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बिना जांच हो जायेगा 56 करोड़ रुपये का भुगतान

Lucknow Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। जेएनएनयूआरएम के कार्यों की बगैर जांच के ही 56 करोड़ रुपये का भुगतान जल निगम को किया जा रहा है। सोमवार को नगर निगम इसके चेक जारी कर देगा। इससे पूर्व नगर निगम ने आईआईटी से जांच कराने के बाद ही भुगतान करने का निर्णय लिया था। करोड़ों की इसी किस्त को रोके जाने को नगर आयुक्त के निलंबन की सिफारिश की वजह भी माना जा रहा था। सोमवार को मंत्री की समीक्षा बैठक से पूर्व भुगतान का निर्णय को मंत्री की उसी नाराजगी को दूर करने के रूप में देखा जा रहा है। जल निगम को जेएनएनयूआरएम में सीवरेज डिस्ट्रिक्ट थर्ड, पार्ट-टू की 2680.36 लाख और सीवरेज डिस्ट्रिक्ट थर्ड, पार्ट-वन की 2752.68 लाख रुपए की किश्त चार महीने पहले ही मिलनी थी। अप्रैल में जब एनपी सिंह ने नगर आयुक्त का कामकाज संभाला तो उन्होंने नगर निगम की देनदारी और जेएनएनयूआरएम में चल रहे कार्यों की गुणवत्ता को लेकर काफी सख्ती दिखाई। कार्यों की गुणवत्ता की औचक जांच के लिए उन्होंने जल निगम, नगर निगम और जल संस्थान के अधिकारियों की एक टीम भी बनाई। जून में उन्होंने सीवरेज और वाटर सप्लाई के कार्यों की आईआईटी से जांच कराने का निर्णय लेने के साथ ही जल निगम को किये जाने वाले भुगतान पर रोक लगा दी। इस दौरान जल निगम ने किस्त जारी करने को लेकर शासन से दबाव बनवाया तो नगर आयुक्त ने यह शर्त रख दी कि जल निगम लिखित रूप में दे कि गुणवत्ता खराब पाये जाने पर सारी जिम्मदारी उसकी होगी।
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खींचतान का यूं चला खेल ः विवाद के बाद गत 24 जुलाई को महाप्रबंधक गोेमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई जल निगम जेड. ए. अंसारी ने शासन को यह लिखकर दिया कि यदि जांच में गड़बड़ी पाई गई तो जल निगम की जिम्मेदारी होगी। इसके बाद तीन अगस्त को अपर नगर आयुक्त जेएनएनयूआरएम पीके श्रीवास्तव ने जल निगम को भुगतान करने के लिए नगर आयुक्त को फाइल भेजी। उसी दिन पत्रावली महापौर डॉ. दिनेश शर्मा केपास अनुमोदन के लिए भेजी गई लेकिन महापौर कार्यालय ने पत्रावली लौटा दी। इसकी सूचना नगर आयुक्त की ओर से आठ अगस्त को निदेशक स्थानीय निकाय रेखा गुप्ता को दी गई क्याेंकि जल निगम को जल्द से जल्द किश्त जारी करने को लेकर वह नगर आयुक्त को कई पत्र जारी कर चुकी थीं। नौ अगस्त को निदेशक स्थानीय निकाय ने नगर आयुक्त को नाराजगी भरा पत्र लिखा और कहा कि महापौर को पत्रावली भेजने का कोई औचित्य नहीं था। नगर निगम अधिनियम में दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि महापौर किसी योजना के शुरू होने को लेकर एक माह तक बैठक बुलाकर मंजूरी नहीं देते तो एक माह बाद शासन की अनुमति से नगर आयुक्त उसको लागू कर सकता है। वैसे भी जेएनएनयूआरएम योजना में काम पिछले करीब सात साल से चल रह है। 19 अगस्त को नगर आयुक्त ने जल निगम, नगर निगम व जल संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने 25 अगस्त को निगम के पैनल में शामिल एक अधिवक्ता से भुगतान को लेकर कानूनी राय भी लिया। जल निगम को किस्त जारी करने संबंधी विधिक राय मिलने के बाद नगर निगम प्रशासन ने भुगतान को हरी झंडी दे दी।

कचरा प्रबंधन योजना की रुकी किस्त भी जारी करने की तैयारी ः सीवरेज के बाद नगर निगम प्रशासन कचरा प्रबंधन योजना की रुकी करीब आठ करोड़ रुपये की किस्त भी जारी करने जा रहा है। इसको लेकर पूरी तैयारी कर ली गई। रस्म अदायगी के लिए फाइल महापौर को भेजा जा रहा है। नगर आयुक्त ने कचरा प्रबंधन योजना की राशि तीन महीना यह कहते हुये रोक दी थी कि योजना में 38 करोड़ रुपए का खर्च बताया जा रहा है जबकि काम देखने के बाद ऐसा नहीं लगता है। इसको लेकर जल निगम व कार्यदायी संस्था से खर्च का पूरा ब्यौरा मांगा गया था। जिसे न तो जल निगम और न ही कार्यदायी संस्था ही अब तक दे पाई है। वहीं अब नगर आयुक्त का कहना है कि कार्यदायी संस्था के काम में अब सुधार हुआ है। कचरा निस्तारण प्लांट का भी अधूरा काम पूरा किया जा रहा है।


...समीक्षा बैठक से पहले मंत्री की की नाराजगी दूर करने के लिए तो नहीं ः जेएनएनयूआरएम में सीवेरज योजना की 56 करोड़ रुपए की रोकी गई किस्त को जारी करने को नगर विकास मंत्री की नाराजगी को दूर करने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि खराब सफाई व्यवस्था को लेकर नगर आयुक्त के निलंबन की सिफारिश किये जाने के पीछे ठोस वजह यही थी। बचाव का रास्ता अपनाते हुये नगर निगम प्रशासन ने बिना जांच के ही जल निगम को किस्त जारी करने का निर्णय लिया और विभागीय मंत्री की सोमवार को होने वाली समीक्षा बैठक से पहले ही जल निगम की रुकी किस्त जारी करने की मंजूरी देकर मंत्री की नाराजगी दूर करने का उपाय कर लिया।


हवा हो गया जांच कराने का दावा ः जेएनएनयूआरएम के कार्यों की जांच को लेकर नगर निगम में हो-हल्ला तो खूब हुआ मगर सब फुस्स साबित हुआ। जून में नगर आयुक्त ने गुणवत्ता जांच आईआईटी कानपुर से कराने का कहा था मगर जांच अब तक नहीं हो पाई। स्थिति यह है कि अब तक नमूने लेने का काम तक शुरू नहीं हुआ।जांच को लटकाये रखे जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

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