डेंगू से बचाएगा ‘फॉर्मूला ऑफ ट्रिपल 20’

Lucknow Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। शुरुआती दौर में अगर डेंगू का इलाज न भी मिले तो कोई नुकसान नहीं। डेंगू का दूसरा या तीसरा अटैक सीरियस हो सकता है। चौथे अटैक में लापरवाही बरतने से जान तक जा सकती है। इस स्थिति में प्लेटलेट्स काफी कम हो जाती हैं, जो गंभीर स्थिति होती है। इस लिहाज से ‘फॉर्मूला ऑफ ट्रिपल 20’ से जान बचाई जा सकती है।
ये बातें चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष दुबे ने दी। उन्होंने कहा कि ‘फॉर्मूला ऑफ ट्रिपल 20’ पर ध्यान दिया जाए तो डेंगू या मलेरिया के इंफेक्शन को टाला जा सकता है। उनके अुनसार इस बीमारी में तीन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अगर पल्स रेट में 20 प्वाइंट की बढ़ोतरी हो, ब्लड प्रेशर 20 प्वाइंट नीचे या ऊपर जा रहा हो और बांह पर 20 से ज्यादा लाल चकत्ते पड़ें तो यह स्थिति अलर्ट की होती है। इन स्थितियों में तुरंत मेडिकल अटेंशन की जरूरत है। अगर इस ट्रिपल 20 पर ध्यान दिया जाए तो डेंगू से बचा जा सकता है। डॉ. दुबे के मुताबिक पूरी जिंदगी में डेंगू चार बार अटैक करता है। लगातार दूसरे साल का अटैक ज्यादा सीरियस होता है जबकि तीसरा और चौथा अटैक खतरनाक होता है।

बुखार जाने के बाद भी जारी रखें इलाज : फिजीशियन डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि डेंगू के लक्षण सात-आठ दिनों तक नजर आते हैं। तेज बुखार के साथ सिरदर्द और आंखों में दर्द होता है। बुखार होने पर अपने मन से कोई भी दवा खाने से एंटी प्लेटलेट्स इफेक्ट हो सकता है और प्लेटलेट्स की संख्या गिरने लगती है। बुखार जाने के दो दिन बाद भी इलाज जारी रखना चाहिए। डेंगू में ब्लड कैपीलरीज से ब्लीडिंग होने लगती है। नलिकाओं के बाहर रक्त इकट्ठा होने से इंट्रावस्कुलर डिहाइड्रेशन की स्थिति आती है। ऐसे में चीनी-नमक का घोल मरीजों के लिए जीवनदायक हो सकता है।

बॉक्स : साहब के गार्ड को पांच बोतल प्लेटलेट्स, बाहरी को मुश्किल : साहब के गार्ड हैं तो पांच बोतल प्लेटलेट्स मिल गईं। बाहरी को ये मिलना बहुत मुश्किल है। इसका उदाहरण जिला अस्पताल बलरामपुर में गुरुवार को देखने को मिला। दरअसल, बलरामपुर अस्पताल में प्लेटलेट्स काउंट मशीन खराब हो गई थी। किसी तरह पिछले दिनों मशीन को सही कराया गया। उसके बाद भी अस्पताल की ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स मिलना मुश्किल है। बृहस्पतिवार दोपहर बाद अस्पताल की ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स के बारे में पूछा गया तो वहां तैनात दो कर्मचारियों ने प्लेटलेट्स नहीं होने की बात कही। वहां बैठे अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड मुंशीलाल ने बताया कि साहब के सिक्योरिटी गार्ड हैं तो पांच बोतल लेकर जा रहे हैं। बाहरी को प्लेटलेट्स मिलना काफी मुश्किल है। सिविल अस्पताल में भी प्लेटलेट्स की समस्या होती है।

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