चुनाव पर रोक से कॉलेज भी असमंजस में

Lucknow Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने के फैसले के बाद कॉलेजों में भी असमंजस का माहौल बन गया है । हालांकि ज्यादातर कॉलेज अभी चुनाव के बारे में कुछ भी स्पष्ट बोलने से बच रहे हैं। उनका तर्क है कि वह इस बारे में जिला प्रशासन या लविवि के निर्देश पर ही आगे की कार्रवाई करेंगे।
छात्रनेता हेमंत सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को लविवि में 15 अक्टूबर को कराए जाने वाले छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगा दी है। कॉलेजों में भी लविवि के साथ ही चुनाव कराए जाने हैं। लविवि चुनाव पर अदालत का फैसला वैसे तो सीधे तौर पर कॉलेजों को प्रभावित नहीं कर रहा है, लेकिन कॉलेज अदालत के आदेश के बाद बदली परिस्थितियों के परीक्षण में लगे हुए हैं। ज्यादातर कॉलेज अभी भी लविवि के साथ ही चुनाव कराने पर विचार कर रहे हैं। केकेसी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसडी शर्मा ने तो स्पष्ट ही कह दिया कि उनके यहां चुनाव विवि के साथ ही कराए जाएंगे। जब सारी प्रक्रिया ही लविवि के नियमों के आधार पर ही संपन्न कराई जा रही है तो चुनाव भी उसी के साथ ही होना चाहिए। वहीं, कालीचरण पीजी कॉलेज के के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि चुनाव कराने या न कराने के बारे में जिला प्रशासन या लविवि की ओर से कोई निर्देश प्राप्त होगा तो ही चुनाव पर विचार किया जाएगा। चुनाव पर रोक लगाने का अधिकार जिला प्रशासन का है। वैसे अभी हम अदालत के फैसले का बिना अध्ययन किए कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। हालांकि वह जोड़ते हैं कि चुनाव लविवि के साथ ही कराया जाए तो बेहतर रहेगा। डीएवी पीजी कॉलेज के चुनाव अधिकारी डॉ. आरपी चतुर्वेदी भी जिला प्रशासन के निर्देश के आधार पर ही चुनाव प्रक्रिया को संचालित किए जाने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलेज विवि का ही अंग है यदि उस पर कोई फैसला आता है तो कॉलेज भी प्रभावित होगा। कॉलेज में चुनाव विवि के ही साथ कराए जाएं तो ही बेहतर रहेगा। अभी फैसले का अध्ययन और जिला प्रशासन से मामले में बातचीत के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। विद्यांत हिंदू कॉलेज के चुनाव अधिकारी डॉ. ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कॉलेज में चुनाव आचार संहिता विवि के ही छात्रसंघ चुनाव के आधार पर लागू की गई है। इसलिए कोर्ट के फैसले से चुनाव तो प्रभावित ही होगा। कॉलेज प्रशासन फैसले के आधार पर जिला प्रशासन से बात करके ही मामले पर कुछ तय करेगा। जिला प्रशासन चाहेगा कि कॉलेज में चुनाव 15 को ही हो तो चुनाव 15 को ही कराया जाएगा। वीएसएनवी के प्राचार्य डॉ. जीसी मिश्र ने बताया कि हम शुरू से ही चाह रहे हैं कि चुनाव विवि के साथ ही कराया जाए। जिन आधारों पर चुनाव में रोक लगी है उन्हें कॉलेज ने विवि से अपनी चुनाव आचार संहिता में शामिल किया है। इसलिए कॉलेज पर प्रभाव तो पडे़गा ही। अभी हम मसले पर विचार करेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों से बात करके ही चुनाव के बारे में कोई निर्णय लेंगे।


कॉलेजों में चुनाव में यह है पेंच : दरअसल अधिकांश कॉलेजों ने विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई आचार संहिता एवं संविधान के ही बिन्दु अपने यहां भी चुनाव में लागू किए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देश पर यदि विश्वविद्यालय को मानकों में कुछ बदलाव करना पड़ा तो वही प्रक्रिया कॉलेजों में भी अपनाई जाएगी। मसलन अगर आयु की अर्हता यदि नामांकन तिथि की बजाय हाईकोर्ट के निर्देश पर एकेडमिक सेशन की शुरुआत से जोड़नी पड़ी तो कॉलेजों के भी चुनाव नियम सीधे तौर प्रभावित होंगे क्योंकि वहां अभी नामांकन तिथि से ही आयु जोड़ने की व्यवस्था लागू है। कोर्ट ने दूसरा बिन्दु आठ सप्ताह बाद चुनाव कराने का उठाया है जो कि लिंगदोह की सिफारिशों का उल्लंघन है जबकि कॉलेजों में भी चुनाव इस समय सीमा के बाद ही हो रहे हैं।

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