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अब भी अनसुलझे छात्रसंघ चुनाव पर उठे सवाल

Lucknow Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट ने ब्रेक लगा रखा है। उम्र विवाद एवं लिंगदोह समिति की सिफारिशों को पूरा न करने को आधार बनाकर एक छात्र नेता ने याचिका दायर की थी। फिलहाल मुकदमे की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी, लेकिन जो सवाल उठे थे उनके जवाब अब तक विश्वविद्यालय ढूंढ नहीं पाया है। अब तक विश्वविद्यालयों के वर्गीकरण की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। ऐसे में अधूरा जवाब छात्रसंघ चुनाव का इंतजार और बढ़ा सकता है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय के 15 अक्टूबर को प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव के खिलाफ छात्र नेता हेमंत सिंह की याचिका पर 3 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। हेमंत सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा नामांकन की तिथि से प्रत्याशी की उम्र जोड़ने के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि लविवि में अकादमिक सत्र की शुरुआत 16 जुलाई से होती है। शासन द्वारा छात्रसंघ चुनाव का जो शासनादेश जारी किया गया था उसमें सत्र प्रारंभ होने के छह से आठ सप्ताह में चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था। इसका विश्वविद्यालय ने उल्लंघन करते हुए चुनाव की अधिसूचना 25 सितंबर को जारी की और मतदान की तिथि 15 अक्टूबर निर्धारित की। विश्वविद्यालय यदि अकादमिक सत्र शुरू होने के छह सप्ताह में चुनाव कराता तो प्रार्थी चुनाव लड़ने के लिए योग्य था। इसके अलावा लिंगदोह समिति की संस्तुतियों के आधार पर राज्य सरकार ने लखनऊ विश्वविद्यालय का वर्गीकरण भी नहीं किया है। हाईकोर्ट के निर्णय को आधार बनाते हुए कॉलेजों ने भी चुनाव से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

छात्रसंघ चुनाव पर अगली सुनवाई बुधवार को होनी है, लेकिन हाईकोर्ट ने जिन सवालों को आधार बनाकर चुनाव पर रोक लगाई थी अभी भी वह अनसुलझे ही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल अकादमिक सत्र की अपनी व्याख्या के ही बचाव के मूड में है। वहीं, आयु की अर्हता को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के आधार पर तय किया गया है। कुछ विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में नामांकन तिथि से आयु जोड़कर चुनाव कराए भी गए हैं। इसलिए इस बिन्दु पर भी लविवि अपना पक्ष तैयार कर रहा है, लेकिन अब तक विश्वविद्यालयों के वर्गीकरण की तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकी है। विश्वविद्यालय ने इस संदर्भ में शासन को पत्र लिखा था लेकिन अब तक उस पर कोई जवाब नहीं आया है।

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