आयुष अपहरण व हत्याकांड ः बर्थ-डे पार्टी की चकाचौंध देख डोली नीयत

Lucknow Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
सात बरस के आयुष की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है...अपहरण के बाद सैकड़ों बार ये सवाल परिजनों के मन में उठा। ...पर जवाब न मिला। सैकड़ों बार वे दृश्य कौंध जाते कि वह जन्मदिन पर कितना खुश था। उसकी खुशी से सब फूले नहीं समां रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि इस खुशी को कोई कातिल निगाहों से देख रहा है। उसकी नजरों में उनकी प्रॉपर्टी इस कदर धंस जाएगी कि वह उस मासूम हंसी का गला ही घोंट देगा। परिवार का पवन के ऊपर शक करना आखिर सही निकला। परिजन अब हाथ मल रहे हैं कि काश पुलिस समय पर चेत जाती। मोहल्ला सूर्यनगर निवासी कामता प्रसाद शर्मा रुंधे गले से बताते हैं कि वह पिछले साल 31 दिसंबर को आरडीएसओ से रिटायर हुए। कहते हैं,16 साल पहले इकलौती बेटी संगीता की शादी कासगंज (एटा) के मूल निवासी रत्नेश पांडेय से की थी। शादी के कुछ दिनों बाद बेटी-दामाद को अपने साथ रख लिया। रत्नेश के पिता मिथलेश पांडेय का ऐशबाग में शीशी-बोतल का व्यवसाय है और वह परिवार समेत टिकैत राय तालाब के पास रहते हैं। संगीता के कोई संतान न होने से पूरा परिवार चिंतित था। काफी इलाज कराया। अनेक स्थानों पर जाकर मन्नतें मांगी। आखिरकार शादी के नौ साल बाद आयुष पैदा हुआ। आयुष सभी का लाडला था। नाना उसकी हर ख्वाहिश पूरी करते थे।
जन्मदिन की दावत देख आया लालच ः कामता प्रसाद के अनुसार जब वो नौकरी कर रहे थे तो परिवार के साथ आरडीएसओ कॉलोनी में रहते थे। उनके आवास की ऊपरी मंजिल पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपेंद्रनाथ परिवार समेत रहता था। पवन उर्फ विक्की उसका बेटा है। आयुष उसे भइया कहता था। पवन को पता था कि कामता प्रसाद अपने इकलौते नाती से बेहद प्यार करते हैं और सेवानिवृत्ति पर उन्हें फंड का तमाम रुपया मिला है। दो साल पहले सूर्यनगर में मकान बनवाया था। 11 सितंबर को आयुष का सातवां जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर रामचरितमानस पाठ व दावत हुई। इसमें पूर्व पड़ोसी उपेंद्र व उसके परिवार को भी आमंत्रित किया गया था। पवन उर्फ विक्की ने जन्मदिन की दावत में कामता प्रसाद को दिल खोलकर खर्च करते देखा तो उसे लालच आ गया। अगले दिन उसने अपने दोस्त रवींद्र व मुकेश से चर्चा की। आवारागर्दी करने वाले तीनों युवकों ने आयुष को अगवा करके दस लाख की फिरौती वसूलने की योजना बना डाली।
हत्या का इरादा बनाकर किया था अगवा ः पुलिस का कहना है कि पवन व मुकेश को आयुष पहचानता था। दोनों ने पहचान खुलने के डर से हत्या का इरादा बनाकर ही अपहरण किया था। अपहरण करके मिर्जापुर के रास्ते जाते समय तय किया कि फिरौती वसूलने के बाद वे बच्चे को ठिकाने लगा देंगे। लेकिन मुकेश की बहन ने अपहृत बच्चे को घर में पनाह देने से मना कर दिया तो तीनों ने उसकी आवाज रिकॉर्ड करके हत्या कर दी। शिनाख्त छिपाने के इरादे से उसके कपड़े उतार कर नदी में और नग्न शव गांव भैसोर के पास झाड़ियों में फेंककर फरार हो गये।
...अगर पहले चेत जाती पुलिस ः इकलौते बेटे की मौत पर बिलख रही संगीता ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उसने कहा कि आयुष के लापता होने के थोड़ी देर बाद रत्नेश ने पुलिस को सूचना दे दी थी। इतना ही नहीं पवन पर शक भी जताया लेकिन पुलिस तत्काल उसकी तलाश की बजाय फिरौती के कॉल का इंतजार करती रही। पवन के मोबाइल का कॉल डिटेल एकत्र करने व अन्य बदमाशों का पता लगाने में कई दिन गुजार दिए। यदि पुलिस तत्काल कार्रवाई कर पवन के परिवार वालों पर दबाव बनाती तो बच्चे की जान बच सकती थी। नौ दिन बाद एक अपहर्ता को पकड़ कर वारदात के खुलासे का दावा कर रही है, जबकि तत्परता दिखाती तो तीनों अपहरणकर्ता व उनका सहयोगी ड्राइवर उसी दिन पकड़ा जा सकता था। परिजनों का कहना है कि अपहरणकर्ताओं ने मिर्जापुर के गांव भैसोर में आयुष की हत्या की। लखनऊ से वहां तक के सफर में कई घंटे लगे होंगे।
पुलिस ने कहा, कोई फोन न आने से लगा समय ः लापरवाही के आरोप पर पुलिस का कहना है कि 20 सितंबर को दोपहर बाद आयुष के लापता होने की सूचना मिली। अपहरण का मामला दर्ज करके तलाश शुरू की गई। संपत्ति व अन्य रंजिशों का पता लगाकर पड़ताल की जा रही थी। कोई फोन न आने से अपहरणकर्ताओं का पता लगाने में समय लगा। अपहरणकर्ताओं ने मिर्जापुर पहुंचते ही बच्चे की हत्या कर दी थी। उसकी जान बचा पाना मुश्किल था।
मासूम के कातिलों को मिले फांसी की सजा ः सीएमएस की आरडीएसओ शाखा में कक्षा दो के छात्र आयुष की हत्या की खबर से स्कूल के बच्चे डरे और टीचर दुखी हैं। सबका यही कहना है कि कैसे कोई इतने छोटे बच्चे को अपहरण करने के बाद मार सकता है। कातिलों को कोई भी सजा दी जाए कम है। आयुष के साथ रोजाना रिक्शे से स्कूल जाने वाले बच्चे बहुत दुखी हैं। कक्षा चार के छात्र गगन मिश्रा कहता है कि अंकल, हत्यारे को फांसी की सजा दिलवाना। एक बार नहीं कम से कम दस बार फांसी देना। वहीं आयुष के साथ रोज लंच शेयर करने वाली वेदिका काफी डरी सहमी हुई है। रिक्शे में साथ जाने वाले यशी मिश्रा, कृष्णा व लक्ष्य ने बताया कि आयुष का स्वभाव बहुत ही अच्छा था। हम लोग रोजाना एक साथ स्कूल से घर आते-जाते थे। इस घटना से बच्चे बहुत दुखी हैं। इन बच्चों के परिजनों का कहना है कि अब तो बच्चों को स्कूल अकेले भेजने से डर लगता है।

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