घर में कैद भाई बहनों ने नहीं ली मदद

Lucknow Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। हमें हमारे हाल पर छोड़ दें.. हमें आपकी कोई मदद नहीं चाहिए...। पिछले 12 सालों से इंदिरानगर शालीमार चौराहे स्थित घर में फटेहाल से बिन मां-बाप के अकेले रह रहे भाई-बहनों के पास शुक्रवार दोपहर जब प्रशासनिक अमला पहुंचा तो उन्हें यही जवाब मिला। लगभग दर्जन भर कुत्ते भौंकते रहे, टीम अंदर जाने को कहती रही। तमाशबीनों की भीड़ भाड़ के बीच वे दिन भर आने जाने वालों को टुकुर टुकुर देखते रहे। शनिवार को टीम फिर अंदर जाने का प्रयास करेगी। इंदिरानगर शालीमार चौराहे के पास स्थित ए-416 मकान में बीते 12 वर्षों से मकान में बड़ी ही दयनीय स्थिति में रह रहे अंजना भट्ट, रंजना भट्ट और बबलू की हालत के बारे में जानकर पड़ोसियों का जमावड़ा वहां लगने लगा। लगभग 12 साल पहले एक मार्ग दुर्घटना में इस परिवार ने अपने माता पिता दोनों को ही गंवा दिया। सैन्यकर्मी पिता ओपी भट्ट की मौत हो गई। सिर से मां का साया भी उठ गया। गम, अवसाद और असुरक्षा के चलते घर के बच्चे बंद मकान में ही जीने लगे। वे तब किशोर थे, अब युवा हो गये और काफी हद तक मानसिक रूप से बीमार भी। सालों से उन्हें किसी न देखा। बिजली और पानी का कनेक्शन कटे भी दस साल से ज्यादा हो गए। डर ऐसा कि आस पड़ोस के दुकानदारों ने घर के सामने अंदरूनी हिस्सों पर भी कब्जा कर लिया। जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो सुबह 10 बजे तक घर के बाहर पड़ोसियों से ज्यादा तमाशबीनों की भीड़ लग गई। लोगों को जुटता देख जानकर पुलिस भी पहुुंची और कब्जेदार कबाड़ी दुकानदार को भगाया। घर का अतिक्रमण को भी हटाया। दोपहर तक मीडिया कर्मियों का भी जमावड़ा लगने लगा। कोई बाहर से कोई पड़ोसियों के घर से चढ़कर भीतर का हाल फिल्माने में जुटा। मानसिक रूप से बीमार घरवालों की जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल से चिकित्सकों का दल पहुंचा। एडीएम के साथ मौके पर तमाम प्रशासनिक अमला भी पहुंचा। लेकिन दल में कोई भी महिलकर्मी के न होने की वजह से किसी ने भीतर जाने का कदम नहीं उठाया। बाद में पड़ोस के बुजुर्गों के साथ एडीएम और डॉक्टरों की टीम ने भीतर घुसने का प्रयास किया तो पोर्च में पले दर्जन भर से अधिक कुत्तों ने उन्हें घुसने ही नहीं दिया। टीम के सदस्यों का आमना-सामना अंजना से हुआ तो उसने भी मदद न करने को लेकर झिड़क दिया।
हू द हेल आर दे..: लखनऊ। सुबह से ही घर के बाहर जमा हो रहे तमाशबीनों की भीड़ से लावारिसों का जीवन जी रहे बच्चों को गुस्सा सा आने लगा। 12 साल से घरों में कैद तीनों ही भाई-बहन घूम फिरकर आपस में कभी अंग्र्रेजी तो कभी हिंदी में बात करते दूसरों पर बड़बड़ाते नजर आए। यही नहीं जब पुलिस के साथ डाक्टरों ने मदद-जांच के लिए अंदर जाने का प्रयास किया तो उन्हें भी छोटी बहन अंजना ने फर्राटेदार अंग्रेजी में नसीहतें देते हुए झिड़क दिया। पड़ोसियों ने बताया कि तीनों ही कान्वेंट एजुकेटेड रहे हैं, लेकिन उनकी बदनसीबी अब सबके सामने हैं। बाद में मीडियाकर्मियों से एक बहन ने अंग्रेजी में ही बातचीत की।

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