श्मशान व तालाब पर मकान बना रहा एलडीए

Lucknow Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। गोमती नगर विस्तार में मलेसेमऊ गांव की 40 एकड़ तालाब और श्मशान घाट की भूमि पर एलडीए की ग्रुप हाउसिंग स्कीम की इमारतें खड़ी हो रही हैं। 17 तालाब और 14 मरघट खो चुके हैं। इनमें से गरीबों के लिए 128 फ्लैटों की अपना घर योजना की बिल्डिंग भी एक श्मशान घाट पर बनाई जा रही है। रिवर व्यू एनक्लेव के कुछ ब्लॉक तालाबों की भूमि पर बनाए जा रहे हैं। किसान लगातार इस मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं। वहीं प्राधिकरण इस मसले से पल्ला झाड़ रहा है। कहा जा रहा है कि श्मशान की भूमि समायोजित कर दी गई है। गोमती नगर विस्तार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के समय से आंदोलन चल रहा है। लेकिन किसानों की बात को अनसुना कर दिया गया। शासनादेश में पाबंदी होने के बावजूद शहर के विकास के नाम पर योजनाओं के लिये प्राकृतिक संसाधनों और श्मशानों को धड़ल्ले से अधिग्रहीत किया गया। अधिग्रहण में हुई इस गलती को बाद में इंजीनियरों ने भी सुधारने में कोई रुचि नहीं दिखाई और लगातार योजनाएं ऐसी भूमि पर स्वीकृत की जाती रहीं।
2010 में हुआ सबसे बुरा हाल: 2010 में सबसे बुरा हाल हुआ। तत्कालीन वीसी मुकेश कुमार मेश्राम एलडीए में अपार्टमेंट कल्चर को बढ़ावा देना चाहते थे। सबसे अधिक गोमती नगर विस्तार में अपार्टमेंट की स्कीम लांच की गईं। करीब तीन हजार रिवर व्यू, दो हजार सुलभ, चार सौ वनस्थली, छह सौ ग्रीनवुड और 128 अपना घर स्कीम के फ्लैट विस्तार में लांच किये गये। सहज और कल्पतरु स्कीम भी यहीं हैं। सेक्टर-1 से लेकर सेक्टर-6 तक स्कीम बनाने का काम शुरू हुआ। स्कीम लांच किये जाने की हड़बड़ी में इंजीनियर भी हामी भरते चले गये। भूमि की उपलब्धता की फिक्र न कर ले आउट बनाना शुरू कर दिया गया। इसी वजह से स्कीम के चलते प्राकृतिक संसाधन गायब हो गए।
ये खसरा नंबर हैं तालाबों के: गांव मलेसेमऊ के खसरा संख्या 87 ख, 85, 93, 94, 98, 97107 क, 100, 205, 402, 672, 692ख, 694, 700ख, 709ख और 712 की करीब 32 बीघा भूमि तालाब के रूप में दर्ज हैं। मौके पर एक भी तालाब नहीं है। इन तालाबों के स्थान पर कहीं सड़क तो कहीं अन्य सुविधाएं दी गई हैं। विस्तार सेक्टर-4 में रिवर व्यू एनक्लेव के राप्ती और सरस्वती ब्लॉकों का निर्माण तालाब की भूमि पर किया जा रहा है।
ये खसरा नंबर हैं श्मशान के: इसी गांव के खसरा संख्या 145, 220, 243, 253, 260, 350, 352, 356, 372, 410, 439,216, 221 और 430 करीब 68 बीघा भूमि पर भी यही हाल है। ये सारे खसरा संख्या श्मशान के रूप में दर्ज हैं। इसमें से तीन-चार को किसान आंदोलन की वजह से प्राधिकरण ने छोड़ा। बाकी सभी का इस्तेमाल ग्रुप हाउसिंग स्कीम के लिए किया जा रहा है। बाहरी विकास के साथ ही इमारतें बनायी जा रही हैं।
‘अपना घर’ में छले गये: अपना घर प्राधिकरण की सबसे बड़ी छलावा स्कीम रही है। अत्यंत गरीबों के लिए तीन लाख और पांच लाख रुपये मूल्य की स्कीम निकाली गई थी। वर्ष-2010 में इस स्कीम के तहत सात हजार आवेदन आए थे। सभी आवेदकों को फ्लैट देने की घोषणा की गई थी। बाद में भूमि और धन की कमी के चलते मात्र 127 फ्लैट बनाने पर हामी भरी गई। सेक्टर-4 में जहां अपना घर की बिल्डिंग बन रही है, उसका आधा हिस्सा श्मशान के रूप में दर्ज है।

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