‘जिम्मेदारी से बच नहीं सकता मीडिया’

Lucknow Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने अपने चिरपरिचित अंदाज में एक बार फिर मीडिया को जवाबदेह बनाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक होने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन मीडिया अपने सामाजिक दायित्व से बच नहीं सकता है। देश की 80 प्रतिशत जनता गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही है। मीडिया को उनके प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह करना होगा।
न्यायमूर्ति काटजू शनिवार को उत्तर प्रदेश हिंदी समाचार पत्र सम्मेलन के तत्वावधान में मीडिया में बढ़ती एकाधिकारी प्रवृत्ति विषयक संगोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे। गोमती नगर के विनीत खंड स्थित हिंदी मीडिया सेंटर में आयोजित संगोष्ठी में मीडिया की प्रवृत्तियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में हुए फैशन परेड में 512 पत्रकार कवरेज में गए थे जबकि उसी के पास विदर्भ में किसान खुदकुशी कर रहे थे जिसका पता करने एक या दो पत्रकार गए थे। किसानों की खुदकुशी की घटनाओं को पांच-छह साल तक दबाया जाता रहा लेकिन पी.साईनाथ जैसे पत्रकारों की पहल पर ऐसी घटनाएं मीडिया का हिस्सा बनने लगीं। न्यायमूर्ति ने कहा कि अगर हर पेशे के लोगों की जवाबदेही तय है, वकील या डॉक्टर द्वारा गलती करने पर उनकी मान्यता रद्द हो सकती है तो मीडिया के लिए भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं नियंत्रण का पक्षधर नहीं हूं क्योंकि इससे स्वतंत्रता समाप्त होती है लेकिन मैं नियामक चाहता हूं जिसमें स्वतंत्रता भी बनी रहे। राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि मीडिया को व्यवसाय और सामाजिक दायित्वों के बीच संतुलन कायम करना होगा। इसी प्रकार समाचार और मनोरंजन के बीच भी एक संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस समय प्रिंस बोरवेल में गिरा था उस समय सारी मीडिया उसके लाइव कवरेज में लगी थी लेकिन उसी के पास गांव में एक दलित लड़की के स्कूल जाने की जिद पर उसके साथ किए गए अपमानजनक व्यवहार को किसी चैनल ने दिखाना जरूरी नहीं समझा। समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्रता से यह पता चलता है कि उस देश में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं। संगोष्ठी में बलदेव राज गुप्त, ताहिरा हसन, प्रदीप जैन, सूर्यमणि प्रसाद ने भी विचार व्यक्त किए। आरंभ में संस्था के संरक्षक शीतला सिंह, अध्यक्ष उत्तमचंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने स्वागत किया। संचालन सुमन गुप्त ने किया।
समस्याओं पर नहीं होता फोकस ः न्यायमूर्ति काटजू ने कहा कि यह दुखद है कि करीब 47 किसान प्रतिदिन खुदकुशी करते हैं, देश में 47 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं लेकिन ऐसी खबरें मीडिया में प्रमुखता से नहीं आती हैं जबकि करीना कपूर का इश्क फरमाना, किसी फिल्म अभिनेत्री का गर्भवती होना मीडिया में छाया रहता है। राखी सावंत के आने पर मीडिया दौड़ पड़ता है। सचिन के सौवें शतक को इतनी प्रमुखता से दिखाया जाता है मानों इससे देश की समस्याएं दूर होने वाली हैं, मोहाली के टेस्ट पर इतना अधिक ध्यान दिया जाता है जैसे महाभारत की लड़ाई हो रही हो। देश में निजी अस्पताल महंगे होते जा रहे हैं और सरकारी अस्पतालों का बुरा हाल है लेकिन मीडिया असल समस्याओं को गंभीरता से नहीं उठाता है।
मैं तानाशाह नहीं ः न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि मेरे सुझावों पर मुझे तानाशाह भी कहा जाता है। मैं तानाशाह नहीं हूं। प्रेस परिषद में बड़ी संख्या चुने हुए पत्रकारों की होती है। परिषद का फैसला सबका होता है। उन्होंने कहा कि मैं यह भी चाहता हूं कि प्रेस परिषद में इलेक्ट्रानिक मीडिया को भी शामिल किया जाए और इसका नाम प्रेस काउंसिल की जगह मीडिया काउंसिल कर दिया जाए।

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