अब नए निजाम ही कराएंगे दीक्षांत समारोह

Lucknow Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह नए निजाम के आने के बाद ही होगा। अब तक विवि प्रशासन चांसलर की डेट का इंतजार करने की बात कह रहा था, लेकिन अब चांसलर ने ही कुलपति के दीक्षांत समारोह कराने की विधिक अधिकारिता पर सवाल उठा दिए हैं। विश्वविद्यालय द्वारा मांगी गई दीक्षांत समारोह की तिथि के जवाब में उन्होंने पूछा है कि जब कुलपति बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) की मीटिंग नहीं बुला सकते हैं तो दीक्षांत समारोह कैसे करा सकते हैं। विवि ने उन्हें दोबारा पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है, लेकिन विवि की सफाई खुद उसके मातहतों के गले नहीं उतर रही है। बीबीएयू प्रशासन इसी माह में विवि का चौथा दीक्षांत समारोह आयोजित करने की तैयारियां कर रहा था। इसके लिए जिम्मेदारों ने चांसलर एनएल लखनपाल को पत्र लिखकर 29, 30 या 31 अक्टूबर में से किसी तिथि के लिए अनुमति मांगी थी। विवि प्रशासन ने दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों से पंजीकरण भी करा लिए थे। साथ ही दीक्षांत की वेशभूषा आदि के लिए भी सर्कुलर जारी कर दिया था। छात्रों के तारीख आदि पूछने पर प्रशासन के अधिकारी चांसलर के जवाब का इंतजार करने की बात कहते थे। वहीं, चांसलर का जवाब आते ही विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। चांसलर ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र का हवाला भी दिया, जिसमें कुलपति को कार्यवाहक कुलपति मानते हुए बॉम की मीटिंग की अध्यक्षता करने के औचित्य पर सवाल खड़ा किया था। मंत्रालय ने कार्यवाहक कुलपति की अधिकारिता के संदर्भ में दो बार पत्र भेजकर बीबीएयू को स्थिति स्पष्ट की थी। वहीं, विवि एक्ट के सेक्शन 12.2 के सब सेक्शन 17 में दी गई व्यवस्था के अनुसार बॉम को ही फैलोशिप, स्कॉलरशिप, स्टूडेंटशिप, मेडल और पुरस्कार का निर्धारण करने की शक्ति दी गई है। वहीं, बॉम की ही बैठक में मुख्य अतिथि का चयन भी होगा। ऐसी दशा में यदि कुलपति बॉम की बैठक नहीं बुला सकते तो दीक्षांत समारोह करा पाना कठिन ही होगा। हालांकि विवि प्रशासन ने 15 अक्टूबर को चांसलर एनएल लखनपाल को दोबारा पत्र भेजा है। इसमें एकेडमिक काउंसिल से अनुमोदन कराकर दीक्षांत समारोह कराने की बात कही गई है। विवि के पत्र पर वहां के कई शिक्षकों को भी ऐतराज है। उनके मुताबिक जब बॉम ही विवि की सर्वोच्च विधायी निकाय है तो बिना उसके अनुमोदन के दीक्षांत समारोह कराना वैधानिक नहीं होगा।

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