42 शिक्षकों की नियुक्ति पर गहराया संकट

Lucknow Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में 42 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला पेंचीदा होता जा रहा है। पिछले वर्ष इन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, लेकिन बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) ने इसका अनुमोदन आज तक नहीं किया है। अब दूसरे विश्वविद्यालयों से आए शिक्षकों की छुट्टी समाप्त हो रही है तो वह असमंजस की स्थिति में हैं कि पुराने विश्वविद्यालय में वापस लौटे या बीबीएयू में रुके। फिलहाल मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने साफ कर दिया है कि बीबीएयू में शिक्षक अपनी रिस्क पर ही रुकें। बाद में यदि प्रतिकूल फैसला रहा तो जिम्मेदारी उनकी होगी। एमएचआरडी की चिट्ठी ने शिक्षकों को सकते में डाल दिया है। बीबीएयू में पिछले वर्ष 42 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इन नियुक्तियाें को लेकर विवि प्रशासन पर धांधली के आरोप भी लगे थे और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। बीबीएयू प्रशासन ने बिना बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) के अनुमोदन के ही शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए थे और उनसे काम लेना शुरू कर दिया था। मामले की जांच के लिए बॉम ने एक तीन सदस्यीय कमेटी भी विश्वविद्यालय से बनाने को कहा था, लेकिन एक वर्ष से अधिक हो गए कमेटी गठित नहीं हो सकी है। हालांकि इस पर बीबीएयू प्रशासन का तर्क था कि बॉम ने ही कुलपति को नियुक्ति पत्र जारी करने का अधिकार दिया था। साथ ही कोई शिकायत विवि प्रशासन को न मिलने के चलते कमेटी गठित नहीं हुई। फिलहाल इन शिक्षकों की नियुक्ति के एक वर्ष पूरे हो चुके हैं और उनका प्रोबेशन पीरियड समाप्त हो चुका है। शिक्षकों ने बीबीएयू प्रशासन को पत्र लिखा था कि उनकी स्थायी नियुक्ति का आदेश जारी नहीं किया गया है। साथ ही जो शिक्षक दूसरे संस्थान से आए हैं उनका उनके मूल संस्थान में अवकाश का समय भी समाप्त हो रहा है ऐसी स्थिति में वह क्या करें? शिक्षकों के पत्र के संदर्भ में बीबीएयू प्रशासन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे थे, जिस पर एमएचआरडी ने बीबीएयू प्रशासन को अपना जवाब भेज दिया है। बीबीएयू के जनसंपर्क अधिकारी गोकरन प्रसाद का कहना है कि शिक्षकों के पत्र के संदर्भ में एमएचआरडी से निर्देश मांगे गए थे, जो निर्देश आया है उससे शिक्षकों को अवगत करा दिया गया है।

एमएचआरडी की दो टूक : मानव संसाधन विकास मंत्रालय की उपसचिव सीआर वत्सला हरिहरन ने रजिस्ट्रार को भेजे पत्र में कहा है कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बॉम ही सक्षम प्राधिकारी है। जब तक इन शिक्षकों की नियुक्ति को बॉम की मंजूरी नहीं मिलती है तब तक उनका प्रोबेशन पूरा होने एवं उन्हें स्थायी किए जाने का सवाल ही नहीं उठता है। एजेंडा नोट से यह पता चलता है कि कुछ शिक्षक दूसरे संस्थानों से आए हैं। ऐसे में उन्हें यह बताना उचित होगा कि उनकी नियुक्ति बॉम द्वारा अनुमोदित नहीं है और इस संदर्भ में विजिटर द्वारा विवि प्रशासन को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। ऐसे में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने में कुछ और समय लग सकता है। इसलिए उन्हें यह सलाह दी जाती है कि अपनी छुट्टी संरक्षित कराने के लिए उचित कदम उठाएं या अपने मूल संस्थान लौट जाएं। फिर तब लौटें जब उनकी नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित कर दी जाए अन्यथा बीबीएयू में उनका बना रहना उनकी अपनी रिस्क पर होगा।

बीबीएयू ने बनाई कमेटी : बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने फिलहाल एमएचआरडी के पत्र के संदर्भ में एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी पत्र के संदर्भ में अग्रिम कार्रवाई के लिए एक सप्ताह में सुझाव देगी। कमेटी के संयोजक सहायक कुलसचिव अवस्थापना होंगे। प्रो. कामेश्वर चौधरी, प्रो. एस.विक्टर बाबू एवं प्रो. अजय कुमार कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं।

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