जाने क्यूं आज तेरे नाम पे रोना आया...

Lucknow Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया... जाने क्यूं आज तेरे नाम पे रोना आया...।’ गजलों की मल्लिका बेगम अख्तर को उनकी पुण्यतिथि पर मंगलवार को शहरवासियों ने उनकी इसी गजल को गुनगुनाते हुए याद किया।
शहर में हुए कई कार्यक्रमों में उनकी ठुमरी, दादरा और गजलों की प्रस्तुतियां हुईं तो कई जगह लोगों ने उनके संस्मरण भी सुनाए। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में हुए वार्षिक कार्यक्रम ‘यादें’ में गायिका मालिनी अवस्थी ने बेगम की गायीं प्रसिद्ध गजलों के साथ ही ठुमरी और दादरा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। बेगम की लोकप्रिय गजल ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’ के साथ ही उन्होंने ‘कुछ तो दुनिया के इनायात ने दिल तोड़ दिया’ भी सुनाया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘काहे मारे बोल’, ‘बलमुआ परदेसी’, ‘हमरी अटरिया पे आ जा’ जैसी उपशास्त्रीय रचनाएं भी सुनाईं। तबले पर रत्नेश मिश्र, हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र, सारंगी पर मुराद अली और गिटार पर राकेश आर्य ने उनकी संगत की।
गाड़गे प्रेक्षागृह में आयोजित इसी संध्या में वाराणसी के गणेश प्रसाद मिश्र ने भी गायन प्रस्तुत किया। गणेश विख्यात ठुमरी गायक पं. महादेव प्रसाद मिश्र के बेटे हैं। राग जोग की रचना ‘स्वरन के होत ज्ञान’ से कार्यक्रम का आरंभ करते हुए उन्होंने मिश्र खमाज में बंदिश की ठुमरी ‘हटो जाओ रे न बोलो कान्हा’ और बोल बनाव की ठुमरी ‘बांसुरिया अब न बजाओ रे श्याम’ के बाद दादरा ‘डगर बीच कैसे चलूं मगर रोके कन्हैया वे पीर’ सुनाया। तबले पर रविनाथ मिश्र, वायलिन पर सुखदेव मिश्र, साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव ने संगत की।
बेगम को स्टूडियो में सिगरेट पीने की थी छूट
आकाशवाणी के लखनऊ केंद्र में बेगम अख्तर ने अपनी बहुत सारी गजलों की पहली रिकॉर्डिंग करवायी थी। उनकी यादों का गवाह वह स्टूडियो नंबर एक आज सभाकक्ष में तब्दील हो गया है। मंगलवार को इसी सभाकक्ष में बेगम अख्तर स्मृति संगीत सभा का आयोजन आकाशवाणी की ओर से किया गया। बेगम की बहुत सारी संगीत रचनाओं के लिए संगीत संयोजन करने वाले आकाशवाणी के पूर्व संगीत संयोजक 88 वर्षीय विनोद चटर्जी ने उनकी खूबियों का जिक्र किया तो उस दौर में ट्रांसमिशन इंचार्ज रहे आकाशवाणी के पूर्व सहायक केंद्र निदेशक केके श्रीवास्तव ने आत्मीय रिश्तों का खुलासा किया। श्रीवास्तव के अनुसार बेगम अख्तर को स्टूडियो में सिगरेट पीने की छूट थी। बेगम के इंतकाल के बाद संगीतकार मदन मोहन का आकाशवाणी लखनऊ आना और उनकी याद में फूट-फूटकर रोना भी इन्हीं संस्मरणों का हिस्सा था। संगीत संध्या में चटर्जी ने खुमार बाराबंकवी की गजल ‘क्या हुआ हुस्न है हमसफर या नहीं, इश्क मंजिल ही मंजिल है रास्ता नहीं’ और ‘नजर से ढल के उभरते हैं दिल के अफसाने, ये और बात है दुनिया नजर न पहचाने’ सुनाई। भातखण्डे सम विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ. सीमा भारद्वाज ने भी बेगम की गायी गजल ‘कोई यह कह दे गुलशन गुलशन, लाख बलाएं, एक नशेमन’ और ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है, आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।’ सुनाई। संगीत संध्या को फैजाबाद के डॉ. हरि प्रसाद दुबे ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में आकाशवाणी लखनऊ के अपर महानिदेशक गुलाबचंद, सहायक निदेशक पृथ्वीराज चौहान, कार्यक्रम अधिशासी प्रतुल जोशी, डॉ. महेन्द्र पाठक, प्रफुल्ल त्रिपाठी, रश्मि चौधरी, अर्चना प्रसाद, शर्मिला गोस्वामी के अलावा कई संगीतप्रेमी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन आसिफा फाखरी ने किया।

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