तहजीब की नगरी में तकनीकी के कलमकारों का मंथन

Lucknow Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। देश-दुनिया के ब्लॉगरों की सोमवार को जो मुलाकात हुई वह इंटरनेट के वेबपेज पर नहीं थी। तहजीब की नगरी में तकनीकी को कलम बनाकर लिखने वाले कैसरबाग के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॅागर सम्मेलन जुटे। वे जब मिले तो इतनी गर्मजोशी थी जैसे वे वर्षों से कितने करीब हों। उनमें अचानक और अनपेक्षित लोकप्रियता का उत्साह था तो हाल में सरकार द्वारा वेबसाइटों के विरुद्ध प्रतिबंधों को लेकर आशंका भी थी। चर्चा हुई कि एक दशक पुराना ब्लॉग लेखन देश की विविधतापूर्ण तस्वीर को समेटने में सफल तो हुआ ही है, उस उपेक्षित हिस्सों की खबरें भी ला रहा है जो दूसरे माध्यमों में प्रमुखता से नहीं आ पाती हैं। तस्लीम और परिकल्पना डॉट कॉम ने इस आयोजन के लिए काफी मेहनत की थी जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों के अतिरिक्त लंदन और शारजाह से भी प्रतिनिधि जुटे थे। दिन भर चली चर्चा में बात उठी कि यह एक वैकल्पिक माध्यम के रूप में सशक्त ढंग से उभरा है। साथ ही चिंता जताई गई कि कुछ लोग इसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। सांप्रदायिकता भड़काने वाली हाल की भ्रामक खबरों पर इस मौके पर चिंता भी जतायी गयी। वक्ताओं ने स्वीकारा कि यह किसी चाकू की तरह है, अगर डॉक्टर के हाथ में हो तो वह सर्जरी करेगा अगर किसी बदमाश के हाथ में चला जाए तो वह अपराध कर सकता है। वक्ताओं ने कहा कि प्रतिबंध की बात वही सोच सकता है जो इंटरनेट की तकनीकी से अनभिज्ञ हो। यह माध्यम रक्तबीज की तरह है अगर एक सिर कटेगा तो रक्त की बूंदें जहां-जहां गिरेगी वहां-वहां नए सिर उठ खड़े होंगे। एक वेबसाइट पर प्रतिबंध लगेगा तो कई नई वेबसाइटें शुरू हो जाएंगी। सम्मेलन में बड़ी संख्या में ब्लॉगरों के अतिरिक्त कई प्रमुख साहित्यकार भी शामिल थे जिनमें मुद्राराक्षस, शिवमूर्ति, वीरेन्द्र यादव, उदभ्रान्त, शैलेन्द्र सागर, शकील सिद्दीकी जैसे नाम प्रमुख थे। इनमें से कई ब्लॉग पर सक्रिय हैं तो कुछ ब्लॉग के बारे में बहुत कम जानते थे। ब्लॉग लेखन की साहित्य जगत में अपेक्षित चर्चा नहीं होती। साहित्यकारों का सम्मेलन में कहना था कि यह कहने का सशक्त माध्यम है लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि हम कहना क्या चाहते हैं। किसी प्रसिद्ध विद्वान को उद्धृत करते हुए एक वक्ता ने कहा कि आने वाले समय में जानकार वह नहीं होगा जो कंप्यूटर माध्यम से जानकारी ग्रहण कर सकेगा बल्कि वह होगा जो अपनी जानकारियों का पुनर्पाठ कर सकेगा। क्योंकि इस माध्यम से बहुत सारा कूड़ा-करकट भी हमारे दिमाग में भर रहा है। ब्लॉगरों का आरोप था कि साहित्य जगत का एक तबका है जो ब्लॉगरों को महत्व नहीं देना चाहता है। समारोह में प्रस्ताव भी पारित किया गया कि राजधानी में ब्लॉगरों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और वीडियो कांफ्रेसिंग जैसी सुविधाओं वाला भवन बनाया जाए और ब्लॉग कोश का निर्माण हो जिसमें उत्कृष्ट पोस्ट का संकलन हो। लंदन से आयीं शिखा वार्ष्णेय का कहना था कि जब हम सड़क पर चलते हैं तो अच्छे बुरे सभी तरह के लोग मिलते हैं। ब्लॉग लेखन को भी इसी रूप में देखने की जरूरत है। शारजाह से अभिव्यक्ति ब्लॉग का संचालन करने वाली पूर्णिमा बर्मन ने कहा कि ब्लॉग लेखन को भले ही एक दशक पुराना माना जा रहा हो लेकिन वेबपेज पर लिखने की शुरुआत इससे भी पहले हो गई थी। वरिष्ठ ब्लॉगर रवीन्द्र रतलामी ने कहा कि अगर किसी वेबसाइट पर प्रतिबंध लगता है तो भी उसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता क्योंकि प्राक्सी सर्वर के माध्यम से उन्हें खोला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अब ऐसी तकनीकी भी है जिसके माध्यम से लिखने पर आपके कंप्यूटर की जानकारियां दर्ज नहीं होती हैं। साहित्यकार मुद्राराक्षस का कहना था कि यह प्रयास भी होना चाहिए कि ब्लॉग उन लोगों तक कैसे पहुंचे जो इंटरनेट के जानकार नहीं हैं। इस मौके पर ब्लॉगरों को पुरस्कृत भी किया गया।

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