शेखर जोशी को मिला श्रीलाल शुक्ल सम्मान

Lucknow Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार शेखर जोशी पिछले वर्ष दिवंगत हुए साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में शुरू हुए श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान से दो दिनों में दो बार सम्मानित हुए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यक्रम में फेरबदल के कारण ऐसा हुआ। मुख्य समारोह रविवार को आयोजित था जिसमें मुख्य अतिथि सहकारिता एवं लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने उन्हें समानित किया लेकिन इस दिन कहीं और व्यस्त रहने के चलते समारोह में न आ सकने के कारण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समारोह की पूर्व संध्या में शनिवार को ही उन्हें यह सम्मान प्रदान कर दिया। समारोहों में सम्मान राशि 5.51 लाख रुपये से बढ़ाकर दोगुनी कर 11 लाख रुपये करने और इंदिरा नगर में श्रीलाल शुक्ल के आवास के निकट लोकनिर्माण विभाग की सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा की गयी।
सम्मान समारोह की पूर्व संध्या पर शनिवार को गोमती नगर के होटल में रात्रि भोज का आयोजन था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इसी रात्रि भोज में शरीक हुए। इससे पहले यहां सम्मान समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने शेखर जोशी को स्मृति चिह्न और शाल भेंटकर सम्मान प्रदान किया। इस मौके पर हंस के संपादक राजेंद्र यादव सहित कई प्रसिद्ध साहित्यकार मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य हम जैसे राजनीतिज्ञों का मार्गदर्शन करता है। साहित्य की समाज में अत्यंत कारगर भूमिका है। बहुत बार ऐसा होता है कि राजनीति का ध्यान जिन समस्याओं और स्थितियों की ओर नहीं जा पाता, उन उपेक्षित बिंदुओं पर साहित्य ध्यान आकर्षित करता है। समारोह की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य की सकारात्मक भूमिका को और साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित करने का कदम स्वागत योग्य है।
रविवार को श्रीलाल शुक्ल की पहली पुण्यतिथि पर गाड्गे प्रेक्षागृह में आयोजित मुख्य समारोह में लोकनिर्माण एवं सहकारिता मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने स्मृति चिह्न, शाल, सम्मान पत्र, समान राशि भेंट कर शेखर जोशी को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों से देश का, समाज का गौरव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों का समान करना कर्तव्य है। इस मौके पर महापौर दिनेश शर्मा ने कहा कि जिस देश ने अपनी भाषा को भुलाया, उस देश ने तरक्की नहीं की। समारोह में आलोचक शिवकुमार मिश्र ने सम्मान पत्र का वाचन किया। आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि हालांकि श्रीलाल जी मानते थे कि तंत्र की जैसी विकृतियां सामने आ रही हैं उसमें राग दरबारी पीछे छूट गया है लेकिन सच्चाई यह है कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है राग दरबारी अधिक प्रासंगिक होकर हमारे सामने आ रहा है।

मेरे लेखन के मूल में विस्थापन: शेखर जोशी
सम्मानित हुए वरिष्ठ कथाकार, उपन्यासकार शेखर जोशी ने कहा कि मेरे लेखन के मूल में विस्थापन रहा है, यह विस्थापन भौगोलिक रूप से भी था और वर्णगत रूप में भी। उन्होंने कहा कि लेकिन विस्थापन से यह लाभ भी होता है कि व्यक्ति तटस्थ दृष्टि से उस जगह को देखता है। पहाड़ों में पैदा होने के बावजूद मुझे 10-11 वर्ष की उम्र में राजस्थान जाना पड़ा। पहाड़ों में जिन लोगों को उपेक्षित और अछूत माना जाता था, नौकरी में उन्होंने ही गुरु के रूप में मुझे काम करना सिखाया। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का श्रेय दिया जा सकता है कि हिन्दी कहानी में पहली बार आत्मीय रूप से मैंने मजदूरों, कारीगरों के बारे में लिखा। शेखर जोशी ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल का व्यक्तित्व बहुत विशाल था। उनमें बहुत सारी खूबियां समाहित थीं। संगीत, संस्कृत साहित्य की उन्हें गहरी जानकारी थी।
खूब हुई अमर उजाला की चर्चा
शनिवार को आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की उपस्थिति में अमर उजाला की खूब चर्चा हुई। अमर उजाला ने शनिवार को मुख्यमंत्री द्वारा राग दरबारी पढ़ने की खबर चित्र सहित प्रकाशित की थी। समारोह में इसकी चर्चा की गयी जिसका मुख्यमंत्री ने मुस्कुराकर जवाब दिया। मुख्यमंत्री साहित्यकारों से व्यक्तिगत तौर पर भी मिले।

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