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विश्व आर्थराइटिस दिवस आज ः सुबह शरीर अकड़े तो हो जाएं सावधान

Lucknow Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। सुबह सोकर उठने पर शरीर अकड़ा हुआ महसूस होता है। मुट्ठी बांधने में दिक्कत होती है। उंगलियों के जोड़ों में दर्द होता है। तो यह रुमेटायड आर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं। रुमेटोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इस तरह के लक्षण होने पर तुरंत इलाज बहुत जरूरी है। रक्त में रुमेटायड फैक्टर, एक्स-रे जांच और एंटी सीपी जांच से रुमेटायड आर्थराइटिस का पता लगाया जा सकता है। केजीएमयू के रुमेटोलॉजी विभाग के डॉ. पुनीत के अनुसार अस्पतालों की ओपीडी में 70 फीसदी रोगी शरीर के अलग-अलग जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर आते हैं। इसमें घुटने के आर्थराइटिस के रोगियों के संख्या सबसे ज्यादा है। यदि रोग शुरू होने के एक वर्ष के अंदर निदान कर लिया जाते ये रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है। उन्होंने बताया कि 20 से 30 फीसदी मरीज समुचित इलाज न मिलने के कारण स्थाई रूप से विकलांग हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ये बीमारी किसी भी आयु वर्ग को हो सकती है। महिलाओं में प्रसव के बाद या फिर संक्रमण के दौरान रुमेटायड आर्थराइटिस के लक्षण दिखते हैं। रक्त की जांच और शारीरिक लक्षणों के आधार पर इस रोग की पहचान होती है। इसके बाद इलाज मरीज को दर्द से निजात दिलाई जा सकती है। डॉ. पुनीत ने बताया कि आर्थराइटिस के अलावा बीमारी ल्यूपस (एसएलई) जानलेवा है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के उलटा (ऑटो इम्यून डिजीज) काम करने के कारण होती है। जिसमें त्वचा, गुर्दे, लिवर और दिमाग पर भी असर होता है। मरीज की मौत होना इस बीमारी में कॉमन है। डॉ. पुनीत के अनुसार सी रिएक्टिव प्रोटीन, रुमेटायड फैक्टर की जांच से आर्थराइटिस होने का पता लगाया जा सकता है।
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मोटापा बढ़ा रहा आस्टियो आर्थराइटिस ः मोटापा और शारीरिक श्रम में कमी ऑस्टियो आर्थराइटिस को बढ़ावा दे रही है। बढ़ते वजन का असर घुटनों पर होता है क्योंकि यही पूरे शरीर का भार उठाते हैं। आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि ऑस्टियो आर्थराइटिस का सबसे ज्यादा असर घुटनों में होता है। बढ़ता मोटापा और शारीरिक श्रम में कमी के यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यदि घुटनों में दर्द के साथ सूजन हो तो विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलना बहुत जरूरी है, क्योंकि सूजन के कई कारण हो सकते हैं। शरीर के वजन को काबू में रखकर आर्थराइटिस से बच सकते हैं। यह तरीका आर्थराइटिस से बचाव भी करता है और उसका इलाज भी है। इसके अलावा घुटनों के जोड़ों को बदलवा (नी रिप्लेसमेंट) कर इस बीमारी और विकलांगता से हमेशा के लिए निजात पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उम्र भर विकलांग होकर जीने से अब छुटकारा मिल चुका है।

छह महीने के बच्चे और 80 साल के बूढ़े भी होते हैं शिकार ः गठिया सिर्फ हड्डी और जोड़ों की बीमारी नहीं है। ये आंख, फेफड़ों, त्वचा, गर्दे, मस्तिष्क, दांत को भी प्रभावित कर सकती है। इन बीमारियों का इलाज हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास नहीं है। इसका इलाज सिर्फ गठिया रोग विशेषज्ञों या शरीर प्रतिरक्षा विज्ञानी (क्लीनिकल इम्यूनोलॉजिस्ट) ही कर सकते हैं। यदि मरीज को सही इलाज न मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है। रुमेटायड आर्थराइटिस, गाउट, एंकायलोजिंग स्पांडिलाइटिस, सोरिआटिक आर्थराइटिस, एलएलई, इन्फ्लेमेटरी मॉयोसाइटिस, वैस्कुलाइटिस आदि गठिया के अलग-अलग प्रकार हैं। इन सभी गठिया रोगों का इलाज अलग-अलग है। रुमेटायड आर्थराइटिस में मरीज के जोड़ों में सूजन और गंभीर स्थिति में हड्डिया टेढ़ी हो जाती हैं। गाउट में पैर का अंगूठा लाल हो जाता है। ये दिक्कत यूरिक एसिड की वजह से होती है। इसके साथ ही अंगूठे के नीचे यूरिक एसिड की वजह से गांठ पड़ जाती है। जिससे सफेद बुरादा सा झड़ता रहता है। एंकायलोजिंग आर्थराइटिस अधिकतर युवाओं को अंकड़न के साथ कमर दर्द होता है। इसमें रीढ़ की हड्डी आपस में चिपक जाती है। जिसे बांस रीढ़ भी कहा जाता है। रिएक्टिव आर्थराइटिस युवाओं और बच्चों को हो सकता है। इसमें पेट, मुंह, लिंग पर छाले पड़ जाते हैं। जिससे पपड़ी झड़ती रहती है। इसके अलावा उसे पेचिश भी होती है। एसएलई में शरीर और चेहरे पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। धूप में निकलने पर जलन, मुंह के अंदर छाले, सिर दर्द, मरीज बहकी-बहकी बातें करता है। साथ ही उसके गुर्दे भी खराब हो जाते हैं। वहीं सूखी खांसी, चमड़ी पर लाल निशान, जोड़ों के दर्द के साथ हो तो ये गाउट के लक्षण हैं। वहीं मुंह के अंदर और लिंग पर छाले पड़ना बेहशेट डिजीज के लक्षण हैं। ये भी एक प्रकार की गठिया है। रुमेटायड आर्थराइटिस से कुल जनसंख्या का एक प्रतिशत प्रभावित होता है।
ध्यान रखें
हर मरीज जिसका यूरिक एसिड बढ़ा हो उसे गाउट नहीं होता।
रुमेटायड आर्थराइटिस के रोगियों को धूम्रपान और अल्कोहल नहीं लेना चाहिए।
गाउट के रोगियों को लाल मांस और अल्कोहल छोड़ देना चाहिए।
यूरिक एसिड के कारण गठिया हो तो दिन में कम से कम चार लीटर पानी पीना चाहिए।
गाउट के रोगियों को नींबू, संतरा जैसी खट्टी चीजें खानी चाहिए।

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