पीजीआई के लिए धन की कमी नहीं : मुख्यमंत्री

Lucknow Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। जिस देश-प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था ठीक होती है वह तेजी से प्रगति करता है। गरीब जनता को अच्छा इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार कटिबद्ध है। हर दिन 20 लाख रुपये गरीबों के इलाज के लिए जारी किए जा रहे हैं। इसमें से अधिकतर मरीज पीजीआई में इलाज के लिए आते हैं। प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी क्योंकि पीजीआई की मदद मरीज की मदद है। यह कहना है मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का। वे रविवार को संजय गांधी पीजीआई में आयोजित तीसरी यूपी-उत्तराखंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और पीजीआई को मिलकर गरीबों की मदद करनी है। यदि सुविधाएं अच्छी होंगी तो मरीजों की जान नहीं जाएगी क्योंकि इलाज के अभाव में मरीजों की मौत हो रही है। प्रदेश में क्रिटिकल केयर सिर्फ पीजीआई में ही है, इसलिए इसे और बढ़ाया जाएगा। विभाग में डीएम का पाठ्यक्रम शुरू हो रहा है। इससे नए विशेषज्ञ डॉक्टर प्रशिक्षित होकर निकलेंगे। सरकार भी इसमें मदद करेगी। धन की जितनी भी जरूरत होगी, पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली बार आया था तो दो विभागों को शुरू करने की बात हुई थी लेकिन अभी तक वे योजनाएं फाइलों में ही कैद हैं। योजनाओं को फाइलों से बाहर निकालिए। संस्थान की जो भी जरूरत होगी, उसे पूरा किया जाएगा।
पीजीआई का फैकल्टी और स्टाफ अच्छा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीजीआई के चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करते हैं। ये अच्छी बात है। फैकल्टी और स्टाफ अच्छा है। इसलिए प्राइवेट चिकित्सा संस्थान आपको खींचने की कोशिश करते रहते हैं। वहीं कुछ लोग प्राइवेट सेक्टर में जाना भी चाहते हैं। हमारी जिम्मेदारी सुविधाएं देना है वो हम करेंगे। जो चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं, उनका संस्थान खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि निदेशक प्रो. आरके शर्मा को दो साल और कार्य करने का मौका दिया गया है। हमारे पास समय और पैसा भी है। संसाधन लाएं और मानव संसाधन तैयार करें जिससे जनता को सुविधाएं मिल सकें।
अच्छा डॉक्टर वही जो अच्छा इंसान हो
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि अच्छा डॉक्टर वही है जो अच्छा इंसान हो, लेकिन डॉक्टरों के चेहरे पर हंसी नहीं दिखती है। गरीब के दर्द से जुड़े तभी खुद को संतोष मिलेगा। कुछ डॉक्टरों को मरीज के इलाज के लिए फोन करो तो उन्हें लगता है कि हम उनकी जिंदगी में दखल दे रहे हैं। लेकिन सरकार गरीबों की मदद के लिए कटिबद्ध है। अस्पतालों में पहले तीन दिन की दवा मिलती थी, हमने उसे पांच दिन कर दिया। भर्ती मरीज को 35 रुपये बेड के देने पड़ते थे, उसे भी माफ कर दिया गया है। एंबुलेंस का किराया पांच रुपये प्रति किलोमीटर था अब उसे भी खत्म कर दिया गया है। पिछली सरकार में मुख्यमंत्री आवास पर 45 डॉक्टरों की ड्यूटी थी। उन्हें जनता के लिए अस्पतालों को वापस दे दिया गया। एनआरएचएम घोटालों ने स्वास्थ्य विभाग को लोगों की नजरों में गिरा दिया है। आने वाले पांच सालों में उसकी इज्जत वापस दिलाई जाएगी। इस मौके पर प्रो. एके बरौनिया ने मुख्यमंत्री से कहा कि एसजीपीजीआई में देश का पहला सीसीएम खुला है। हम 16 घंटे कार्य कर रहे हैं। जल्दी ही डीएम की पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी। हम इलाज कर रहे हैं लेकिन हमें प्रशिक्षण में भी लगाया जाए क्योंकि हर जिले में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) बेहद जरूरी है। इस मौके पर निदेशक प्रो. आरके सिंह, डीन प्रो. आरएन मिश्र, सीएमएस प्रो. पीके सिंह, प्रो. आरके सिंह भी मौजूद थे।

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