इंदिरा नहर में डूबे दो दोस्त, एक का शव मिला

Lucknow Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में जिगरी दोस्त बंदीरक्षक के घर दावत खाने गए दो युवक शनिवार देर रात संदिग्ध हालात में इंदिरा नहर में डूब गए। शराब के नशे में धुत दोनों युवकों को आखिरी बार नहर पटरी पर बैठकर सिगरेट पीते देखा गया था। नशा उतरने पर बंदीरक्षक व अन्य दोस्तों ने रविवार सुबह उनकी तलाश शुरू की। नहर पटरी किनारे उनकी बाइक लावारिस खड़ी थी। उसमें चाभी लगी देखकर दोस्तों को डूबने का शक हुआ। पुलिस ने गोताखोरों से नहर खंगलवाई तो एक युवक शैलेंद्र का शव बरामद हुआ। वह इलाहाबाद में एसबीआई में क्लर्क था, जबकि दूसरा युवक आशीष झांसी से होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहा था। उसकी तलाश जारी है। डूबने की खबर से दोनों घरों में मातम छा गया।
पुलिस के मुताबिक, आलमबाग के मोहल्ला भीमनगर निवासी आशीष सिंह (24) थोड़ी दूर स्थित फतेह अली तालाब के पास रेलवे कॉलोनी निवासी अपने दोस्त शैलेंद्र रत्नाकर (26) के साथ शनिवार रात 9 बजे बाइक से बंदीरक्षक नितिन यादव के सरकारी आवास पर दावत खाने गया था। नितिन ने आशीष व शैलेंद्र के साथ अपने पुराने दोस्त रविप्रताप व अनुज सिंह को भी बुलाया था। गोसाईंगंज थाना क्षेत्र स्थित आवास पर दावत में पांचों दोस्तों ने साथ बैठकर शराब पी और खाना खाया। आधी रात तक जाम लड़े। नशा चढ़ने पर आशीष व शैलेंद्र ने पान-सिगरेट की इच्छा जताई और बाइक लेकर निकल पड़े। नशे में धुत रवि, अनुज व नितिन ने उनसे अपने लिए भी पान-सिगेरट लाने को कहा। आशीष व शैलेंद्र इंदिरा नहर पटरी के किनारे होटल पर पहुंचे। वहां से सिगरेट खरीदी। थोड़ी दूर जाकर बाइक खड़ी की और नहर पटरी पर बैठकर सिगरेट के कश लेते हुए आपस में बातें करने लगे।
नशा उतरा तो दोस्तों ने शुरू की तलाश
दोनों के लौटने का इंतजार कर रहे नितिन, रवि व अनुज ने एकाध पैग और लगाए। इसके बाद सो गए। उनका कहना है कि रविवार सुबह नशा उतरने पर आशीष व शैलेंद्र की तलाश शुरू की। होटल संचालक से पता चला कि उसकी दुकान से सिगरेट खरीदने के बाद दोनों युवक नहर पटरी पर बैठकर बात कर रहे थे। वहां लावारिस खड़ी बाइक में चाभी लगी देखकर नितिन को अनहोनी का शक हुआ। उसने आशीष के पिता विक्रमलाल को फोन किया और आशीष व शैलेंद्र के लापता होने की जानकारी दी। इसके साथ पुलिस को भी सूचना दी। एसओ गोसाईंगंज व जेल चौकी इंचार्ज मौके पर पहुंचे। माजरा समझने के बाद गौरिया खुर्द से गोताखोर रामप्रकाश व कुंदन को बुलाया गया। दोनों गोताखोर आठ साथियों को लेकर मौके पर पहुंचे और लापता युवकों की तलाश में नहर खंगालनी शुरू की। करीब तीन घंटे में बबुरिया खेड़ा रगुलेटर तक नहर खंगालते पहुंचे गोताखोरों ने शैलेंद्र का शव ढूंढ निकाला। आशीष की काफी दूर तक तलाश की, लेकिन सूर्यास्त होने तक उसका कुछ पता नहीं चला। अंधेरा होने पर तलाश अभियान रोकने के साथ विभिन्न स्थानों पर जाल लगवाया गया है।
शैलेंद्र की शादी की तैयारी में जुटा था परिवार
शैलेंद्र के डूबने की सूचना पर किशनलाल अपनी पत्नी सरोज व परिवार के अन्य लोगों के साथ रोते-बिलखते इंदिरा नहर के किनारे पहुंचे। रेलवे के सीएनडब्लू विभाग में कार्यरत किशन ने बताया कि शैलेंद्र को ढाई साल पहले एसबीआई में क्लर्क की नौकरी मिली थी। कुछ दिनों पहले उसका रिश्ता तय किया था। नवरात्र में मंगनी व फरवरी में शादी होनी थी। बड़ा बेटा होने की पूरी जिम्मेदारी वह निभा रहा था। छोटा बेटा देवेंद्र रत्नाकर व बेटी दीपिका बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं।
जनवरी में ही हुई थी आशीष की शादी
शैलेंद्र के परिजनों के साथ आशीष के पिता विक्रम लाल अपने परिवार के साथ जेल के पास स्थित इंदिरा नहर के किनारे पहुंच गए। दोनों परिवार विलाप कर रहे थे। इलाहाबाद में केनरा बैंक के मैनेजर पद से रिटायर विक्रम लाल ने बताया कि उनका बड़ा बेटा आदर्श दिल्ली में पांच सितारा होटल में मैनेजर है। उससे छोटा आशीष होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रहा था। उससे छोटी बेटी अंजली सिंह एयर होस्टेस और सबसे छोटा बेटा आकाश इंटरमीडिएट का छात्र है। इसी साल जनवरी में सुजानपुरा निवासी शिखा से आशीष की शादी हुई थी। नहर किनारे बैठी पति की सलामती की दुआ मांग रही शिखा को दोपहर बाद शैलेंद्र का शव बरामद होने की खबर मिली तो वह गश खाकर गिर गई। उसे लगा कि उसका पति भी अब दुनिया में नहीं है। परिवार वालों ने दिलासा दिया और कहा कि संभव है कि आशीष सुरक्षित हो।
पछता रहा था गमजदा बंदीरक्षक
शैलेंद्र और आशीष के परिवार के लोग नहर पटरी पर खड़े दिन भर विलाप करते रहे। वहीं बंदीरक्षक नितिन यादव आंसू बहाने के साथ पुराने दोस्तों को दावत देने पर पछता रहा था। उसने कहा कि इलाहाबाद में एसबीआई में कार्यरत शैलेंद्र और रविप्रताप तथा झांसी में होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रहा आशीष बहुत दिनों बाद एकत्र हुए थे। दोस्ती की यादें ताजा करने के इरादे से दावत दी थी। नशा चढ़ने के कारण वह शैलेंद्र और आशीष को आधी रात को सिगरेट लेने जाने से रोक नहीं सका। नशे के चलते दोनों दोस्त नहर में डूब गए।

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