रजिस्ट्री में खेल की खुलेगी पोल

Lucknow Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। मकान को प्लॉट बताकर भू संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों के खेल की पोल खुलेगी। गलत बयानी से स्टांप व रजिस्ट्री शुल्क बचाने की कोशिश खरीदारों के लिए महंगा सौदा साबित हो सकती है। भारी जुर्माना के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा। ऐसे मामलों को उजागर करने के लिए राजधानी में निबंधन विभाग के अधिकारियों की टीम रजिस्ट्री के बाद एक निश्चित समय में भू संपत्तियों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। निबंधन अधिकारियों ने यह निर्णय रजिस्ट्री के वक्त क्रेता-विक्रेता द्वारा भू संपत्तियों का मूल्यांकन कम दर्शाकर शुल्क चोरी कुछ मामले पकड़े जाने के बाद लिया है। निबंधन कार्यालय सूत्रों के मुताबिक विगत माह गोमतीनगर इलाके की एक रजिस्ट्री की जांच में पाया गया कि जिसे प्लॉट बताकर लिखापढ़ी कराई गई उसके आधे हिस्से में मकान बना था। चूंकि क्रेता-विक्रेता ने केवल प्लॉट के सौदे का घोषणा पत्र दिया, इसलिए स्टांप व रजिस्ट्री शुल्क की गणना उसकी कीमत के आधार पर की गई। इससे हजारों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। खुलासा होने पर विभाग ने शेष शुल्क के साथ जुर्माना भी वसूला। ऐसी शिकायतों के चलते राजधानी के सहायक महानिरीक्षक-रजिस्ट्री (एआईजी) ने जनपद के सभी सब रजिस्ट्रार को हर महीने से दस से पंद्रह प्रतिशत मामलों में स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। सब रजिस्ट्रार को उन क्षेत्रों की संपत्तियों का विशेष रूप से स्थलीय निरीक्षण करने को कहा गया है, जहां बाजार भाव ज्यादा होने के साथ खाली प्लॉट कम बचे हैं। कार्यालय सूत्रों के मुताबिक महंगी कॉलोनियों की संपत्ति की रजिस्ट्री के वक्त भवन को प्लॉट बताकर लिखापढ़ी कराने का खेल ज्यादा होता है। सूत्रों के अनुसार पूरा खेल विभागीय मिलीभगत से होता है। बड़े प्लॉट व भवनों की रजिस्ट्री स्थलीय निरीक्षण के बाद करने का नियम पहले से है। लेकिन बिचौलियों के माध्यम से होने वाले रजिस्ट्री के खेल में विभागीय मिलीभगत के चलते ऐसे मामलों को स्थलीय निरीक्षण की कार्रवाई से बाहर कर दिया जाता है या फिर निरीक्षण कागजों पर ही होता है। चूंकि रजिस्ट्री के समय क्रेता-विक्रेता की घोषणा व आवश्यक प्रपत्रों के आधार पर सब रजिस्ट्रार कार्रवाई करता है। ऐसे में अगर क्रेता-विक्रेता ने भवन को प्लॉट बताकर रजिस्ट्री कराई है तो उसकी असलियत स्थलीय निरीक्षण से ही पता की जा सकती है। राजधानी में रजिस्ट्री कराने वालों की भीड़ के चलते भी सब रजिस्ट्रार भू संपत्तियों के स्थलीय निरीक्षण नहीं कर पाते हैं। लेकिन अब उन्हें हर महीने स्थलीय निरीक्षण के लिए क्षेत्र में निकलना होगा। एआईजी ओपी सिंह के मुताबिक जनपद के सभी सब रजिस्ट्रार को निर्देश दिए गए हैं कि वह हर महीने दस से पंद्रह प्रतिशत भू संपत्तियों का स्थलीय निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट देंगे। अगर किसी भू स्वामी द्वारा शुल्क कम अदा किए जाने का मामला पकड़ा जाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। शुल्क चोरी के मामले में जुर्माना के साथ विभागीय कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

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