चुनाव टलते ही हवा हुए रहनुमाई के दावे

Lucknow Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार की तसवीर पिछले चार महीनों से कुछ अलग ही थी। या यूं कह ले कि मानो पुराना दौर वापस आ गया जब छात्रसंघ चुनाव पर पाबंदी लगी थी। न समर्थकों का हुजूम, न रहनुमाई के दावें, समस्याओं से जूझने का जज्बा भी गायब। पत्रकारिता के सामने स्थित कॉफी कियोस्क के आस-पास छात्र अपनी समस्याओं का पुलिंदा लेकर रोज की तरह ही घूम रहे थे, लेकिन उनका प्रार्थनापत्र लेकर पैरवी करने के लिए सफेद कपड़े धारी छात्र नेता नहीं दिखे। यह हालात तब हैं जब छात्रसंघ चुनाव पर रोक महज अगली तारीख यानी 17 अक्टूबर तक लगी है। आम छात्रों के मन में यही सवाल कौंध रहा था कि क्या उनकी समस्याओं से छात्र नेताओं का सरोकार महज चुनावों तक ही सीमित है। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव 15 अक्टूबर को होना था, लेकिन एक छात्र नेता की याचिका पर हाईकोर्ट ने बुधवार को चुनाव पर रोक लगा दी। हालांकि यह रोक फिलहाल 17 अक्टूबर तक है, लेकिन आगे छात्रसंघ चुनाव के भविष्य का लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है। खासकर आगे के विश्वविद्यालय के हालात छात्रसंघ चुनाव के लिए मुफीद नहीं दिख रहे हैं। परिसर में शुक्रवार को छाए सन्नाटे से तो यही लग रहा है कि छात्र नेता भी मान चुके हैं कि अब चुनाव होना मुश्किल है। शायद यही वजह है कि गेट नंबर एक के बाहर न चार पहिया वाहनों की कतार दिखी और न ही सरस्वती वाटिका पर छात्र नेताओं एवं उनके समर्थकों का समूह। दो दिन पहले तक चुनाव प्रचार का मुख्य अड्डा बने पत्रकारिता विभाग के सामने स्थित कॉफी कियोस्क पर आम छात्रों के लिए बैठने की पर्याप्त जगह मौजूद थी। वहां कैंपस की आम गतिविधियों से सरोकार रखने वाले छात्र ही शुक्रवार को दिखे न कि चुनावी मौसम में एकाएक सक्रिय हुए किरदार। निष्कासन की मार झेल रहे कुछ छात्र नेता जरूर प्रशासनिक भवन के आस-पास घूमते दिखे, लेकिन अपने भविष्य की चिंता में। चुनाव पर लटकती तलवार को देख कर कुछ दिन पहले तक विभिन्न पदों के लिए दावा करने वाले प्रत्याशी परिसर में चोला बदलकर घूमते दिखे। मानो परंपरागत सफेद शर्ट या कुर्ता के ड्रेस कोड से वह तौबा कर चुके हों। विश्वविद्यालय एवं पुलिस प्रशासन भी फिलहाल राहत में दिखा। कॉफी कियोस्क के सामने न पीएसी के जवाब बैठे और न ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड को ही पिछले दिनों से चलाए जा रहे राउंड एवं चेकिंग के अपने अभियान को ही आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ी।
कॉलेजों के खिलाफ कोर्ट जाएंगे छात्र नेता ः हाईकोर्ट द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में चुनाव पर रोक लगाए जाने के बाद कॉलेजों ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। कॉलेजों ने हाईकोर्ट के अगले आदेश तक चुनाव न कराने का फैसला लिया है। इस आदेश से आक्रोशित छात्र नेताओं ने कॉलेजों के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया है। कॉलेजों के छात्र नेताओं की शुक्रवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।

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