ट्रेनों के जरिये पूरे देश में पहुंचाई जा रही है जाली करेंसी

Lucknow Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। जीआरपी फैजाबाद द्वारा हाल ही में पकड़े गए तस्कर जैकम व अशरफ के खुलासों से साफ है कि ट्रेनें तस्करों के लिए आसान जरिया बन गई हैं। इस खुलासे से यह भी साफ हुआ है कि राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। पांच साल पहले लखनऊ स्टेशन पर फरक्का एक्सप्रेस से जाली नोट, कई किलो सोना व चांदी पकड़ा गया था। जीआरपी इसके बाद निष्क्रिय हो गई जबकि तस्कर धड़ल्ले से अपना काम करते रहे। जीआरपी फैजाबाद द्वारा पकड़े गये तस्कर जैकम व अशरफ ने खुलासा किया है कि वह कई साल से इस काम में लगे थे। मालदा से उन्हें जाली नोटों का बंडल मिलता था जो उन्हें दिल्ली, हरियाणा, गुड़गांव जाकर देना होता था। इस काम के लिए प्रति चक्कर उन्हें 50 हजार रुपये मिलते थे। पहचान से बचने के लिए वे पैसा देकर कभी विकलांग कोच में सफर करते थे तो कभी महिला कोच में बैठ जाते थे। हर माह दो से तीन चक्कर लगाते थे। रेलवे सूत्रों के मुताबिक दिल्ली से बिहार व पश्चिम बंगाल जाने वाली ट्रेनों में तस्करों का रैकेट फैला हुआ है। बिहार व पूर्वांचल की ट्रेनों में चरस, अफीम व गांजे की तस्करी होती है। वहीं पश्चिम बंगाल व यूपी के पश्चिम को जाने वाली ट्रेनों में सोने व चांदी की तस्करी बदस्तूर जारी है। जबकि दिल्ली, हरियाणा से अन्य राज्यों को हवाला का पैसा भी भेजा जा रहा है। कस्टम अधिकारियों के मुताबिक ट्रेनों में आरपीएफ व जीआरपी का एस्कॉर्ट चलता है और उनकी जानकारी में कई बातें रहती हैं लेकिन हीलाहवाली के चलते तस्करों पर नकेल नहीं लगाई जा पा रही है।
पकड़े गए मामले
- 26 सितंबर 2012 को फरक्का एक्सप्रेस से 6.50 लाख के जाली नोट पकड़े
- 10 अक्तूबर 2012 को फरक्का एक्सप्रेस से 9.70 लाख के जाली नोट पकड़े
- 27 नवंबर 2011 को 150 किलो चरस सप्तक्रांति एक्सप्रेस में पकड़ी
- 20 जनवरी 2009 को 40 किलो गांजा चारबाग स्टेशन पर पकड़ा
- 11 अक्तूबर 2008 को बारह किलो चांदी मथुरा एक्सप्रेस में पकड़ी
- वर्ष 2007 में ही जीआरपी ने कई किलो सोना ट्रेन से किया था बरामद
- वर्ष 2007 में इंस्पेक्टर जीआरपी ने हवाला के पंद्रह लाख रुपये से अधिक पकड़े
तह तक जाने की नहीं हुई कोशिशें
जीआरपी ने हवाला व जाली नोटों को पकड़ने के बाद यह जानने की कोशिश कभी नहीं की आखिर यह कहां से आ रही है। पकड़े जाने के बाद सारे मामले ठंडे बस्ते में चले गए। यही कारण रहा कि वर्ष 2007 में हवाला का लाखों रुपये पकड़े जाने के बावजूद चंद महीनों में ही तस्करों ने फिर से कारोबार शुरू कर दिया। पकड़े गए तस्करों ने यह खुलासा किया है। वहीं एक बार फिर जीआरपी फैजाबाद में जाली नोट पकड़ने के बाद गदगद है। लेकिन इस बार भी उसकी तह तक जाकर रैकेट का भंडाफोड़ करने में रुचि नहीं दिखाई दे रही है।

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