लखनऊ के होना चाहते थे, यहीं के हो गए

Lucknow Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा के डिजाइनर आर्किटेक्ट वाल्टर बर्ले ग्रिफिन जब 59 वर्ष की उम्र में पहली बार भारत आए तो उन्हाेंने अपनी पत्नी मेरियन महनी ग्रिफिन को रहने के लिए लखनऊ को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ जगह बताई। यहां पहुंचने के कुछ ही दिनों में उन्हाेंने मेरियन को बुलावा भेजा। निमंत्रण पत्र में उन्हाेंने लिखा कि वे अपने पूर्व जन्म में कभी न कभी भारत में रहे होंगे, यह जगह उन्हें बेहद आकर्षित करती है। ऑस्ट्रेलिया में सेनेटरी ऑफ कैनबरा में इतिहास व संस्कृति सलाहकार डॉ. डेविड हेडन और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टोफर वर्नन ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि उनकी दिली इच्छा थी कि वे लखनऊ में स्थापत्य कला का छाप छोड़ें, लेकिन उनकी मृत्यु ने इस सपने को दुखद अंत दिया। अजब संयोग है कि वे लखनऊ में बसना चाहते थे और यहीं आज उनकी कब्र है। 2013 में कैनबरा का डिजाइन तैयार होने के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में ग्रिफिन का नाम पूरे ऑस्ट्रेलिया में लोकप्रिय हो रहा है। प्रो. वर्नन बताते हैं उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाई जा रही हैं। लेकिन लखनऊ में उनकी विरासत को भुलाया जा रहा है। उनकी डिजाइन की गई पायनियर बिल्डिंग पहले ही ढहाई जा चुकी है। वहीं एक अन्य मकान भी बहुत संभव है कि संरक्षित न रह सके। ग्रिफिन को भारत में करीब 40 डिजाइन बनाने का मौका मिला, लेकिन इनमें से कुछ ही इमारतें तैयार हो पाईं। लखनऊ विवि की टैगोर लाइब्रेरी का डिजाइन भी उन्हाेंने बनाया पर इसे पूरी तरह हकीकत में नहीं ढाला जा सका।

100 दिन में बनाया 100 इमारतों का डिजाइन : वर्ष 1936 में यूनाइटेड प्रोविंस इंडस्ट्रियल एंड एग्रीकल्चर एग्जीबिशन की डिजाइनिंग की जिम्मेदारी ग्रिफिन दंपति को दी गई। डॉ. डेविड बताते हैं कि दोनों ने इसके लिए बेहद मेहनत की। उनके पास इस काम के लिए कम वक्त था, लेकिन उन्हाेंने इसे पूरा किया। उन्हाेंने 100 दिन में 100 इमारतों के स्थापत्य डिजाइन तैयार किए और निर्माण शुरू करवाया। हालांकि उस वर्ष भारी मानसून की वजह से इन इमारतों को पूरा नहीं किया जा सका। फिर भी इस मेहनत ने ग्रिफिन की मेहनत को सबके सामने रख दिया।

रोनल्ड क्रेग की कब्र भी खोजी : लखनऊ आए ऑस्ट्रेलिया के इतिहासकार और आर्किटेक्ट ने ग्रिफिन की कब्र के पास ही ऑस्ट्रेलियाई नागरिक रोनल्ड क्रेग की कब्र भी खोजी है। रोनल्ड ही वे व्यक्ति थे, जिन्हाेंने ग्रिफिन को टैगोर लाइब्रेरी का स्थापत्य तैयार करने के लिए लखनऊ आमंत्रित किया था। रोनल्ड अंग्रेज अफसर थे और लखनऊ में एक भारतीय महिला से विवाह कर यहीं के हो गए।

याद किया ग्रिफिन को : वॉल्टर बर्ले ग्रिफिन की स्मृति में मंगलवार शाम टीसीएस अवध पार्क में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान एक शॉर्ट फिल्म ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’ की स्क्रीनिंग की गई, जहां बताया गया कि किस तरह उन्हाेंने ऑस्ट्रेलिया में ब्यूरोक्रेसी से लंबे समय तक लड़ाई की और कैनबरा में अपने डिजाइन के लिए उन्हें लड़ना पड़ा। समय से 100 वर्ष आगे को ध्यान में रखकर तैयार किया गया उनका डिजाइन आज भी बेहद सराहा जाता है। साथ ही उनकी भारत यात्रा और पत्नी मेरियन महनी ग्रिफिन के साथ किए कामों, ऑस्ट्रेलिया में कासल क्रेग सोसाइटी के निर्माण, पत्नी से रिश्तों और लखनऊ में किए कामों को विशेष रूप से हाईलाइट किया गया। इस मौके पर डॉ. डेविड और प्रो. वर्नन सहित टीसीएस रीजनल हैड जयंती कृष्णा, प्रोटोकॉल मिनिस्ट्रर अभिषेक मिश्रा और कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। आने वाले दिनों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर ग्रिफिन के कामों को लोकप्रिय और संरक्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।

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