पैसा स्वीमिंग पूल का लिया अब दे रहे धमकी

Lucknow Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। 45 हजार वर्ग फुट का परिसर। आठ मंजिल के कई ब्लॉकों का एक अपार्टमेंट। नाम, फार्च्यून रिवेरा ब्ल्यू। कुल 62 फ्लैट इस बिल्डिंग में हैं। वर्ष 2006 में जब इस बिल्डिंग के फ्लैटों की बुकिंग शुरू हुई तो एक नहीं अनेकों लुभावने वादे आवंटियों से किए गए। मगर छह साल बाद अब आवंटी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनको स्वीमिंग पूल, हेल्थ क्लब, कम्युनिटी सेंटर जैसी सुविधाएं देने को कहा गया था। मगर मिला कुछ भी नहीं। हां, यह जरूर है कि इन सुविधाओं के लिए लाखों रुपए का अतिरिक्त भुगतान जरूर ले लिया गया। आवंटी शिकायत करते हैं तो धमकियां सुनने को मिल रही हैं। इस मामले में आवंटी अब पुलिस की शरण में गए हैं। पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज कर लिया है, लेकिन आवंटियों को उनकी सुविधाएं मिल पाएंगी, इसमें शक है। फार्च्यून रिवेरा ब्ल्यू अपार्टमेंट में 2, 3 और 4 बीएचके के 62 फ्लैट हैं, जिनका क्षेत्रफल 1400 से 3200 वर्ग फुट है। आवंटियों को जब फ्लैट दिए गए थे तब उनसे यह वादा किया गया था कि उनको यहां हेल्थ क्लब, स्वीमिंग पूल, कम्युनिटी सेंटर और पार्क की सुविधा दी जाएगी। मगर यह सुविधाएं अब तक नहीं मिल सकी हैं। आवंटियों की शिकायत है कि उन्हें पार्क के नाम पर एक छोटा सा घास का टुकड़ा दिया जा रहा है, जिसका अब निर्माण शुरू करवाया जा रहा है। इसके लिए यहां बाहर की गंदगी को डाला गया है। दूसरी ओर, जिस बेसमेंट में क्लब, कम्युनिटी सेंटर और स्वीमिंग पूल का निर्माण किया जाना था, उसको गोदाम बना दिया गया है। यहां बिल्डर की अन्य साइट्स में लगाया जाने वाला सामान भरा हुआ है।
जुबां पर उभरा दर्द: न्यू हैदराबाद स्थित इस परिसर में शुक्रवार दोपहर जब ‘अमर उजाला’ का संवाददाता पहुंचा तो आवंटियों का दर्द उभर आया। यहां की वेलफेयर कमेटी के सेकरेटरी व फ्लैट नंबर बी 504 के आवंटी आमिर सिद़्दीकी ने कहा कि हम लिफ्ट, मीटर, बिजली संबंधी कोई भी शिकायत करते हैं तो उल्टी बातें सुनने को मिलती हैं। शिकायत लिख कर देने को कहा जाता है, समाधान तो दूर की बात है। इलेक्ट्रिक पैनल में तारों का संजाल दिखता है। बी-1, 401 में रहने वाले डॉ. बीएन सिंह ने बताया कि बच्चों के खेलने का कोई भी इंतजाम नहीं है। बी-303 में रहने वाले मोहित पाण्डेय कहते हैं कि अधिकांश लिफ्ट खराब हैं, जो सही भी रहती हैं, उनकी हालत ठीक नहीं है। बी-604 में रहने वाले डॉ. अमित नागर भी ऐसी ही शिकायत करते हैं। ए-501 में रहने वाली ममता का कहना है कि जब हम यहां आए थे तो कितने वादे किए गए थे, मगर पूरा एक भी नहीं हुआ है। दरवाजे और ट्वायलेट शीट चाइनीज लगा दी गई, जिनकी कोई गुणवत्ता नहीं है। बी-304 की रंजना सिन्हा बताती हैं कि अक्सर बिजली उपकरण जल जाते हैं, लेकिन शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती।

कैसे बन रहा पेंट हाउस: सबसे ऊपरी मंजिल पर फ्लैटों के अतिरिक्त पेंट हाउस बनाए जा रहे हैं। इनकी दीवारें खड़ी की जा चुकी हैं, जबकि अस्थाई लिफ्ट मजदूरों और सामान को ऊपर ले जाने के लिए लगाई हुई हैं। ये लिफ्ट यहां रहने वाले लोगों के लिए खतरा हैं। मगर इनको न तो हटाया जा रहा है और न ही निर्माण रुक रहा है।

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