पुलिस की वसूली से परेशान पान व्यवसायी ने दम तोड़ा

Lucknow Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। पुलिस की वसूली से परेशान होकर आत्मदाह करने वाले पान व्यवसायी ने बुधवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उसे गत छह अक्टूबर को सिविल अस्पताल की बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया था। व्यवसायी की मौत के बाद घर वाले भड़क गए। पत्नी ने मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। वहीं पुलिस का कहना है कि साले के रुपये हड़प लेने से बिहारी परेशान था। झारखंड के धनबाद का मूल निवासी बिहारी मोदी (40) पत्नी सरिता, बेटे अंकित व बेटी लक्ष्मी के साथ गुडंबा के कन्हैयानगर में मोहन मोदी के मकान में किराए पर रहकर इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे के पास फुटपाथ पर गुमटी में पान-सिगरेट बेचता था। उसने गत छह अक्टूबर की सुबह आठ बजे पेट्रोल पंप से 50 रुपये का पेट्रोल खरीदा और शरीर पर छिड़क कर आग लगा ली थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने गंभीर हालत में उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था। बिहारी की पत्नी सरिता व आसपास के पटरी दुकानदारों ने आरोप लगाया था कि पुलिस की वसूली से तंग आकर बिहारी ने यह कदम उठाया है। उन्होंने रामराम बैंक चौकी के दरोगा महेश प्रसाद द्वारा पटरी दुकानदारों से रोजाना वसूली की शिकायत की थी। उनका कहना था कि कुछ दिनों पहले सौंदर्यीकरण के चलते अन्य दुकानों के साथ बिहारी ने भी पान की गुमटी सड़क के दूसरी तरफ रख ली थी। उधर खास बिक्री न होने के कारण वह पुलिस को नजराना नहीं दे पा रहा था। इस पर दरोगा ने उसे दुकान न खोलने की हिदायत दी थी। मामला गरमाने पर एसएसपी ने दारोगा को चौकी से हटा दिया था। हालांकि एसएसपी का कहना था कि बिहारी के आत्मदाह करने के पीछे उसका साला ही जिम्मेदार है। पुलिस ने तर्क दिया था कि साले ने उधारी के तौर पर बिहारी से लिए डेढ़ लाख रुपये हड़प लिए थे जिससे वह परेशान था। बार-बार मांगने पर भी वह पैसा नहीं लौटा रहा था।

पत्नी ने पुलिस को ठहराया मौत का जिम्मेदार : बुधवार को सिविल अस्पताल में बिहारी की मौत के बाद एक बार मामला गरमा गया। बिहारी की पत्नी सरिता ने पति की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया। उसका कहना था कि वसूली न मिलने पर पुलिस दुकान खोलने नहीं दे रही रही थी जिससे वह बहुत परेशान थे। छोटे बेटे अंकित को बुखार आ रहा था। उसकी दवा तक के लिए घर में पैसे नहीं थे। बेटी लक्ष्मी व बेटे अंकित की स्कूल फीस भी जमा करनी थी। बाद में पुलिस ने सरिता को समझा-बुझाकर शांत किया और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सरिता ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलकर शिकायत करने की भी बात कही है।

चंदे के पैसे से आया कफन : बिहारी की पत्नी सरिता के पास कफन तक के पैसे नहीं थे। सिविल अस्पताल में वह बदहवास सी इधर-उधर भाग रही थी। बिलखती हुई सरिता बार-बार कह रही थी कि अब उसकी और दो मासूम बच्चों की परवरिश कैसे हो पाएगी। झारखंड के रहने वाले कुछ लोगों ने सरिता को ढांढस बंधाया। झारखंड के अनिल, हरिश्चंद्र समेत कई लोगों ने 500-500 रुपये चंदा देकर कफन, गाड़ी व लकड़ी मंगाई और बैकुंठ धाम पर बिहारी का दाह संस्कार कराया।

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