आज सिमट जाएगा किताबों का संसार

Lucknow Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। मोतीमहल लॉन में दस दिनों से चल रहा किताबों का संसार रविवार को सिमट जाएगा। राष्ट्रीय पुस्तक मेला के अंतिम दिन कुल बिक्री तीन करोड़ रुपए तक होने की उम्मीद जताई जा रही है। शनिवार को मेले में काफी भीड़ रही। मेला आयोजक देवराज अरोड़ा और मनोज सिंह चन्देल ने बताया कि लोगों ने मेला बढ़ाने का अनुरोध किया है पर ये संभव नहीं है। विक्रेताओं, प्रकाशकों ने आगे के कार्यक्रमों के लिए अपने आरक्षण करा रखे हैं। आयोजकों का दावा है कि अंतिम दिन मेला में कुल हुई बिक्री का आंकड़ा तीन करोड़ रुपए के पार तक पहुंच जाएगा। मेला में हुई बिक्री से आयोजक और प्रकाशक-वितरक उत्साहित हैं। समापन समारोह रविवार शाम पांच बजे से होगा। समारोह के मुख्य अतिथि महापौर दिनेश शर्मा होंगे।
दिए गए सम्मान, पुस्तकों का लोकार्पण ः पुस्तक मेला में शनिवार को सम्मान समारोह एवं पुस्तकों के लोकार्पण के कई कार्यक्रम हुए। कवयित्री सुशीला पुरी को रेवान्त मुक्तिबोध साहित्य सम्मान दिया गया। वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना, पत्रकार-कथाकार प्रदीप सौरभ, कवि-पत्रकार सुधीर सक्सेना, हिन्दी संस्थान के निदेशक सुधाकर अदीब की उपस्थिति में सुशीला पुरी को 11 हजार रुपए की सम्मान राशि, स्मृति चिह्न, शॉल देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर विजय बनर्जी ने सुशीला पुरी की कविताओं का पाठ किया। स्वागत अनीता श्रीवास्तव और संचालन वीरेन्द्र सारंग ने किया। एक अन्य समारोह में लेखिका शोभा श्रीवास्तव को लोपामुद्रा सम्मान दिया गया। सुधाकर अदीब, सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक विद्याबिन्दु सिंह ने शोभा श्रीवास्तव को सम्मानित किया। पुस्तक मेला में शनिवार को रविशंकर पाण्डेय की पुस्तक ‘पर्यावरण चिंतन’ का लोकार्पण डॉ. डीबी आवला ने किया। विनयदास एवं सुधा शुक्ल के कथा संग्रह ‘सही गलत के बीच’ एवं ‘छाया मत छूना मन’ तथा साहू बीपी जायसवाल के उपन्यास ‘नैन्सी’ एवं युवा लेखिका मोहिनी सिंह के अंग्रेजी उपन्यास ‘इन दि डार्केस्ट ऑवर’ का भी लोकार्पण हुआ। नरेश सक्सेना की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में विनय वाजपेयी, मनीष एवं अन्य कवियों ने रचनाएं पढ़ीं।

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