इंदिरा नहर में उतराता मिला आशीष का शव

Lucknow Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
गोसाईगंज (लखनऊ)। दोस्त के साथ शनिवार देर रात इंदिरा नहर में डूबे आशीष का शव सोमवार को तीन किमी दूर उतराता मिला। उसके पिता और भाई रविवार को शैलेंद्र का शव मिलने के बाद आशीष के जीवित होने की उम्मीद छोड़ चुके थे, मगर शिखा रात भर अपने पति के जीवन के लिए मन्नतें मांगती रही। सोमवार सुबह शव मिलने की खबर सुनते ही वह फूट-फूटकर रोई और बेहोश हो गई। पुलिस के मुताबिक जिला जेल के पास इंदिरा नहर में डूबे शैलेंद्र रत्नाकर (26) का रविवार दोपहर बाद शव बरामद होने पर उसके दोस्त आशीष की नहर में तलाश की जा रही थी। सूर्यास्त तक उसका कुछ पता न चलने पर तलाश अभियान सोमवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया लेकिन गोसाईंगंज थाने के कांस्टेबल रामराज व राजेश कुमार की नहर के किनारे ड्यूटी लगाई गई थी। दोनों सिपाही सोमवार सुबह बबुरिया खेड़ा रेगुलेटर से आगे बढ़े। वहां से ढाई किमी दूर नगराम थाना क्षेत्र के अचली खेड़ा रेगुलेटर के पास आशीष सिंह (24) का शव उतराता मिला। उसके तन पर कपड़े व जूते थे। दोनों युवकों को अपने घर पर दावत देने वाले उनके दोस्त बंदीरक्षक नितिन यादव ने शव को पहचान लिया। इस बीच पुलिस ने आशीष के पिता विक्रम लाल को फोन किया। वह परिवार के लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। आशीष का शव देखते ही चक्कर खाकर गिर गए। परिवार वालों ने ढांढस बंधाकर उठाया तो बोले बेटे के जीवन के लिए रात भर मन्नतें मांगती रही बहू शिखा को क्या जवाब देंगे। विक्रम लाल के बड़े बेटे आदर्श ने बताया कि शैलेंद्र का शव बरामद होने पर शिखा ने आशीष के जीवित होने की आस छोड़ दी थी। लेकिन घर वालों के ढांढस बंधाने पर उसने मन्नतें मांगनी शुरू की। रात भर देवी-देवताओं के फोटो व मूर्ति के आगे बैठी रोती रही। उसकी आंखें सूज गई थी। सुबह पुलिस का फोन आने के बाद उसका धैर्य टूट गया। बिलखकर रोई और बेहोश हो गई। मालूम हो कि आलमबाग के भीमनगर निवासी व केनरा बैंक के रिटायर मैनेजर विक्रम लाल का बेटा आशीष अपने दोस्त शैलेंद्र के साथ शनिवार रात बंदी रक्षक नितिन यादव के सरकारी आवास पर दावत खाने गया था। नितिन ने दो और दोस्तों को बुलाया था। पांचों ने साथ बैठकर जमकर शराब पी और खाना खाया। रात 12 बजे आशीष और शैलेंद्र बाइक लेकर सिगरेट खरीदने निकले। इंदिरा नहर के किनारे होटल से सिगरेट खरीदी। फिर वहां से चंद कदम दूर बाइक खड़ी की और नहर की पटरी पर बैठकर सिगरेट पीने लगे। नशे में धुत होने के कारण दोनों नहर में डूब गए। रविवार दोपहर बाद गोताखोरों ने शैलेंद्र का शव ढूंढ निकाला था।
आठ महीने में उजड़ गया सुहाग ः इसी साल जनवरी में आशीष की सुजानपुर निवासी शिखा से शादी हुई थी। झांसी से होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रहे आशीष को भी अपने बड़े भाई आदर्श की तरह अच्छी नौकरी मिलने की उम्मीद थी। शिखा ने भी तमाम अरमान संजो रखे थे। कोर्स पूरा होने से पहले ही वह काल के गाल में समा गया। पति की मौत की खबर सुनते ही शिखा होशहवास खो बैठी। उसके सारे अरमान चूर-चूर हो चुके थे।

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