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कौन करवाना चाहता है इस घटिया काम का पेमेंट?

Lucknow Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। राजधानी में जवाहरलाल नेहरू अरबन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत हुए कामों में बरती गई लापरवाही के ये चंद उदाहरण हैं। पूरा शहर घटिया निर्माण कार्यों की ऐसी तस्वीरों से पटा पड़ा है। निजाम बदला, तो नगर निगम ने जल निगम को किया जाने वाला भुगतान रोक लिया, जांच के आदेश भी हो गए। अचानक सरकार में हलचल तेज हुई, भ्रष्टाचार व घटिया निर्माण की जिंदा मछली निगलने के बाकायदा लिखित आदेश जारी हो गए। कल तक जांच के लिए भुगतान रोकने वाला नगर निगम प्रशासन अचानक भुगतान करने की कवायद में जुट गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बिना जांच जेएनएनयूआरएम के कामों का भुगतान आखिर कौन कराना चाहता है? एक तरफ नगर विकास विभाग और स्थानीय निकाय निदेशालय जल निगम को कि स्त जारी कराने को लेकर आदेश जारी कर रहा है तो दूसरी ओर नगर विकास मंत्री सवाल उठा रहे हैं कि भुगतान क्यों रोका गया था और अब क्यों जारी किया जा रहा है? खास बात यह है कि जून में जब नगर आयुक्त ने जांच के नाम पर जल निगम की किस्त रोकी थी तब न शासन ने आपत्ति उठाई न नगर विकास विभाग ने। यहां तक कि स्थानीय निकाय निदेशालय ने भी कोई आपत्ति नहीं की। ऐसे में जांच होने से पहले ही शासन द्वारा भुगतान कराने को लेकर शासनादेश जारी किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। वहीं कार्यों की स्थिति यह है कि भ्रष्टाचार के दीमक ने करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए की जेएनएनयूआरएम योजना को अभी से ही चट करना शुरू कर दिया है। तमाम जगह सीवर लाइन बिछने के बाद अभी सड़क भी नहंी बन पाई और चंद महीनों में ही मैनहोल के ढक्कन चकनाचूर हो गए हैं। जो जानलेवा हादसों को दावत दे रहे हैं। यही हाल उन इलाकों का भी है जहां पर सड़क बन गई हैं। कहीं बीच सड़क पर बने टीलेनुमा मैनहोल वाहन सवारों को चोटिल कर रहे हैं तो कहीं टूटे मैनहोल हादसों का कारण बन रहे हैं। वहीं खुदी सड़कें बारिश के मौसम में कीचड़ बन गईं हैं। जिन पर चलना जोखिम से कम नहीं है। ऐसे में यदि योजना के तहत कराए गए कार्यों की गुणवत्ता जांच नहीं हुई तो जनता की गाढ़ी कमाई पर पानी फिर जाएगा और घोटालेबाज बच निकलेंगे। जांच नहीं हुई तो जिम्मेदारी भी तय नहीं हो पाएगी और जनता के धन को तिजोरियों में भरने वाले मौज करेंगे।
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फिलहाल तो फाइल ठंडे बस्ते में
जल निगम को जेएनएनयूआरएम की 56 करोड़ रुपए की किस्त जारी करने के मामले में शासन और सरकार में मचे घमासान के बाद नगर निगम ने हाथ खींच लिए हैं। मंत्री की नाराजगी को देखते हुए किस्त जारी नहीं की गई और फाइल को अलमारी में बंद कर दिया गया है। जिसके बाद अब जल्द किस्त जारी होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। वहीं नगर निगम और जल निगम के अधिकारियों में हड़कम्प मचा है। वह अब इस मसले पर बात करने से भी कतराने लगे हैं। वहीं नगर आयुक्त एनपी सिंह का कहना है कि अभी किस्त जारी नहीं की गई है। जवाब मांगने सम्बंधी शासन का कोई पत्र अभी नहंी मिला है। पत्र मिलने के बाद जवाब भेजा जाएगा और किस्त जारी करने या न करने के सम्बंध में निर्देश मांगा जाएगा। उससे पहले नगर निगम किस्त जारी करने को लेकर अपने स्तर से कोई कदम नहीं उठाएगा।
पर्दे के पीछे कौन
जल निगम की रुकी 56 करोड़ रुपए किस्त जारी करने में किसी बड़ी शख्सियत का हाथ है। लोगों का मानना है कि यदि किसी रसूखदार का दखल न होता तो चार महीने से जो किस्त रुकी थी उसको जारी कराने में शासन के दो पीसीएस अधिकारी इतनी तेजी न दिखाते और न ही नगर आयुक्त नरम पड़ते।
320 किमी. और बिछानी है लाइन
शहर में कुल 1170 किमी सीवर लाइन बिछाई जानी है। जिसमें अब तक करीब 850 किमी ही लाइन डाली जा सकी है। करीब 320 किमी लाइन बिछाए जाने का काम अब भी शेष है।
क्यों दूर हैं महापौर
महापौर डॉ. दिनेश शर्मा कभी फ्रंट पर नहीं आए। न पिछले कार्यकाल में उन्होंने योजना की किसी फाइल का अनुमोदन किया न इस बार। चाहें कचरा प्रबंधन का मामला रहा हो या सीवरेज और वाटर सप्लाई का। जब उनके पास इन योजनाओं की फाइलें भेजी गईं महापौर ने हर बार उनको लौटा दिया। इस बार भी यही हुआ।
ये अफसर आगे क्यों
जेएनएनयूआरएम की रुकी 56 करोड़ रुपए की किस्त जारी कराने को लेकर विशेष सचिव नगर विकास एसपी सिंह और निदेशक स्थानीय निकाय रेखा गुप्ता फ्रंट पर आईं। विशेष सचिव और निदेशक स्थानीय निकाय ने नगर निगम पर किस्त जारी करने का दबाव बनाया। बड़े नेताओं व नौकरशाहों का करीबी है ठेकेदार!
सीवर सिस्टम, वाटर सप्लाई, ड्रेनेज सिस्टम व कचरा प्रबंधन योजना का ज्यादातर काम जिस ठेकेदार के पास है उसकी पूर्ववर्ती बसपा सरकार में अच्छी पकड़ थी। उस समय पंचम तल पर तैनात कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों का उस पर वरदहस्त था। जिसके चलते ही उस समय उसे जेएनएनयूआरएम योजना का ज्यादातर काम मिला। कचरा प्रबंधन का काम देने के लिए तो नगर निगम के हित की अनदेखी तक की गई।

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