गड्ढे में फेंकी 1.46 करोड़ रुपये की जिप्सम

Lucknow Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
मोहनलालगंज। ऊसर (बंजर) खेतों को उपजाऊ बनाने के नाम पर खरीदी गई 1.46 करोड़ रुपये की जिप्सम किसानों की जगह गड्ढों में दबा वितरित दिखाने का मामला प्रकाश में आया है। वेयर हाउस और भूमि सुधार निगम के अफसरों की मिलीभगत से हुए इस खेल में विश्व बैंक पोषित परियोजना से ऊसर खेतों में डलवाने के लिए किसानों को बांटी जाने वाली जिप्सम की बोरियां ट्रैक्टरों से जुतवाकर इलाके के गड्ढों व तालाब में दबाकर नष्ट कर दी गई। विश्व बैंक पोषित परियोजना के तहत 73 रुपया प्रति बोरी वाला जिप्सम। किसानों को छिड़काव के लिए मात्र तीन रुपया प्रति बोरी वितरित किया जाता है। इस मामले का खुलासा होने के बाद शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने ब्लॉक में जमकर धरना-प्रदर्शन किया। इससे चेते प्रशासन ने तहसीलदार को भेज जब पूरे प्रकरण की जांच शुरू कराई। तो जिप्सम की बोरियां गड्ढों में दबी मिली। विश्व बैंक पोषित ऊसर सुधार परियोजना के फेस तीन में लखनऊ, रायबरेली व सुलतानपुर जिले के किसानों को जिप्सम वितरित करने के लिए जिप्सम की करीब दो लाख बोरियां वेयर हाउस मोहनलालगंज और उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम के अफसरों को प्राप्त हुई थी। अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के निकट एक निजी स्कूल के सामने खेत में एक साल तक किसानों को वितरित की जाने वाली जिप्सम बोरियों को डंप रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि दो दिन में रात में कई ट्रैक्टर लगा कर पहले जिप्सम बोरियों को जुतवाया गया और इसके बाद अधिकारियों की मौजूदगी में हजारों बोरियां जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर जमीन में व अन्य हजारों बोरियां आसपास के गड्ढे व तालाब में फिकवा दी गईं। शुक्रवार को जिप्सम बोरियां नष्ट किए जाने को लेकर गुस्साएं भाकियू ब्लॉक इकाई के तत्वावधान में क्षेत्रीय किसानों ने आला अधिकारियों को मामले की जानकारी देने के बाद दोषियों पर कार्रवाई को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया। इससे तहसीलदार मोहनलालगंज पारसनाथ मौर्या पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू की। इलाके के चिह्नित गड्ढों की खोदाई कराने पर उसमें दबी जिप्सम की बोरियां देख तहसीलदार भी दंग रह गए। तहसीलदार पारसनाथ ने जिप्सम वितरित किए बिना नष्ट किए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी।
निष्पक्ष जांच पर खुलेगा बड़ा घोटाला: भाकियू ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश यादव का आरोप है कि निगम कर्मचारी वेयरहाउस कर्मियों के साथ मिलीभगत कर किसानों को बंटने वाली जिप्सम बोरियों को नकली खाद बनाने वालों व सीमेंट में मिलावट करने वालों के हाथों बेंच कर मोटी कमाई करते हैं। इसकी शिकायत आला अधिकारियों से किए जाने के बाद अपनी गर्दन बचाने को जिप्सम बोरियां नष्ट करने का काम किया गया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच से बड़े घपले का खुलासा हर हालत में होगा।

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