अब नहीं होगी जएनएनयूआरएम में हुए कामों की जांच

Lucknow Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। घोटालेबाजों के मन की मुराद पूरी हो गई है। जेएनएनयूआरएम में हुए निर्माण कार्यों की जांच की जो कवायद शुरू हुई थी उस पर अब विराम लग गया है। भुगतान को लेकर मचे बवाल के बाद अब जांच होने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। जल निगम ने तो पहले ही जांच पर आने वाले खर्च के लिए पैसा नहीं दिया था और अब नगर निगम के भी ताजा हालात ऐसे नहीं हैं कि वह जांच के लिए आगे कदम बढ़ाए। हालांकि नगर आयुक्त कई बार कह चुके हैं कि गुणवत्ता जांच कराई जाएगी और उसकी प्रक्रिया चल रही है। लेकिन इसमें ज्यादा दम नहीं दिखता क्याेंकि अब वह भी इस पचड़े से ऊब चुके हैं और नगर निगम से विदा लेने के इच्छुक हैं। ऐेसे में जेएनएनयूआरएम कार्यों की गुणवत्ता जांच पर छाए बादल छंटते नहीं दिख रहे हैं। भुगतान को लेकर मचे बवाल के बाद जिस तरह से नगर निगम ने अपने पांव पीछे खींचे हैं उससे जल निगम के हौसले बुलंद हो गए हैं। जल निगम शुरू से ही जांच से बचना चाहता है, यह तो नगर निगम का दबाव था जो कि उसने जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदारी लेने की हामी भरी। उससे पहले तो वह कुछ लिखकर देने को ही तैयार नहंी था। उसका कहना था कि जो काम हो रहा है वह मानक के अनुरूप है। खास बात यह भी है कि एनपी सिंह के नगर निगम में आने से पहले बिना जांच पड़ताल ही किस्त भी जारी हो जाती थी। जिससे घटिया निर्माण कराने वाले बेखौफ थे। जब गड़बड़ियों से पर्दा उठाने की कोशिश हुई तो बड़े-बड़ों की हालत पतली हो गई और जांच न हो पाए इसके सब एकजुट हो गए। उधर एक तो आईआईटी कानपुर ने नमूने लेने आने से इंकार कर दिया दूसरे आईईटी लखनऊ ने बिना पहले पैसा जमा किए नमूने लेने से मना कर दिया। वहीं जांच होने से पहले ही कि स्त जारी करने को लेकर शासन ने भी ऐसे घटिया निर्माण करने वालों को राहत दे दी।
किस्त से नहीं काटा जा सकता जांच का खर्च ः नगर निगम अपने स्तर पर जांच पर आने वाले खर्च की कटौती जल निगम को दी जाने वाली किस्त से नहीं कर सकता। जेएनएनयूआरएम योजना से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि केंद्र ने जो दिशा निर्देश तय किए हैं उसके तहत पूरी राशि कार्यदायी संस्था को दी जाएगी। उसमें किसी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। ऐसे में यदि जल निगम जांच पर आने वाला खर्च नहीं देगा तो उसकी कटौती करना आसान नहीं है। ज्ञात हो कि नगर आयुक्त ने यह कहा था कि यदि जल निगम पैसा नहीं जमा करेगा तो किस्त से कटौती कर ली जाएगी।
बिना भुगतान आईईटी नहीं करेगी जांच ः आईईटी लखनऊ ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह जांच के लिए नमूने लेने काम तभी शुरू करेगा जब उसकी फीस जमा कर दी जाएगी। बिना फीस जमा किए नमूने लेने का काम उसके द्वारा किया जाना सम्भव नहीं है। वहीं दूसरी ओर जल निगम ने न तो अब तक उन स्थानों की सूची बनाई है जहां से नमूने लिए जाने हैं और न ही जांच पर आने वाला खर्च जमा किया है। जबकि नगर निगम इसको लेकर करीब एक महीने पहले पत्र भेज चुका है।

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