उनसे वित्तीय प्रस्ताव मांगे गए हैं। बेहतर प्रस्ताव के आधार पर मीटर लगाने का काम दिया जाएगा। राजधानी में करीब ढाई लाख मीटर लगाए जाने हैं। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था के लागू होने से पानी का दुरुपयोग रुकेगा और आपूर्ति बेहतर हो सकेगी।
गौरतलब है कि इस संबंध में जल निगम ने अगस्त में टेंडर निकाले थे। छह अगस्त को टेक्निकल बिड खोली गई और तकनीकी आधार पर दो कंपनियों को इस काम के लिए उपयुक्त माना गया। अब इन कंपनियों में वित्तीय प्रस्ताव की लड़ाई बाकी है। बेहतर प्रस्ताव देने वाली कंपनी को काम दिया जाएगा। इस संबंध में नवंबर माह में ही फैसला होने की उम्मीद है।
चार एजेंसियां मिलकर करेंगी काम ः मीटर लगाने का काम चार एजेंसियां मिल कर करेंगी। सबसे बड़ा काम जल निगम के पास मीटर लगवाने का होगा। इसके बाद जल संस्थान मेंटेनेंस और बिलिंग का काम देखेगा। जबकि सबसे महत्वपूर्ण पानी के रेट तय करने का काम नगर निगम का सदन और अधिकारी मिल कर तय करेंगे। चौथी एजेंसी निजी कंपनी होगी, जो इस पूरे काम का करवाएगी। इस संबंध में जल निगम के प्रोजेक्ट के अनुसार अगले दो वर्ष में राजधानी में 24 घंटे जलापूर्ति होगी। इसके लिए मीटर के आधार पर बिलिंग आवश्यक है। जल निगम ने इस व्यवस्था का पूरा प्रारूप अपनी साइट पर डाल दिया है। इस पर मिलने वाली सलाह के आधार पर कुछ बदलाव कर तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है कि जेएनएनयूआरएम के तहत राजधानी की पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है। कठौता में तीसरा वाटर वर्क्स लगाया गया। बालागंज जलकल की क्षमता को दोगुना किया गया। दर्जनों नए ओवरहेड टैंक और सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई है। पानी की आपूर्ति अधिक होने पर बर्बादी न हो और उस पर आने वाला खर्च मैनेज करने के लिए मीटर लगाए जा रहे हैं। इसमें मीटर की खरीद और बिल वसूली निजी कंपनी करेगी। पांच वर्ष तक मीटर का मेंटीनेंस भी कंपनी के हाथ में होगा। इसके लिए कंपनी को तय धनराशि दी जाएगी। जबकि बिल की रकम सरकार के खाते में जाएगी।

2013 तक लगेंगे मीटर ः वर्ष 2013 तक राजधानी को 24 घंटे पानी की सप्लाई देने की योजना है। इसलिए जल निगम, जल संस्थान, नगर निगम और निजी कंपनी मिलकर काम करेंगे। इससे पानी की बर्बादी न केवल रुकेगी बल्कि आने वाले खर्च के सापेक्ष आय भी होगी। कोशिश यही की जाएगी कि, लोगों पर बिल का कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।

दिल्ली की तर्ज पर हो सकते हैं शुल्क
खपत की श्रेणी रेट (महीना) सर्विस चार्ज
0 से 10 किलो लीटर 2.20 रुपये 55 रुपये
11 से 20 किलो लीटर 3.30 रुपये 110 रुपये
21 से 30 किलो लीटर 16.50 रुपये 165 रुपये
30 किलो लीटर से अधिक 27.50 रुपये 220 रुपये

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