रेलवे की छवि धूमिल कर रहे रेल कर्मी

Lucknow Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। चारबाग स्टेशन स्थित बुकिंग काउंटर पर यात्री ठगे जाने के साथ ही बेइज्जत भी हो रहे हैं। कोई और नहीं बल्कि रेलवे के कर्मचारी ही इस करतूत को अंजाम दे रहे हैं। यात्रियों द्वारा काउंटर पर पांच सौ का नोट देने के बावजूद कई बार सौ का बता दिया जाता है। ऐसे मामले ज्यादातर चारबाग स्टेशन सहित जनरल बुकिंग काउंटर पर ज्यादा होते हैं जहां लंबी लाइन लगती है। ठगे जाने पर भी यात्री ज्यादा कुछ कर नहीं पाता, कारण काउंटर पर बैठे कर्मचारी एकजुट होे जाते हैं। यही नहीं आसपास तैनात आरपीएफ सिपाही भी उनका साथ देते हैं। मजबूरी में पैसे गंवाने के बाद यात्री अपनी इज्जत को ध्यान में रखते हुए चुपचाप चला जाता है। जबकि कई बार यात्री सच को लेकर भिड़ गए और रेल कर्मचारी को पैसे वापस करने पड़े। चंद कर्मचारियों की इस करतूत के चलते पूरे रेलवे को शर्मसार होना पड़ रहा है।

केस - 1
शिल्पा श्रीवास्तव ने लखनऊ से बनारस तक के टिकट के लिए बुकिंग काउंटर पर बैठे बाबू को पांच सौ का नो दिया। टिकट का पैसा काटने के बाद बाबू सौ रुपये के हिसाब से बाकी रुपये लौटाने लगा। शिल्पा ने जब पांच रुपये का नोट देने की बात कही तो बाबू अभद्रता पर उतारू हो गया। सुनवाई न होती देख शिल्पा ने जीआरपी थाने में शिकायत की। इसके बाद संबंधित उपनिरीक्षक ने बाबू से पूछताछ की। खुद को फंसता देख बाबू ने पूरी रकम लौटाई।

केस दो
सर्वेश अवस्थी ने सौ रुपये का नोट देकर लखनऊ से कानपुर का टिकट लिया। बाबू भी टिकट और 27 रुपये वापस कर दिए। बाकी रुपये मांगने पर जवाब मिला कि पचास रुपये का ही नोट दिया था। इसे लेकर काउंटर पर बैठे कर्मचारी और सर्वेश में कहासुनी होने लगी। कोई फैसला होने से पहले ही लाइन में लगे लोगों ने देर होने की बात कहते हुए सर्वेश को हटा दिया। उप स्टेशन अधीक्षक से शिकायत करने पर बाकी के रुपये वापस हो सके।


बाक्स
उप स्टेशन अधीक्षक दिलवाते हैं कइयों के पैसे
लखनऊ। जब कोई जिद्दी यात्री पूरे मामले की शिकायत उप स्टेशन अधीक्षक के यहां करने आता है तो अमूमन उप स्टेशन अधीक्षक पहले संबंधित कर्मचारी से बात करके समझौते कराने का प्रयास करते हैं। अपने को फंसता देख कर्मचारी भी चपरासी के हाथ पैसा भिजवा देता है। ऐसे में यात्री भी शिकायत दर्ज कराने की जगह पैसे लेकर चला जाता है।

ड्रापिंग का खेल - अमूमन बुकिंग व जनरल की लंबी लाइन होने के दौरान नोटों में हेराफेरी की घटनाएं होती है। लंबी लाइन होने के कारण काउंटर पर बैठा बाबू पांच सौ की नोट को सौ बताकर यात्री को टिकट दे देता है, यात्री जब बाकी के पैसे मांगता है तो बाबू सौ रुपये बताकर बाकी के पैसे वापस कर देता है। यात्री जब पांच सौ की नोट बताता है तो बाबू यात्री से भिड़ जाता है। लाइन में खड़े यात्री भी अपने ही आगे यात्री को हटाने लगते हैं क्योंकि उन्हें जल्दी टिकट लेना होता है। इसका फायदा सीधे तौर पर लाइन को ठीक कराने के लिये खड़े आरपीएफ कर्मी उठाते हुए यात्री को लाइन से हटाकर इतनी फटकार देते हैं कि उसकी हिम्मत दोबारा पैसे लेने की नहीं पड़ती। कुछ यात्री इसका विरोध करते हैं और शिकायत जीआरपी व वाणिज्य अधिकारियों से करते हैं। तब कही जांच होती है और फिर महीनों बाद कार्रवाई होती है।

जीआरपी के पास जो शिकायतें आती है उन पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। कुछ दिन पहले एक महिला ने लिखित शिकायत की थी। जांच में मामला सही पाया गया, लेकिन बाबू ने महिला से माफी मांगते हुए पैसे वापस कर दिए। इस पर महिला ने भी शिकायत वापस ले ली थी।
अनिल राय, इंस्पेक्टर जीआरपी, चारबाग

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