अलविदा की नमाज के बाद हुए उपद्रव का मामला ः मंडल आयुक्त न शुरू की जांच

Lucknow Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। अलविदा की नमाज के बाद शहर में शुक्रवार 17 अगस्त को हुए उपद्रव की जांच मंडलायुक्त ने शुरू कर दी। इस संबंध में उन्होंने बृहस्पतिवार को नोटिसकी कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों को घटना की बाबत साक्ष्य व बयान देने के लिए बुलाया। जांच के लिए शासन ने एक माह की मियाद तय की है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इसमें समय अधिक लगेगा, क्योंकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बहुत से लोगों के बयान लेने के साथ बड़े पैमाने पर साक्ष्य जुटाने होंगे। मंडलायुक्त का कहना है कि सभी लोगों को घटना के संबंध में बयान व साक्ष्य देने का पूरा अवसर दिया जाएगा। उपद्रव की जांच के संबंध में शासन का आदेश बुधवार को मंडलायुक्त संजीव कुमार मित्तल को उनके कार्यालय में प्राप्त हुआ। उपद्रव गत 17 अगस्त को दोपहर बाद शुरू हुआ, जब अलविदा की नमाज के बाद निकली भीड़ अचानक बेकाबू हो गई। उपद्रवियों ने बुद्धा पार्कसे लेकर हजरतगंत तक तोड़फोड़, आगजनी व आम लोगों के साथ मारपीट की। इस घटना से कई किलोमीटर के दायरे में ढाई घंटे तक अराजकता की स्थिति रही और शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद अफसर भीड़ को काबू नहीं कर पाए। घटना की गंभीरता को देखते शासन ने मंडलायुक्त से जांच कराने के आदेश दिया। उक्त आदेश पांच दिन बाद मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचा, जिसके आधार पर बृहस्पतिवार को कार्रवाई शुरू हुई। मंडलायुक्तके मुताबिक शासन के निर्देशानुसार जांच की जा रही है। जांच के दौरान घटना के संबंध में जानकारी व साक्ष्य जुटाए जाने हैं, इसलिए सभी पक्षों को अपना बयान व साक्ष्य देने के लिए आमंत्रित किया गया है। अगर किसी के पास कोई जानकारी है तो वह उपलब्ध करा सकता है।

पुलिस-प्रशासन के अफसर भी देंगे बयान ः उपद्रव की जांच का सामना पुलिस व प्रशासन के उन अफसरों को भी करना होगा, जिनकी हिंसा प्रभावित इलाके में ड्यूटी थी। विगत वर्ष ऐसे ही प्रकरण की जांच कर चुके एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिन अफसरों की ड्यूटी थी उन्हें अपने स्तर से की गई कार्रवाई के बारे में जांच अधिकारी को अवगत कराना होगा। ऐसे अधिकारियों में संबंधित एसओ, सीओ के साथ क्षेत्रीय मैजिस्ट्रेट, एडीएम व एडिशनल एसपी को बयान के लिए बुलाया जा सकता है। अधिकारियों के बयान को इसलिए भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन पर उपद्रवियों पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने के आरोप लग रहे हैं।

कैमरों में कैद तस्वीरें होंगी महत्वपूर्ण ः जांच में मीडियाकर्मियों के कैमरे महत्वपूर्ण साक्ष्य दे सकते हैं। प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के कैमरों ने तोड़फोड़ व मारपीट करने वालों की काफी नजदीक से कवरेज की। इसी दौरान उन्हें भी उपद्रवियों ने अपना निशाना बनाया। कई कैमरे तोड़े और छीन लिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर उपद्रवी कैमरों में कैद हुए। हिंसा करने वाले दर्जनों चेहरे पूरी तरह स्पष्ट हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई केलिए पुलिस-प्रशासन को पहचान सुनिश्चित करना होगा। इसी मकसद से पुलिस अपनी विवेचना में फोटो की मदद ले रही है।

Spotlight

Most Read

Madhya Pradesh

14 साल के इस बच्चे ने कराई चार कैदियों की रिहाई, दान में दी प्राइज मनी

14 साल के आयुष किशोर ने चार कैदियों की रिहाई के लिए दान कर दी राष्ट्रपति से मिली प्राइज मनी।

22 जनवरी 2018

Related Videos

जब ‘दादा’ ने किया चार साल की मासूम का रेप, हुआ ये हाल

बागपत के बिनौली थानाक्षेत्र में चार साल की मासूम से रेप का मामला सामने आया है। घर के बाहर खेल रही बच्ची को आरोपी बहला-फुसलाकर एक मकान में ले गया और वारदात को अंजाम दिया, देखिए ये रिपोर्ट।

22 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper