थकी प्रतिभा से लिख रहे ज्यादातर लेखक : राजेन्द्र यादव

Lucknow Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। प्रसिद्ध साहित्यकार और हंस पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव का कहना है कि आज ज्यादातर लेखक थकी हुई प्रतिभा से लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि लेखकों को दिन भर नौकरियां करनी पड़ती हैं और रात में उन्हें लिखने का वक्त मिल पाता है, जब वे थके होते हैं। राजेंद्र यादव रविवार को श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान समारोह में विचार व्यक्त कर रहे थे।
राजेंद्र यादव ने साहित्य के पुरस्कारों की राशि बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि हालांकि पुरस्कारों की धनराशि से गुणवत्ता का मूल्यांकन नहीं हो सकता लेकिन यह सच्चाई है कि रूपंकर कलाओं या कहें कि शरीर स्तर, शरीर कौशल से जुड़ी हुई कलाओं में बड़ी धनराशि पुरस्कारों में मिलती है। क्रिकेट, कुश्ती, अभिनय में करोड़ों रुपये मिलते हैं। लेकिन बौद्धिक कला को समाज बहुत महत्व नहीं देता। साहित्य के पुरस्कारों में हम 10-15 लाख की ही बात कर सकते हैं। सम्मान की निर्णायक समिति के अध्यक्ष रहे राजेंद्र यादव ने कहा कि पांच ऐसे लेखक हुए हैं जिन्होंने बहुत कम लिखा है लेकिन महत्वपूर्ण लिखा है। ऐसे लेखकों में चंद्रधर शर्मा गुलेरी, भुवनेश्वर, ज्ञानरंजन, शिवमूर्ति के साथ शेखर जोशी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग के लेखकों के पास अब कहानियां नहीं रहीं इसलिए कहानियां अब नए-नए क्षेत्रों से आ रही हैं।
राजेन्द्र यादव के बयान से रंगकर्मियों में उबाल
अभिनय को शरीर स्तर से जुड़ी कला बताकर प्रसिद्ध साहित्यकार राजेन्द्र यादव ने रंगकर्मियों को नाराज कर दिया है। सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, जुगुल किशोर, मृदुला भारद्वाज सहित नगर के कई प्रमुख रंगकर्मियों ने उनसे मिल कर इस पर आपत्ति जतायी है और पूछा कि क्या वे यह मानते हैं कि रंगकर्म में विचार शामिल नहीं हैं या इसमें बौद्धिकता नहीं होती है।
बीएनए के पूर्व निदेशकों सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ एवं जुगल किशोर तथा रंगकर्मी मृदुला भारद्वाज ने राजेंद्र यादव से आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि अभिनय या दूसरी कलाओं को शरीर स्तर का कहना अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि क्या ऐसा कहकर वे यह बताना चाहते हैं कि साहित्य प्रथम दर्जे की कला है और दूसरी कलाएं दोयम दर्जे की हैं? कुलश्रेष्ठ ने कहा कि ऐसा मानने वाले कुछ दंभी साहित्यकारों ने ही साहित्य को जनता से दूर कर दिया है। सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ के अनुसार, संस्कृतिकर्मियों की आपत्ति पर राजेंद्र यादव ने अपनी गलती मान ली और उनसे कहा कि वे अपनी बात वापस लेते हैं। इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नाटककार राजेश कुमार ने कहा कि शास्त्रीय परिभाषा के अनुसार कलाकारों को शूद्र कहा गया है। एक ओर तो राजेंद्र जी ने अपने संबोधन में अगले वर्ष किसी दलित या स्त्री को सम्मान देने की हिमायत की वहीं दूसरी ओर उन्होंने रंगकर्मियों के प्रति निरादर का भाव दिखाया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि नामवर सिंह हो या राजेन्द्र यादव, उम्र के साथ उन पर विस्मृति हावी होती जा रही है।

Spotlight

Most Read

Lucknow

ब्राइटलैंड स्कूल में छात्र को चाकू मारने वाली छात्रा को मिली जमानत

ब्राइटलैंड स्कूल में कक्षा एक के छात्र रितिक शर्मा को चाकू से गोदने की आरोपी छात्रा को जेजे बोर्ड ने 31 जनवरी तक के लिए शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी।

19 जनवरी 2018

Related Videos

ट्रक लूटकर भाग रहे थे बदमाश, पुलिस ने दबोचा

औरेया में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने ट्रक लूट कर भाग रहे तीन शातिर बदमाशों को मुठभेड़ के बाद धर दबोचा। पुलिस ने बदमाशों के पास से तमंचा, कारतूस और चाकू बरामद की है।

19 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper